The JC Show: मोदी हैं तो मुमकिन है... | Modi's Sonar Bangla | Bengal Election | BJP | PM Modi

The JC Show: पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे और जनादेश सामने आ चुका है और जिस राज्य की चर्चा सबसे ज्यादा है वो है पश्चिम बंगाल. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सपना पूरा करते हुए इस बार बीजेपी ने अटल बिहारी वाजपेई की बात को सच कर दिखाया. अंधेरा छटेगा, सूरज उगेगा, कमल खिलेगा. बंगाल की राजनीति में सचमुच खेला होबे हुआ है. लेकिन इस बार खेला पलटा है.

Bharat 24

The JC Show: पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे और जनादेश सामने आ चुका है और जिस राज्य की चर्चा सबसे ज्यादा है वो है पश्चिम बंगाल. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सपना पूरा करते हुए इस बार बीजेपी ने अटल बिहारी वाजपेई की बात को सच कर दिखाया. अंधेरा छटेगा, सूरज उगेगा, कमल खिलेगा. बंगाल की राजनीति में सचमुच खेला होबे हुआ है. लेकिन इस बार खेला पलटा है. जिस बंगाल को बीजेपी के लिए कभी मिशन इंपॉसिबल कहा जाता था, वहां पर आज भगवा लहरा रहा है. 4 मई सिर्फ एक तारीख नहीं ममता बनर्जी के राजनीतिक किले में सबसे बड़ा झटका बन गई. दक्षिण से लेकर उत्तर बंगाल तक जय श्री राम का शोर और इस जीत के पीछे था मोदी शाह का मास्टर प्लान. नरेंद्र मोदी ने फुटबॉल को किक मारकर सिर्फ खेल नहीं शुरू किया बल्कि बंगाल की सत्ता तक पहुंचने का सियासी गोल सेट कर दिया था. अमित शाह की बूथ इंजीनियरिंग, नरेंद्र मोदी की आक्रामक रैलियां. बीजेपी ने चुनाव नहीं लड़ा है बल्कि पूरा मनोवैज्ञानिक युद्ध लड़ा है और इसी के साथ बंगाल में दीदी युग का अंत शुरू हुआ. क्या बीजेपी ने सिर्फ चुनाव नहीं बंगाल की राजनीति का डीएनए बदल दिया है? आज द जेसी शो में भारत 24 के सीईओ और एडिटर इन चीफ और फर्स्ट इंडिया के सीएमडी और एडिटर इन चीफ डॉ जगदीश चंद्र के साथ इसी पर चर्चा करेंगे.

सवाल: आज हमने जेसी शो की हेडलाइन रखी है. मोदी हैं तो मुमकिन है, मोदी सोनार बांग्ला. आखिर बंगाल को वापस से सोनार बांग्ला में बदलने के लिए नरेंद्र मोदी का प्लान क्या होगा?

जवाब: 1905 के बंग भंग आंदोलन के समय जो देश में चला था. उस समय गुरु रविंद्र नाथ टैगोर ने यह कविता लिखी थी आमार सोनार बंगला और उस सपने को आज नरेंद्र मोदी ने साकार किया है. उन्होंने कहा है कि बंगाल के मतदाताओं ने मुझ पर भरोसा जताया है और अब मैं उस सपने को साकार करूंगा. सचमुच बंगाल के स्वर्णिम युग की शुरुआत हो चुकी है. भाजपा के स्वर्णिम युग की शुरुआत हो चुकी है. और इसके साथ ही स्वर्गीय श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जो सपना था भाजपा का वो भी पूरा हुआ है. पूरी आरएसएस पूरा भाजपा कैडर आज नरेंद्र मोदी पर गौरवान्वित है कि इस प्रतिष्ठित सपने को राम मंदिर के सपने की तरह उन्होंने पूरा कर दिखाया है. जहां तक सोनार बंगला के प्लान का सवाल है तो नरेंद्र मोदी टोटल चेंज जिसे कहते हैं गेम चेंजर प्रू होंगे बंगाल के लिए और आने वाले कुछ ही वर्षों में आप देखेंगे कि बंगाल सचमुच एक टूटे हुए बंगाल की ओर से कैसे एक सुनार बंगला जैसे बंगाल में कन्वर्ट हो रहा है. दिस इज टू बी सीन इन कमिंग फ्यू इयर्स. 

