Iran-US Conflict: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने दावा किया है कि दुनिया मान चुकी है कि ईरान ने अमेरिका के खिलाफ युद्ध जीत लिया है. ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, पेजेशकियन ने कहा कि अब अमेरिका के साथ युद्ध खत्म होना चाहिए, क्योंकि पूरी दुनिया ईरान की जीत को स्वीकार कर चुकी है.
पेजेशकियन का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका ईरान पर आर्थिक दबाव और प्रतिबंध बढ़ाने की तैयारी कर रहा है. अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाए और तेल व गैस के जहाजों के लिए अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोल दे.
क्या ईरान ने सच में युद्ध जीतने का दावा किया?
ईरानी समाचार एजेंसी के मुताबिक, मसूद पेजेशकियन ने कहा कि दुनिया ने ईरान की जीत को स्वीकार कर लिया है. उन्होंने अमेरिका को लेकर भी कड़ी टिप्पणी की. ईरानी राष्ट्रपति का यह बयान अमेरिका की ओर से बढ़ाए जा रहे आर्थिक दबाव के बीच आया है. अमेरिकी प्रशासन ईरान पर कड़े आर्थिक कदम उठाने की तैयारी में है. अमेरिका का मकसद ईरानी नेतृत्व पर दबाव बढ़ाना, उसके परमाणु कार्यक्रम को रोकना और होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलना है.
गोलान हाइट्स पर अमेरिका के रुख को लेकर सवाल क्यों उठे?
इसी बीच अमेरिका के तुर्किये में राजदूत और सीरिया के विशेष दूत टॉम बैरक के एक बयान से गोलान हाइट्स को लेकर नई बहस शुरू हो गई है. शुक्रवार को एक इंटरव्यू में बैरक ने कहा कि इस्राइल अभी भी गोलान हाइट्स पर कब्जा किए हुए है और यह संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि सीरिया से जुड़े इस इलाके पर इस्राइल का कब्जा अब भी कायम है.
गोलान हाइट्स का विवाद क्या है?
इस्राइल ने 1967 के युद्ध के दौरान सीरिया से गोलान हाइट्स पर कब्जा किया था. इसके बाद 1981 में इस्राइल ने इस इलाके को अपने क्षेत्र में शामिल करने का फैसला किया. संयुक्त राष्ट्र अब भी गोलान हाइट्स को सीरियाई क्षेत्र मानता है और इस्राइल के कब्जे को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत मान्यता नहीं देता. संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों में इस्राइल से 4 जून 1967 की स्थिति वाली सीमा तक पीछे हटने की मांग की गई है.
हालांकि, मार्च 2019 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गोलान हाइट्स पर इस्राइल की संप्रभुता को अमेरिकी मान्यता दे दी थी. इससे अमेरिका की पुरानी नीति में बड़ा बदलाव हुआ था. हालांकि, अमेरिकी फैसले से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोलान हाइट्स की स्थिति नहीं बदली.
टॉम बैरक के बयान पर क्यों हुआ विवाद?
गोलान हाइट्स को लेकर टॉम बैरक की टिप्पणी के बाद अमेरिका में भी उनकी आलोचना शुरू हो गई. ट्रंप की समर्थक और रूढ़िवादी कार्यकर्ता लॉरा लूमर ने सोशल मीडिया पर बैरक की आलोचना की और उनके इस्तीफे की मांग की.
लूमर ने आरोप लगाया कि बैरक को अमेरिकी विदेश नीति की सही समझ नहीं है. उनका बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान युद्ध और पश्चिम एशिया में अमेरिकी नीति को लेकर पहले से ही काफी चर्चा हो रही है.
पश्चिम एशिया में क्या है मौजूदा स्थिति?
पेजेशकियन के ईरान की जीत वाले दावे के बावजूद पश्चिम एशिया में तनाव कम होता नहीं दिख रहा है. अमेरिका ईरान पर आर्थिक दबाव और प्रतिबंध बढ़ाने की तैयारी कर रहा है. वहीं, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी स्थिति अब तक सामान्य नहीं हुई है. गोलान हाइट्स पर टॉम बैरक के बयान ने भी इस्राइल और अमेरिका के बीच नीति को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है.
इसी बीच फ्रांस और सऊदी अरब होर्मुज जलडमरूमध्य के विकल्प के तौर पर नए व्यापार मार्ग, पाइपलाइन और रेल संपर्क विकसित करने पर चर्चा कर सकते हैं. इससे साफ है कि ईरान-अमेरिका तनाव का असर सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं है. पश्चिम एशिया में तनाव, कूटनीतिक खींचतान और रणनीतिक हलचल लगातार जारी है.
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