Pm Modi On Iran-US Deal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते का स्वागत करते हुए इसे पश्चिम एशिया में स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है. उन्होंने उम्मीद जताई कि इस समझौते के लागू होने से क्षेत्र में शांति बहाल होगी और अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं समुद्री आवाजाही पर पड़े असर में सुधार आएगा.
प्रधानमंत्री ने कहा कि लंबे समय से जारी तनाव और संघर्ष के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है. कई देशों को आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जबकि जानमाल का भी नुकसान हुआ. ऐसे में दोनों देशों के बीच बातचीत के जरिए समझौते तक पहुंचना सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.
सोशल मीडिया पर दी प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि वह पश्चिम एशिया में संघर्ष समाप्त करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति का स्वागत करते हैं.
उन्होंने कहा कि क्षेत्र में जारी तनाव का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ा. भारत को उम्मीद है कि समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन से क्षेत्र में स्थिरता लौटेगी और समुद्री मार्गों के जरिए होने वाले व्यापार को मजबूती मिलेगी.
I welcome the understanding reached between the United States and Iran on ending the conflict in West Asia, which has caused serious economic disruption across the world and led to loss of life in many countries.
— Narendra Modi (@narendramodi) June 15, 2026
India hopes that the implementation of this understanding will…
स्थायी समाधान की जताई उम्मीद
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत को विश्वास है कि दोनों देश बातचीत के जरिए शेष मुद्दों का भी समाधान निकालेंगे और भविष्य में एक व्यापक एवं स्थायी समझौते तक पहुंचेंगे. उन्होंने कूटनीतिक संवाद को विवादों के समाधान का सबसे प्रभावी माध्यम बताया.
ट्रंप ने किया था समझौते का ऐलान
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच Truth Social पर घोषणा की थी कि अमेरिका और ईरान शांति समझौते पर सहमति के करीब पहुंच चुके हैं.
रिपोर्ट्स के अनुसार, स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जाने की योजना है. इस प्रक्रिया में अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान की ओर से वरिष्ठ प्रतिनिधियों की भागीदारी की बात कही गई है.
कई अहम मुद्दों पर होगी चर्चा
जानकारी के मुताबिक, प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 60 दिनों के युद्धविराम (सीजफायर) के दौरान दोनों पक्ष कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत जारी रखेंगे. इनमें ईरान पर लगाए गए प्रतिबंध, विदेशों में जमा ईरानी फंड्स की रिहाई और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े विषय शामिल हैं. अंतिम समझौता लागू होने तक अस्थायी व्यवस्थाएं प्रभावी रहेंगी, ताकि दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की प्रक्रिया आगे बढ़ सके.
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