सवाल: जब बंगाल में चुनाव होने वाले थे तो शुरुआत में जो ज्यादातर ओपिनियन पोल्स आए थे वो ये दिखा रहे थे कि ममता बनर्जी की वापसी होगी. लेकिन आपने 28 दिन पहले 6 अप्रैल को जेसी शो हुआ. फिर दोबारा जब जेसी शो 18 अप्रैल को हुआ तो आपने दो टूक भविष्यवाणी की कि इस बार भगवा फहराएगा. यह आपको पूर्वानुमान कैसे हुआ?

जवाब: इसे कहते हैं डेस्टिनी. इंट्यूशन हुआ और कह दिया और फिर क्या है कि 15 साल से 32 अखबार रोज पढ़ रहे हैं तो फीडबैक एनालिसिस तो सारा आता है और मन से एक आवाज निकली कि ऐसा होने वाला है तो हो गया और वाकई आश्चर्य की बात है कि पूरे देश में शायद यही एक ऐसा प्रेडिक्शन था जो हुआ और जिसमें हमने कहा था कि भाजपा जो है कोलकाता की एंट्री पोस्ट पर खड़ी है और फिर साफ-साफ कह दिया उसके बाद में कि कोलकाता में जो है वो भगवा लहराने जा रहा तो ये सब दर्शकों का और आपका सहयोग है. इसी तरह आपको स्मरण होगा कि 2024 के वक्त मतगणना से 10 दिन पहले ही कह दिया गया था कि मेजॉरिटी और नो मेजॉरिटी मोदी विल बी द प्राइम मिनिस्टर और फिर वही हुआ. अमित शाह के लिए कहा गया था इफ देयर इज़ नो अमित शाह देयर इज़ नो एनडीए. अमित शाह विल अगेन रूल होम मिनिस्ट्री फॉर अनदर फाइव इयर्स. और वो भी सच हुआ. सो दर्शकों का आशीर्वाद और आप सब की शुभकामनाएं. और इसके साथ ही एक प्रेडिक्शन और आज तीन साल पहले जिसे कहते हैं यू विल अगेन सी नरेंद्र मोदी इन 2029 एस अ फोर टाइम प्राइम मिनिस्टर ऑफ दिस कंट्री मार्क माय वर्ड्स..

सवाल: सर क्योंकि बात प्रधानमंत्री मोदी की आपने की तो उन्होंने खुद ने भी बंगाल के चुनावी सभाओं में बड़े कन्विक्शन के साथ कहा था कि जब मुख्यमंत्री का शपथ समारोह होगा शपथ ग्रहण समारोह भाजपा के तो मैं वापस लौट के आऊंगा. उसे कैसे देखते हैं आप?

जवाब: आत्मविश्वास, कॉन्फिडेंस, अपने कर्म पर विश्वास, अपना विज़न, विजनरी तो है ही वह और कितने भरोसे के साथ कह के गए थे. इसे बहुत से लोगों ने उसी दिन कह दिया था कि मोदी जी ने कहा है, प्रधानमंत्री ने कहा है. तो निश्चित तौर पर कोई न कोई आकलन उनके पास रहा होगा जिसके आधार पर उन्होंने ऐसा कहा है और जो कहा वो सच निकला जिसे कहते हैं जो वादा किया था जनता के साथ, देश की जनता के साथ उस वादे को जो बंगाल की जनता के साथ वादा किया था. उस वादे को उन्होंने पूरा किया और सच पूछा जाए तो एक प्रकार से यह नरेंद्र मोदी की पर्सनल पॉलिटिकल विक्ट्री है जिसमें उनका विज़न और उनकी जो क्लियर पॉलिटिकल आईडियोलॉजी है उसका अपना एक स्थान है. इसलिए आज पूरे संसार के मीडिया में यहां तक कि युद्धग्रस्त जो मिडिल ईस्ट का मीडिया है लंदन और न्यूयॉर्क के मीडिया में जो है नरेंद्र मोदी की इस भगवा जीत का जो है ना बकायदा जिक्र हो रहा है. 

