Indian Navy: सुबह की परेड, हथियारों की ट्रेनिंग और अनुशासन की कठोर दिनचर्या के बीच अब देश की नौसेना एक नया अध्याय जोड़ रही है, अग्निवीरों को औपचारिक योग प्रशिक्षण देकर उसका प्रमाणीकरण किया जा रहा है. यह कदम भले ही छोटा लगे, लेकिन इसके पीछे की सोच काफी बड़ी है.
दरअसल अब योग का बाजार भारत तक सीमित नहीं है. दुनिया भर में फिटनेस और वेलनेस इंडस्ट्री का विस्तार हो रहा है. Market Data Forecast के अनुसार योग और मेडिटेशन का वैश्विक बाजार 2025 में करीब 7.66 अरब डॉलर का था और 2034 तक इसके 24.54 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है.
नौसेना में योग हमेशा से जवानों की शारीरिक और मानसिक तैयारी का हिस्सा रहा है. तनाव प्रबंधन से लेकर शरीर के लचीलेपन तक, योग की भूमिका जवानों की रोजमर्रा की दिनचर्या में गहराई से बसी रही है. लेकिन अब तक यह ज्यादातर अनौपचारिक अभ्यास तक सीमित था. नई पहल के तहत इसे एक संरचित पाठ्यक्रम की तरह पढ़ाया जा रहा है, जिसके अंत में अग्निवीरों को एक मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्र दिया जाता है, ठीक वैसे ही जैसे किसी पेशेवर कौशल विकास कार्यक्रम में मिलता है.
यह पहल उस बड़े दृष्टिकोण का हिस्सा है, जिसे नौसेना के भीतर सर्व, लर्न, ट्रांजिशन और लीड के नाम से जाना जा रहा है. पहला चरण है सेवा, यानी देश की सुरक्षा में चार साल का योगदान. दूसरा चरण है सीखना, जिसमें अनुशासन के साथ-साथ ऐसे व्यावहारिक कौशल शामिल हैं जो सेवा के बाद भी काम आएं.
योग प्रमाणन इसी दूसरे चरण का एक अहम हिस्सा है. तीसरा चरण, ट्रांजिशन यानी बदलाव, वह पड़ाव है जहां एक अग्निवीर वर्दी उतारकर असैन्य जीवन में कदम रखता है. और चौथा चरण, लीड, वह मंजिल है जहां वही युवा अपने अर्जित कौशल के दम पर समाज में एक नई भूमिका में आगे बढ़ता और नेतृत्व करता है.
रक्षा हलकों से जुड़े लोगों का कहना है कि योग प्रमाणन को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह किसी मान्यता प्राप्त संस्था के मानकों के अनुरूप हो, ताकि सेवा के बाद यह प्रमाणपत्र सिर्फ एक स्मृति चिन्ह न रहकर, एक वास्तविक पेशेवर योग्यता बने. इसका मतलब यह है कि जो अग्निवीर योग में यह प्रशिक्षण पूरा करते हैं, वे स्कूल, जिम, वेलनेस सेंटर या कॉरपोरेट कार्यक्रमों में योग सिखाने के लिए आवेदन कर सकते हैं, बिना दोबारा किसी लंबी प्रशिक्षण प्रक्रिया से गुजरे.
गौरतलब है कि यह पहल ऐसे समय में आ रही है जब देश खुद योग प्रशिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहा है. असोचैम के 2017 की स्टडी में ये सामने आया था कि देश में लाखों की तादाद में योग प्रशिक्षकों की जरूरत है, लेकिन उपलब्धता उसके मुकाबले काफी कम है. ऐसे में नौसेना से हर साल बाहर निकलने वाले अनुशासित, प्रशिक्षित और प्रमाणित युवाओं की एक नई खेप, इस कमी को पूरा करने में मददगार साबित हो सकती है.
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