नई दिल्ली: करीब दो दशक पहले दिल्ली में फिदायीन हमला रचने के आरोप में पकड़े गए आतंकी शब्बीर अहमद लोन एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बन गए हैं. 2007 में गिरफ्तारी के बाद कुछ साल तक ओझल रहने के बाद, शब्बीर अब बांग्लादेश से भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश में सक्रिय हैं.
शब्बीर को 2007 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने गिरफ्तार किया था. उस समय उसे लश्कर-ए-तैयबा का बांग्लादेश स्थित ऑपरेशनल कमांडर अबू अल-क़ामा भारत में फिदायीन हमला कराने के लिए तैयार कर रहा था. इस हमले का टारगेट एक बड़े राजनीतिक नेता था. जुलाई 2007 में चांदनी चौक के पास एक रेस्तरां से उसे गिरफ्तार किया गया.
गिरफ्तारी के समय उसके ठिकाने से हथगोले, हथियार, गोला-बारूद और नकदी बरामद हुई थी. शब्बीर पर स्पेशल सेल और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग समेत कई मामले दर्ज किए. हालांकि 2019 में अदालत ने उसे जमानत दे दी और इसके बाद वह एजेंसियों की नजरों से ओझल हो गया.
ढाका से नया लश्कर नेटवर्क खड़ा किया
अब 2026 में शब्बीर एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर है. इस बार वह ढाका में लश्कर का नया मॉड्यूल खड़ा कर भारत में हमलों की योजना बना रहा था. जांच में सामने आया कि शब्बीर ने मुज़फ्फराबाद के कैंप में बुनियादी हथियार प्रशिक्षण, एके राइफल, रॉकेट लॉन्चर, आईईडी और एलएमजी चलाने का विशेष प्रशिक्षण और वैचारिक प्रशिक्षण लिया था.
बांग्लादेशी युवाओं का इस्तेमाल
शब्बीर बांग्लादेश में सुरक्षित ठिकानों से काम कर रहा था और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की मदद से स्थानीय युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेल रहा था. इसके तहत उसने उमर फारूक नामक व्यक्ति को पहले कट्टरपंथी बनाया और भारत में लश्कर की गतिविधियों का नेतृत्व सौंपा.
हाफिज सईद और लखवी से जुड़े संपर्क
2007 में गिरफ्तारी के दौरान शब्बीर के हाफिज सईद और ज़की-उर-रहमान लखवी जैसे आतंकी नेताओं से संपर्कों के सबूत मिले थे. अब की जांच में बांग्लादेशी नागरिक सईदुल इस्लाम की भूमिका सामने आई, जिसने शब्बीर को अवैध प्रवेश, ठिकाने और लॉजिस्टिक सपोर्ट मुहैया कराया.
शब्बीर की रणनीति बांग्लादेशी नागरिकों को आगे कर भारत में सक्रिय करना थी. यह लोग भारतीय पहचान अपनाकर स्थानीय आबादी में आसानी से घुल-मिल सकते थे और सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बच सकते थे. इसके लिए परिधान उद्योग में काम करने वाले कुछ अवैध प्रवासियों को पैसों और बेहतर जीवन के लालच में भर्ती किया गया.
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