सवाल: सर बंगाल में ब्लड शेड मुख्यमंत्री के शपथ समारोह से पहले आपने देखा कि शुभेंदु अधिकारी के पीए हैं. उनको निर्मम हत्या चार राउंड गोली की मार के मार दिया गया. तो आप इस पूरी घटना को कैसे देखते हैं सर?

जवाब: इट्स वेरी अनफॉर्चूनेट वेरी शॉकिंग ए चैलेंज टू द न्यू गवर्नमेंट टू मेंटेन ल एंड ऑर्डर एंड टू क्रिएट द कॉन्फिडेंस ऑफ़ द कॉमन मैन इन द न्यू गवर्नमेंट. इतनी बड़ी घटना हुई है आप देखिए और बाकायदा उसके साथ-साथ इस घटना तो हुई है जो आप देख ही रहे हैं कि सरेआम उसको चार राउंड फायर उस पर किया गया मृत घोषित हुआ और कोई दूसरा व्यक्ति नहीं था बीजेपी वर्कर नहीं था वो वो था संभावित मुख्यमंत्री कहिए या एक महत्वपूर्ण जो चेहरा है भाजपा का वहां पर जो है उसका पीए मतलब डायरेक्टली इनडायरेक्टली देखा तो अटैक सुवेंदु हुआ है एग्जैक्टली जो अटैक है तो गंभीर चिंता का विषय विषय है कि बंगाल के आने वाले कल की नई सरकार की एक चुनौती है और उसके साथ ही चार और हत्याएं हुई हैं. दो टीएमसी वर्कर्स हैं. मरने वालों में दो बीजेपी वर्कर्स हैं और दर्जनों लोग उसमें घायल हुए हैं. आप देखिए तो बहुत चिंता का विषय है और नई सरकार की पहली प्राथमिकता है वो लॉ एंड ऑर्डर ही होगी और इस घटना का बकायदा कॉग्निजेंस सबको लेना चाहिए. इसका दूसरा पहलू यह है इट्स ए सम सॉर्ट ऑफ ए मैसेज और कन्वर्जन ऑफ देयर व्यू पॉइंट कि जो लोग हैं जो ममता की हार से दुखी हैं या भाजपा के सैफरन जीत से जो लोग अप्रसन्न हैं उनका एक एक्सप्रेशन है. इट इज़ अ फ्रस्ट्रेशन अगेंस्ट द विनिंग ऑफ़ सैफरन गवर्नमेंट इनकाता. तो इसे बहुत सख्ती से इससे जो है निपटने की आवश्यकता है. 

सवाल: सर तमिलनाडु के मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम को देखते हुए क्या आपको लगता है कि विजय 118 विधायकों का समर्थन जुटा पाएंगे और मुख्यमंत्री पद की शपथ ले पाएंगे?

जवाब: देखो अब राज्यपाल ने एक नया मुद्दा उठाया है. वैसे तो राज्यपाल का आचरण जो है वह संविधान की मर्यादा के अंतर्गत है. उन्होंने कहा है कि आई एम नॉट सेटिस्फाइड विद द नंबर्स. 234 के हाउस में आपको 118 लोग चाहिए. उन्होंने 113 की सूची दी है. राज्यपाल का डिस्कशन था. उनका जजमेंट था. चाहते तो सिंगल लार्जेस्ट पार्टी के नाते बुला भी सकते थे और चाहते तो रूल बुक के हिसाब से चलते. उन्होंने रूल बुक के हिसाब से चलना पसंद किया. प्रेफर किया और उन्होंने कहा कि मैं संतुष्ट नहीं हूं. मुझे संतुष्ट कीजिए. तो इस प्रकार से क्या मुख्यमंत्री बनेंगे? कब बनेंगे? कैसा क्या है? फिलहाल आज तो एक मुख्यमंत्री बनने के सामने एक प्रश्न चिन्ह जो है वो खड़ा हो गया है. 

सवाल: सर 118 विधायकों का समर्थन जुटाने के लिए आज क्या-क्या ऑप्शंस हैं अभी विजय के पास?

