Diesel- ATF Export Duty: अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने की घोषणा के बावजूद वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. इसी बीच भारत सरकार ने देश में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाली ड्यूटी बढ़ाने का फैसला किया है.
वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, डीजल के निर्यात पर अब 14 रुपये प्रति लीटर और ATF के निर्यात पर 12.5 रुपये प्रति लीटर की दर से ड्यूटी वसूली जाएगी. पेट्रोल के निर्यात शुल्क में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है. साथ ही घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर लागू उत्पाद शुल्क भी पहले की तरह जारी रहेगा. नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं.
ड्यूटी बढ़ाने की वजह क्या है?
सरकार ने मार्च 2026 में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के दौरान पेट्रोल, डीजल और ATF के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) और रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस (RIC) लागू किया था. इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना और अत्यधिक निर्यात को नियंत्रित करना था.
सरकार अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों की नियमित समीक्षा करती है और उसी के आधार पर इन शुल्कों में संशोधन किया जाता है. इससे पहले 1 जून को भी इन दरों में बदलाव किया गया था.
सरकार ने कहा- ईंधन की कोई कमी नहीं
पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और प्राकृतिक गैस का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है. मंत्रालय ने नागरिकों और उद्योगों से ऊर्जा का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने की अपील की है.
मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. उनके अनुसार हाल के दिनों में कुछ क्षेत्रों में जो दबाव देखा गया, उसका कारण आपूर्ति की कमी नहीं बल्कि मांग के पैटर्न में बदलाव था.
आखिर दबाव क्यों बढ़ा?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मई के दौरान औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं द्वारा निजी पंपों से खरीदे जाने वाले लगभग 42 करोड़ लीटर डीजल की मांग खुदरा पेट्रोल पंपों की ओर स्थानांतरित हो गई. इससे कई क्षेत्रों में रिटेल आउटलेट्स पर अतिरिक्त दबाव पैदा हुआ.
स्थिति को संभालने के लिए केंद्र सरकार ने 11 जून को एक अस्थायी आदेश जारी किया. इसके तहत खुदरा पेट्रोल पंपों से एक व्यक्ति को प्रतिदिन अधिकतम 200 लीटर डीजल ही बेचा जा सकेगा. बड़े औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को अपने निर्धारित उपभोक्ता पंपों से ही ईंधन लेने के निर्देश दिए गए हैं.
90 दिनों तक लागू रहेगी व्यवस्था
सरकार के अनुसार यह व्यवस्था अस्थायी है और लगभग 90 दिनों तक लागू रहेगी. इसका उद्देश्य आम उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना और किसी भी प्रकार की कृत्रिम कमी की स्थिति से बचना है.
पेट्रोलियम मंत्रालय ने दोहराया है कि देश में ईंधन की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है. लोगों को घबराकर अतिरिक्त खरीदारी करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि सरकार लगातार हालात पर नजर रख रही है और जरूरत पड़ने पर आगे भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे.