NATO देशों में 25 साल बाद फिर से दहशत! रूसी नौसेना में लौटा सबसे शक्तिशाली युद्धपोत, जानें इसकी ताकत

रूस की नौसेना को आखिरकार वह घातक ताकत फिर से मिल गई है, जिसकी प्रतीक्षा पिछले ढाई दशक से की जा रही थी.

The most powerful battleship Admiral Nakhimov returned to the Russian Navy
प्रतिकात्मक तस्वीर/ Sociel Media

मॉस्को: रूस की नौसेना को आखिरकार वह घातक ताकत फिर से मिल गई है, जिसकी प्रतीक्षा पिछले ढाई दशक से की जा रही थी. रूस का सबसे बड़ा और ताकतवर न्यूक्लियर बैटलक्रूजर "एडमिरल नखिमोव" अब पूरी तरह से अपग्रेड होकर सेवा में लौट आया है. यह कीरोव-क्लास परमाणु ऊर्जा से संचालित युद्धपोत अब पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक और घातक बन चुका है. इसकी मरम्मत और अपग्रेडेशन प्रक्रिया लगभग 25 वर्षों तक चली, लेकिन अब यह युद्धपोत रूस की समुद्री ताकत का प्रतीक बन चुका है.

"एडमिरल नखिमोव" को मूल रूप से 1988 में तत्कालीन सोवियत नौसेना में शामिल किया गया था. यह जहाज अपने विशाल आकार, परमाणु क्षमता और भारी हथियारों के लिए जाना जाता था. लेकिन 1999 में इसे आधिकारिक रूप से सेवा से हटा लिया गया, ताकि इसे भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार अपग्रेड किया जा सके.

2006 में इसके आधुनिकीकरण का कार्यक्रम स्वीकृत हुआ, लेकिन बजट, तकनीकी चुनौतियों और लॉजिस्टिक समस्याओं के कारण वास्तविक कार्य 2013 के बाद ही गति पकड़ सका. इस दौरान रूस को वैश्विक सप्लाई चेन और अंदरूनी ढांचे में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा. हर सिस्टम को नए सिरे से डिजाइन और इंस्टॉल करना पड़ा, जिससे इस प्रोजेक्ट में वर्षों की देरी हुई.

अब और भी ज्यादा शक्तिशाली

आज का "एडमिरल नखिमोव" पहले से कहीं ज्यादा शक्तिशाली बन चुका है. इसके हथियार तंत्र में क्रांतिकारी बदलाव किए गए हैं. पहले जहां यह जहाज P-700 ग्रानिट मिसाइलों से लैस था, अब इसे पूरी तरह नए जमाने के यूनिवर्सल शिपबॉर्न फायरिंग सिस्टम (USFS) से लैस किया गया है.

इन नए सिस्टम्स के जरिए यह जहाज अब कुल 176 मिसाइल ट्यूबों से लैस हो गया है, जिनमें से 80 ट्यूब क्रूज और हाइपरसोनिक मिसाइलों के लिए आरक्षित हैं. इनमें रूस की अत्याधुनिक मिसाइलें शामिल हैं, जैसे कि सुपरसोनिक ओनिक्स, लंबी दूरी की कैलिबर और बेहद खतरनाक हाइपरसोनिक जिरकॉन मिसाइल.

इन हथियारों के जरिए यह युद्धपोत दुश्मन के एयरक्राफ्ट कैरियर, पोतों, मिसाइल बेस और जमीनी ठिकानों को हजारों किलोमीटर दूर से निशाना बना सकता है.

एयर डिफेंस भी अभेद्य बना

जहाज की सुरक्षा प्रणाली को भी पूरी तरह से अपग्रेड किया गया है. इसमें S-300 के नेवल वर्जन फोर्ट-एम को शामिल किया गया है, जो लंबी दूरी तक हवा में किसी भी खतरे को टाल सकता है. इसके साथ ही शॉर्ट रेंज डिफेंस के लिए पंनसिर-एम क्लोज-इन वेपन सिस्टम (CIWS) भी लगाया गया है.

हालांकि शुरुआत में इसे 8 पंनसिर-एम यूनिट्स से लैस करने की योजना थी, लेकिन अंततः छह यूनिट्स को फाइनल किया गया, तीन दोनों ओर. ये सिस्टम ड्रोन, मिसाइल और कम ऊंचाई वाले विमानों को बेहद कम समय में मार गिराने में सक्षम हैं.

केवल हथियार नहीं, पूरा जहाज बदला गया

एडमिरल नखिमोव के अपग्रेडेशन में केवल हथियारों का ही नहीं, बल्कि जहाज के लगभग हर हिस्से को नई तकनीकों के अनुरूप ढाला गया है.

  • फायर कंट्रोल सिस्टम: आधुनिक लक्ष्य निर्धारण और ट्रैकिंग की क्षमता.
  • रेडार एरे: नए मल्टी-फंक्शनल रडार सिस्टम्स लगाए गए हैं, जो 360 डिग्री निगरानी की सुविधा देते हैं.
  • इलेक्ट्रॉनिक्स: पुराने सभी केबलिंग और वायरिंग को हटाकर हजारों किलोमीटर लंबी नई वायरिंग की गई है.
  • कूलिंग और पावर सप्लाई: अत्याधुनिक हाई-वोल्टेज सिस्टम्स से जहाज की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा किया गया है.

इन सभी सुधारों ने न केवल युद्धपोत की मारक क्षमता को बढ़ाया है, बल्कि इसे भविष्य के इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के लिए भी तैयार कर दिया है.

व्हाइट सी में हुआ परीक्षण

हाल ही में सामने आए वीडियो फुटेज में इस युद्धपोत को रूस के व्हाइट सी में परीक्षण के लिए समुद्र में ले जाते हुए देखा गया. फैक्ट्री सी ट्रायल्स के दौरान इसे टगबोट्स की मदद से समुद्र में पहुँचाया गया, जहां इसकी गति, संतुलन, रडार और मिसाइल परीक्षण किए गए. शुरुआती रिपोर्ट्स इसे बेहद सफल ट्रायल करार देती हैं.

NATO में चिंता की लहर

एडमिरल नखिमोव की वापसी केवल रूस के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक शक्ति संतुलन के लिए अहम मानी जा रही है. खासकर नाटो देशों में इसे लेकर बेचैनी देखी जा रही है. इसकी हाइपरसोनिक मिसाइलें किसी भी पश्चिमी एंटी-मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में सक्षम मानी जाती हैं.

इसके साथ ही इसका रेडार प्रोफाइल और एयर डिफेंस कवच इसे अत्यंत सुरक्षित बनाता है, जिससे इस पर हमला करना किसी भी विरोधी के लिए अत्यंत कठिन हो जाता है.

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