जवाब: ऑप्शंस देखिए उनके पास में एक तो खुद हैं ही वो चुनाव आयोग की वेबसाइट 108 दिखाया चुनाव आयोग में. पांच कांग्रेस के हैं. हालांकि कांग्रेस का कंडीशनल सपोर्ट है. उसमें कि आप भाजपा को किसी प्रकार का उनसे लिंक नहीं रखेंगे. ऐसे मिला के आप टोटल अगर करते हैं तो वो बनता नहीं है. 118 का 18 से कम बनते हैं. अब सवाल ये है कि क्या करें? तो एआईडीएम का एक धड़ा जो है खास करके पीएमके का धड़ा इसमें चार लोग जीत के आए हैं. उनके साथ एआईडीएम के साथ जो है वह समर्थन देना चाहता है. तो यह आशंका है और यह संभावना है कि एडीएम का एक धड़ा टूट करके वहां से आए या कम से कम ये चार लोग तो आ जाए और इस सरकार को समर्थन दें. इसी आशंका को देखते हुए जो एडीएमके जो विधायक हैं 25 विधायकों को पंडचेरी भेज दिया गया है बाड़ाबंदी में कि कहीं टूट नहीं जाए. तो एक संभावना ये है कि एडीएम का एक धड़ा टूट करके इनके साथ में आए और बने लेकिन गवर्नर वही है केंद्र द्वारा नियुक्त गवर्नर वही है तो वो जो तोड़ाफोड़ी होगी उसको कैसे लिया जाएगा इट इज येट टू बी सीन..

सवाल: सर आखिर अचानक से विजय कांग्रेस से नाराज क्यों हो गए? 

जवाब: ये मुझे भी आश्चर्य हुआ ये कहते पिछली बार जो उनकी फिल्म सेंसरशिप ने रोकी और फिर उनकी जो भीड़ थी लोगों की गोली चली सीबीआई की इंक्वायरी चल रही है जिसमें सब बातें हैं तो राहुल गांधी उनका साथ दे रहे थे तो ऐसा लग रहा था भ नेचुरल एलआई हो रहे हैं. लेकिन अब उन्होंने बड़ा हमला किया है कल कांग्रेस पे और यह कहा है कि यह पीठ में छुरा घोंपने वाले हैं एक तरह से और साथ ही कहा है कि मेंटली अनस्टेबल पार्टनर हैं जो कांग्रेस के लिए आमतौर पे कहते हैं और ये कहा कि इतिहास जो है आने वाले समय में इनको एहसास कराएगा कि गलती कर रहे हैं मेरे साथ कंडीशंस लगा करके. तो अंदर कुछ और भी हुआ है जिसकी जानकारी नहीं है. लेकिन बहरहाल यह कि कांग्रेस और विजय के बीच में एक तरह से अघोषित रूप से तलवारें खींच गई हैं. 

सवाल: सर अगर विजय विधानसभा में बहुमत हासिल नहीं कर पाए तो फिर अब तमिलनाडु में क्या होगा?

जवाब: अब एक संभावना यह हो सकती है जैसे मैंने कहा कि एडीएम की पूरा ही मिल जाए इनको सपोर्ट कर दे बाहर से होकर के अंदर से सपोर्ट कर दे. दूसरी संभावना थी कि डीएम के प्लस एडीएम के मिल जाए लेकिन तो भी संभव नहीं है. तो एक ही संभावना बनती है इसके अंदर कि एडीएम का एक धड़ा या एडीएम पूरी पार्टी जो है इनको समर्थन करे चाहे अंदर से करे चाहे बाहर से करे और सरकार बने और अन्यथा फिर राष्ट्रपति शासन की ओर प्रदेश बढ़ेगा एंड मच मोर विल डिपेंड ऑन द व्यू ऑफ़ द होम मिनिस्ट्री ऑन द व्यू ऑफ़ द सेंटर. 

सवाल: सर सवाल यह है कि क्या तमिलनाडु की फिल्म स्टार जो पावर वाली पॉलिटिक्स है उसका ट्रेंड बदल पाएंगे विजय? 

