मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी इजरायल-हमास संघर्ष को समाप्त करने के लिए अमेरिका की तरफ से एक नई शांति योजना तैयार की गई है, जिसका कहना है कि यह डील अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में सोशल मीडिया पर इस योजना को लेकर बड़ा दावा किया है कि इस डील से न केवल गाजा युद्ध खत्म हो सकता है, बल्कि पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में शांति की एक नई दिशा भी मिल सकती है. ट्रंप के इस बयान ने क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर शांति प्रक्रिया को लेकर उम्मीदों को फिर से बढ़ा दिया है.
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "हमारे पास मध्य पूर्व में महानता हासिल करने का एक सुनहरा मौका है. हम सब पहली बार किसी खास उद्देश्य के लिए एकजुट हैं. हम इसे पूरा करेंगे!" ट्रंप की इस बात से साफ जाहिर हो रहा है कि शांति की दिशा में उनकी योजना अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और जल्द ही इसका औपचारिक ऐलान हो सकता है.
योजना में कुल 21 अहम बिंदु शामिल
वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन की इस योजना में कुल 21 अहम बिंदु शामिल हैं. इनमें सबसे महत्वपूर्ण हैं:
यह योजना मध्य पूर्व क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने का प्रयास करती है, जिसमें दो पक्षों के बीच तनाव और हिंसा को कम करने के साथ-साथ राजनीतिक समाधान भी शामिल है.
इजरायल और हमास की प्रतिक्रिया
हालांकि, इस योजना को लेकर फिलहाल इजरायल और हमास दोनों पक्षों की ओर से कोई आधिकारिक मंजूरी नहीं मिली है. हमास का कहना है कि उन्हें इस योजना का कोई नया प्रस्ताव अभी तक नहीं मिला है, लेकिन उन्होंने यह संकेत जरूर दिया है कि यदि किसी योजना में फिलिस्तीनी राष्ट्रीय अधिकारों की रक्षा हो, तो वे उसे सकारात्मक तरीके से विचार करेंगे. वहीं, इजरायली नेतृत्व भी इस योजना के प्रति सतर्क लेकिन उत्सुक है.
नेतन्याहू और ट्रंप के बीच बातचीत
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और रणनीतिक मामलों के मंत्री रॉन डर्मर ने ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जारेड कुश्नर से मुलाकात की है. इन बैठकों में योजना की भाषा और शर्तों पर विस्तार से चर्चा हो रही है ताकि इजरायल और क्षेत्र के अन्य अरब देशों की चिंताओं का संतुलित समाधान निकाला जा सके. नेतन्याहू और ट्रंप के बीच सोमवार को वॉशिंगटन में एक महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है, जिसमें इस योजना पर अंतिम निर्णय की उम्मीद है. इसके बाद मिस्र का प्रतिनिधिमंडल कतर जाकर हमास के नेताओं से मुलाकात करेगा और उन्हें इस प्रस्ताव से अवगत कराएगा.
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