ईरान के लोगों के मोबाइल पर आया ट्रंप का संदेश, जिसे पढ़कर बौखला जाएंगे खामेनेई; जानें क्या आया मैसेज

US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर गहराता नजर आ रहा है. ऐसे समय में जब डोनाल्ड ट्रंप अपने देश में टैरिफ को लेकर आलोचना झेल रहे हैं, वे ईरान के खिलाफ सख्त रुख बनाए हुए हैं.

Trump message received on the mobile phones of the people of Iran Khamenei will be shocked
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US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर गहराता नजर आ रहा है. ऐसे समय में जब डोनाल्ड ट्रंप अपने देश में टैरिफ को लेकर आलोचना झेल रहे हैं, वे ईरान के खिलाफ सख्त रुख बनाए हुए हैं. हालात पहले से ही तनावपूर्ण थे, लेकिन अब एक नई घटना ने इस संकट को और गंभीर बना दिया है.

सोमवार को ईरान के लाखों लोगों के मोबाइल फोन पर एक गुमनाम मैसेज आया, जिससे पूरे देश में डर का माहौल बन गया. इस संदेश में डोनाल्ड ट्रंप का नाम लेते हुए लिखा गया कि वह सिर्फ बातें नहीं करते, बल्कि कार्रवाई करते हैं. लोगों से इंतजार करने को कहा गया. यह मैसेज ऐसे समय में आया है जब अमेरिका पहले ही ईरान को 10 दिन का अल्टीमेटम दे चुका है. हालांकि, यह अब तक साफ नहीं है कि ये संदेश किसने भेजे.

मनोवैज्ञानिक युद्ध की आशंका

ईरान के सरकारी मीडिया के मुताबिक, यह कदम लोगों में डर फैलाने के लिए उठाया गया हो सकता है. इसे एक तरह का “साइकोलॉजिकल वॉरफेयर” माना जा रहा है, जिसका मकसद देश के भीतर अस्थिरता पैदा करना हो सकता है.

मध्य-पूर्व में बढ़ती सैन्य हलचल

तनाव सिर्फ मैसेज तक सीमित नहीं है. खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी युद्धपोतों की मौजूदगी बढ़ रही है. हालात को देखते हुए अमेरिका ने लेबनान से अपने दूतावास के गैर-जरूरी स्टाफ को हटाने का फैसला लिया है. वहीं भारत ने भी अपने नागरिकों को ईरान छोड़ने की सलाह दी है.

अमेरिका का सख्त रुख

अमेरिकी सैन्य अधिकारी बॉब हार्वर्ड ने कहा है कि अमेरिका के पास इतनी सैन्य ताकत है कि वह कुछ ही घंटों में ईरान के पावर स्ट्रक्चर को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है. इससे साफ है कि अमेरिका दबाव की रणनीति पर काम कर रहा है.

ईरान भी नहीं झुकने को तैयार

दूसरी ओर अली खामेनेई ने साफ कर दिया है कि ईरान किसी भी दबाव में नहीं आएगा. उन्होंने अमेरिकी ठिकानों को निशाने पर रखने की चेतावनी दी है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी कहा कि कूटनीति के दरवाजे खुले हैं, लेकिन दबाव में कोई समझौता नहीं होगा.

नाजुक मोड़ पर पहुंचा संकट

कुल मिलाकर, स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है. एक तरफ बातचीत की कोशिशें जारी हैं, तो दूसरी तरफ सैन्य और मनोवैज्ञानिक दबाव भी बढ़ रहा है. ऐसे में किसी भी छोटी घटना से बड़ा टकराव हो सकता है, जिस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है.

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