जवाब: ही इज़ अ न्यू बोर्न स्टार ऑफ पॉलिटिक्स जिसे कहते हैं. और आजकल एक अखबार ने लिखा है कि किंग ऑफ चेन्नई जो है लेकिन अब बदल पाएंगे कि नहीं इसका तो ध्यान नहीं है. लेकिन अभी तक के जो इतिहास रहा है पिछले कुछ समय से फिल्म स्टार जो एंट्री ले रहे हैं पॉलिटिक्स में विफलताओं का इतिहास रहा है. कैप्टन विजयकांत थे फेल हुए. कमल हसन फेल हुए. रजनीकांत टेक ऑफ नहीं कर पाए. फिर आंध्रा के अंदर चिरंजीवी है वो फेल हुए. तो आशंका ऐसी बनती है. लेकिन इनसे बहुत आशाएं हैं लोगों को और ये कहते हैं विल शोरली वि सक्सेस बिकॉज़ ही एंजॉय ए मेजर सपोर्ट एंड कॉन्फिडेंस ऑफ द पीपल ऑफ तमिलनाडु. और इनके लिए ये भी कहा जाता है इस तरह से है कि ही इज़ अ न्यू होप फॉर द यंग जनरेशन फॉर द वुमेन. और बहुत से अखबारों ने भी इनके लिए लिखा है कि ही विल ब्रिंग अ फंडामेंटल चेंज इन द पॉलिटिक्स ऑफ़ तमिलनाडु. तो इतनी बड़ी आशाओं और अपेक्षाओं के साथ यह सरकार बन रही है. बस अब यह देखना है कि सरकार बहुमत सिद्ध कर दे. शपथ हो जाए इसकी सरकार बन जाए फिर आगे बढ़े. टिल देन कुछ कहा नहीं जा सकता. लेकिन तमिलनाडु के लोगों को बहुत आशाएं हैं और वो विजय को एक ताजी हवा के झोंके के रूप में इस समय देख रहे हैं. 

सवाल: सर इसी के साथ सवाल ये आता है कि आखिर क्या है टीबीके के संस्थापक थलापति विजय की पॉलिटिकल आईडियोलॉजी? 

जवाब: जो उनके संस्थापक हैं सबके कहते हैं मैं उनकी विचारधारा पर चलता हूं और लाइक डीएम के एंड ऑल अदर पार्टीज जो है तो इस प्रकार आप ये कह सकते हैं और ये भी कहते हैं कि मैं संविधान की पुस्तक को अपनी आस्था मानता हूं तो मोटे तौर पे कहा जा सकता है कि केवल चेहरा बदला है तमिलनाडु में और राजनीतिक विचारधारा नहीं बदली है. दिस इज ऑल.. 

सवाल: सर तमिलनाडु में आखिर दूसरी बार मुख्यमंत्री पद के दावेदार स्टालिन चुनाव कैसे हार गए? 

जवाब: देखो मैं कहता हूं ना जन्मपत्री डेस्टिनी और इतने बड़े वोटों से हारे आप सोचिए डेस्टिनी के अलावा जो कहा जा रहा है एक तो परिवारवाद लोगों को पसंद नहीं आया वहां की जनता को एक प्रकार से कि क्या है आज आपने बेटे को उप मुख्यमंत्री बना दिया कल को फिर से मुख्यमंत्री बनाएंगे दूसरा क्या उनका हमेशा सनातन से टकराव रहा कहीं ना कहीं तो एक वर्ग है इस तरह का जो महसूस करता है कि अनक्ल्ड फॉर है केंद्र से टकराव जो है वो अनक्ल्ड फॉर है फिर करप्शन की बात थी बड़े-बड़े जो है ईडी के अलग केसेस चल रहे तो बस एक ही उसमें रही आशा की किरण थोड़ी सी रही उनका लड़का चुनाव जीत गया डिप्टी सीएम एक तरह से बाकी वो चुनाव हार गए उन्हें बिल्कुल उम्मीद नहीं थी और किसी को उम्मीद नहीं थी एग्जिट पोल्स को उम्मीद नहीं थी कि स्टालिन चुनाव हार सकते हैं बट डेस्टिनी यू कांट चेंज डेस्टिनी हार गए. 

सवाल: सर अब आपको क्या लगता है बंगाल के लिए प्रधानमंत्री मोदी क्या-क्या बड़े फैसले लेंगे? 

