भारत और अमेरिका के बीच चल रहे टैरिफ विवाद ने हाल के महीनों में कई बार तनाव की स्थिति पैदा की, लेकिन भारत ने बेहद सोच-समझकर संयम और चुप्पी की रणनीति अपनाई. जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार आक्रामक बयानबाज़ी करते रहे, वहीं भारत ने प्रतिक्रिया देने से परहेज़ करते हुए मौन कूटनीति को चुना. अब इसी नीति का असर दिखने लगा है.
गुरुवार को ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना "दोस्त" बताते हुए भारत-अमेरिका रिश्तों को विशेष बताया. मोदी ने भी शांति और समझदारी से प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच एक सकारात्मक और रणनीतिक साझेदारी है, जो भविष्य को देखते हुए आगे बढ़ रही है.
ट्रंप की बयानबाज़ी और भारत की रणनीतिक चुप्पी
ट्रंप ने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से ही टैरिफ को अपनी चुनावी और विदेश नीति का केंद्र बिंदु बना लिया है. वे कई बार कठोर और अप्रत्याशित टिप्पणियां कर चुके हैं. चाहे वह भारत के खिलाफ टैरिफ बढ़ाने की धमकी हो या पाकिस्तान के प्रति झुकाव. लेकिन इन परिस्थितियों में भी भारत ने संतुलित रवैया बनाए रखा. ट्रंप के बयानों के जवाब में भारत ने जरूरत पड़ने पर ही औपचारिक प्रतिक्रिया दी, जिससे विवाद बढ़ने की बजाय धीरे-धीरे ठंडा पड़ता गया.
किस बात से नाराज़ थे ट्रंप?
ट्रंप की नाराज़गी मुख्यतः दो बातों को लेकर रही ट्रेड डील में सहमति न बनना, जिससे उन्होंने भारतीय सामानों पर 25% टैरिफ लगा दिया. रूस से भारत की तेल खरीद, जिस पर उन्होंने 25% अतिरिक्त शुल्क और जोड़ दिया. इसके अलावा, जब भारत ने ऑपरेशन सिंदूर जैसी सैन्य कार्रवाई के बाद खुद ही पाकिस्तान से बातचीत कर संघर्षविराम तय किया, तो ट्रंप ने इसका श्रेय लेने की कोशिश की. लेकिन भारत ने साफ कर दिया कि यह द्विपक्षीय बातचीत का नतीजा है ना कि किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता का.
स्वतंत्र विदेश नीति बना अमेरिका की चिंता
भारत का स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति अपनाना भी ट्रंप प्रशासन को पसंद नहीं आया. ब्रिक्स और SCO जैसे मंचों पर मोदी, पुतिन और जिनपिंग की एकजुटता अमेरिका को चुभी. खासकर जब चीन में हुई SCO समिट की तस्वीर वायरल हुई, जिसमें तीनों नेता एक साथ नजर आए. ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए लिखा “लगता है हमने भारत और रूस को चीन के पाले में खो दिया है. खैर, उनका भविष्य लंबा और समृद्ध हो!”लेकिन इसी के कुछ घंटे बाद, ओवल ऑफिस से उन्होंने यही कहा कि भारत और अमेरिका के बीच विशेष रिश्ता है और इसमें कोई चिंता की बात नहीं. यह दोहरी प्रतिक्रिया बताती है कि ट्रंप अब भारत को लेकर अपनी रणनीति पर पुनर्विचार कर रहे हैं.
पाकिस्तान की "हां में हां" और भारत की स्पष्टता
जहां पाकिस्तान हर अमेरिकी बयान पर सहमति जताता नजर आता है. जैसे कि सीजफायर पर ट्रंप को क्रेडिट देना या नोबेल पुरस्कार की मांग करना — वहीं भारत ने हर बार अपने राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता दी.भारत ने साफ कहा कि हम किसी भी देश के दबाव में नहीं, बल्कि अपनी नीति के अनुसार निर्णय लेते हैं. यही स्पष्टता अब अमेरिका को भी समझ में आने लगी है.
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