Insurrection Act: जब किसी लोकतांत्रिक देश के भीतर अपने ही नागरिकों के खिलाफ सेना तैनात करने की बात होने लगे, तो यह स्वाभाविक है कि चिंता और बहस का माहौल बने. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ऐसी ही बहस को हवा दे दी है. उन्होंने संकेत दिया है कि अगर जरूरत पड़ी, तो वे 1807 के "इंसरेक्शन एक्ट" का इस्तेमाल कर सकते हैं, ताकि शहरों में नेशनल गार्ड या सेना तैनात की जा सके.
यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब एक संघीय अदालत ने पोर्टलैंड में सेना भेजने के ट्रंप के आदेश पर रोक लगा दी थी. ट्रंप का दावा है कि शहर वामपंथी घरेलू आतंकवादियों के नियंत्रण में है और हालात बेहद बिगड़ चुके हैं. लेकिन सवाल यह है कि आखिर यह "Insurrection Act" क्या है, और क्या इसका इस्तेमाल आज के लोकतांत्रिक अमेरिका में उचित है? चलिए, समझते हैं इस ऐतिहासिक कानून की बारीकियां और ट्रंप की मंशा.
क्या है इंसरेक्शन एक्ट?
Insurrection Act अमेरिका का एक 230 साल पुराना कानून है, जिसे मूल रूप से 1792 में पारित किया गया और फिर 1807 में इसका दायरा बढ़ाया गया. यह कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को अधिकार देता है कि जब किसी राज्य में कानून व्यवस्था पूरी तरह से बिगड़ जाए और स्थानीय सरकार हालात काबू न कर पाए, तब वह सेना तैनात कर सकते हैं. सामान्य स्थितियों में अमेरिकी कानून Posse Comitatus Act सेना को घरेलू उपयोग से रोकता है, लेकिन Insurrection Act इस रोक से कानूनी अपवाद प्रदान करता है.
कब और कैसे लागू किया जा सकता है ये कानून?
इस कानून के अंतर्गत दो परिस्थितियाँ होती हैं. जैसे राज्य सरकार की मांग पर जब किसी राज्य का गवर्नर या उसकी विधानसभा केंद्र से मदद की मांग करे. उदाहरण के तौर पर देखें तो 1992 लॉस एंजेल्स दंगे, जब कैलिफोर्निया के गवर्नर ने सेना बुलाने की मांग की थी. वहीं, राष्ट्रपति की पहल पर अगर राष्ट्रपति को लगे कि राज्य में बगावत, कानून तोड़ने की घटनाएं या संघीय कानूनों की अवहेलना हो रही है, तो वे बिना राज्य की अनुमति के भी सेना तैनात कर सकते हैं.
इतिहास में कब-कब हुआ इस्तेमाल?
1957: राष्ट्रपति ड्वाइट आइजनहावर ने आर्कान्सस में नस्लीय एकीकरण लागू करने के लिए सेना भेजी.
1962: जॉन एफ. केनेडी ने अफ्रीकी-अमेरिकी छात्रों को शिक्षा संस्थानों में प्रवेश दिलाने के लिए इस एक्ट का सहारा लिया.
इन ऐतिहासिक उदाहरणों में यह कानून नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए इस्तेमाल हुआ, लेकिन क्या ट्रंप का उद्देश्य भी यही है?
कानून और राजनीति के बीच की खींचतान
डोनाल्ड ट्रंप का तर्क है कि पोर्टलैंड जैसे शहरों में हुए प्रदर्शन "क्रिमिनल इंसरेक्शन" हैं, और राज्य सरकारें यदि सहयोग नहीं करतीं तो वे Insurrection Act लागू कर के सेना भेजेंगे. उनके सलाहकार स्टीफन मिलर ने इसे "कानूनी विद्रोह" बताया और कहा कि कुछ स्थानीय प्रशासन जानबूझकर संघीय कानूनों को कमजोर कर रहे हैं. लेकिन कानूनी विशेषज्ञों और मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि इस कानून का अनुचित इस्तेमाल लोकतांत्रिक प्रक्रिया और नागरिक अधिकारों के लिए खतरनाक हो सकता है.
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