Donald Trump 5 Peace Deal Fail: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान खुद को “शांति के निर्माता” के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की. उन्होंने कई देशों और विवादित क्षेत्रों में समझौते करवाने का दावा किया, बड़े इवेंट आयोजित किए, मीडिया में शोर मचाया और विश्वभर में खुद को शांति का प्रेरक बताया.
हालांकि, असलियत में इन समझौतों का प्रभाव सीमित रहा और कई मामलों में संघर्ष फिर से भड़क गया.
थाईलैंड और कंबोडिया में संघर्ष
हाल ही में थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा विवाद फिर से सामने आया. दोनों देशों ने एक-दूसरे पर सैन्य कार्रवाई की और पिछले समझौतों को दरकिनार कर दिया. ट्रंप प्रशासन ने कुछ समय पहले इन देशों के बीच शांति समझौता करवाने का दावा किया था और इसे अपनी कूटनीतिक सफलता के रूप में प्रस्तुत किया.
हालांकि, वास्तविक हालात बताते हैं कि थाईलैंड ने कंबोडियाई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए और आरोप लगाया कि कंबोडिया ने नई खदानें बिछाकर समझौते का उल्लंघन किया. इसके चलते बैंकॉक ने सीजफायर को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया. यह स्थिति साबित करती है कि ट्रंप का दावा केवल कागज पर था और जमीन पर कोई स्थायी शांति स्थापित नहीं हुई.
गाजा सीजफायर योजना की विफलता
मध्य पूर्व में भी ट्रंप के शांति प्रयासों का असर सीमित रहा. इजरायल और हमास के बीच उनके मध्यस्थता में समझौता हुआ था, लेकिन यह केवल कुछ घंटों तक ही प्रभावी रहा. समझौते के तुरंत बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हमला जारी रखा. हमास पर आरोप है कि उसने सीजफायर के बाद इजरायली सैनिकों पर हमला किया और जवाब में इजरायल ने गाजा पर एयरस्ट्राइक की. इस मामले में भी ट्रंप की “पीस डील” केवल कागजी सफलता साबित हुई.
कांगो और रवांडा में बार-बार संघर्ष
कांगो और रवांडा के बीच भी ट्रंप के समझौते का असर दिखाई नहीं दिया. पूर्वी कांगो में DRC की सेना और M23 विद्रोही समूह लगातार एक-दूसरे पर संघर्ष विराम तोड़ने का आरोप लगा रहे हैं. ट्रंप ने इन देशों के बीच शांति स्थापित करने की कोशिश की, लेकिन वास्तविकता में लड़ाई जारी रही.
अब्राहम अकॉर्ड्स की सीमित सफलता
ट्रंप की कूटनीतिक सफलता के रूप में प्रमोट किए गए अब्राहम अकॉर्ड्स के तहत इजरायल ने यूएई, बहरीन, सूडान और मोरक्को के साथ संबंध सामान्य किए. इसे ट्रंप ने अपने कार्यकाल की सबसे बड़ी शांति उपलब्धि बताया. हालांकि, गाजा संघर्ष और क्षेत्रीय तनावों के बाद, इन देशों और इजरायल के बीच संबंध अपेक्षित रूप से मजबूत नहीं हो पाए.
भारत-पाकिस्तान समझौते पर विवादित दावा
भारत और पाकिस्तान के बीच सीमावर्ती संघर्ष के दौरान ट्रंप ने भी खुद को मध्यस्थ के रूप में प्रस्तुत किया. उन्होंने दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच शांति स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई. असल में, भारत-पाक सीमा पर ऑपरेशन और संघर्ष स्थानीय स्तर पर ही नियंत्रित किए गए थे और भारत की तरफ से किसी विदेशी हस्तक्षेप की पुष्टि नहीं हुई. ट्रंप का दावा, जिसमें उन्होंने खुद को शांति निर्माता बताया, विवादित और असत्य साबित हुआ.
ट्रंप की पीस डील्स का सारांश
ट्रंप ने कई शांति समझौतों और समझौतों पर हस्ताक्षर कराए, लेकिन असल दुनिया में उनकी सफलता सीमित रही. थाईलैंड-कंबोडिया, गाजा, कांगो-रवांडा और अब्राहम अकॉर्ड्स सभी मामलों में संघर्ष और अस्थिरता बनी रही. भारत-पाक विवाद में उनका दावा भी सही नहीं था.
इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि ट्रंप का “मेक पीस ग्रेट अगेन” एजेंडा केवल प्रचार और कागजी उपलब्धि तक सीमित रहा. वास्तविकता में, दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष जारी हैं, और उनके शांति प्रयासों का जमीन पर कोई स्थायी असर नहीं पड़ा.
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