जवाब: बहुत कुछ उनके मन में होगा निश्चित तौर पे बंगाल का कायाकल्प करना चाहते हैं और सबसे पहले पहले दिन उन्होंने हेल्थ की स्कीम है उसको वहां लागू किया जो रुकी थी वहां पे दो बड़े पोर्ट वहां पे ला रहे हैं. उस रोड से ऐसा होगा कि जोक है वो साउथ एशिया और ईस्टर्न भारत के लिए द्वार के रूप में खुलेगा वहां पे जो है और माल जो है वेस्टर्न को भेजना सस्ता होगा. उससे कंपटीशन में हम लोग आ जाएंगे और रेलवे के बड़े-बड़े प्रोजेक्ट वहां पे आएंगे. इस प्रोजेक्ट के लिए भी है ना कम से कम 10,000 एकड़ जमीन का आवंटन होगा. गवर्नमेंट भी 3 से 4 हजार करोड़ की सब्सिडी देगी. जिसमें रेलवे का नेटवर्क बिछेगा तब पोर्ट आ पाएंगे वहां पे. तो पोर्ट कोलकाता की आत्मा है. दो बड़े पोर्ट आने की बात है सबसे बड़ी. 

दूसरा जो है एक सिलिकॉन वैली प्रोजेक्ट वहां आईटी का आने वाला बड़ा प्रोजेक्ट है. वो टेक अप करेगा. तीसरी सबसे बड़ी बात केंद्र में जितनी योजनाएं रुकी हुई है क्लीयरेंस के लिए सरकार की सरकार का जो फंड्स क्लीयरेंस रुका हुआ है वो सारा का सारा बिल्कुल क्लियर हो जाएगा. नरेंद्र मोदी का साफ तौर पर कहना है कि बंगाल में विकास के कामों में कभी भी धन की कमी नहीं होने दी जाएगी और आप देखेंगे दिल्ली से इतना पैसा बंगाल जाएगा कि खर्चा भी वो लोग नहीं कर पाएंगे जो सबसे बड़ा फैक्टर होता है वो होता है फाइनेंस का उसमें सारी सिचुएशन सामने है एक टूरिज्म सेंटर बनेंगे अलग से जो है इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स आएंगे जिस तरह रेलवे ने अच्छा काम किया है उन्हें लगता है कि अश्विनी वैश्वियों की सेवाएं इसमें ली जाएंगी बंगाल का जो इंफ्रास्ट्रक्चर का जोक का जो सेटअप है कैसे बने किस तरह से बने बने और एक कम से कम स्वामी तेजी से कैसे आगे बढ़े टूरिज्म का मैंने आपसे कहा बड़े प्रोजेक्ट बनेंगे तो टोटल कायाकल्प जो है वहां पे फिर एग्रीकल्चर है हेल्थ है ऑल सेक्टर्स ऑफ इकॉनमी वो सारे सारे जो पिकअप करेंगे एक साथ वहां से और पीएमओ का नरेंद्र मोदी का क्लोज सुपरविजन उनके ऊपर रहेगा क्योंकि जनता ने वोट जो है वो नरेंद्र मोदी अमित शाह को दिया है इन्हें भी आप कह सकते हैं केंद्र भाजपा को दिया है तो उनकी जिम्मेदारी ज्यादा बनती है तो आने वाले समय मुझे पूरा भरोसा है कि अगले एक दो वर्ष के अंदर ही है. बंगाल में एक ओवरऑल रेवोल्यूशन या डेवलपमेंट रेवोल्यूशन आपको दिखाई देगा. 

सवाल: सर क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि जो बीजेपी का कोलकाता विन है उसके बाद वहां का हिंदू सेंटीमेंट राम मंदिर सेंटीमेंट से बड़ा लिखा है?

जवाब: वास्तव में कोलकाता के सगड़ों पे तो लोग पागल हो के घूम रहे थे दो दिन पहले. आदित्य गई थी वहां. इसने बताया कि लोग नारे लगा रहे हैं. खुश हो रहे हैं. औरतें चिल्ला चिल्ला के कह रही है कि मैं बहुत जोर से कहूंगी जय श्री राम. पहले मुझे जय श्री राम कहने नहीं देते थे. कोई कुछ कर रहा है, कोई कह रहा है हम बंगाल में रहेंगे, कहीं नहीं जाएंगे. लोग रो रहे हैं, भावुक हो रहे हैं. ऐसा जैसे बंगाल आजाद हो गया, देश आजाद हो गया. इस तरह का जो सेंटीमेंट होता है ना कोई ये कह रहा है कि हम फ्लैट नहीं बेचेंगे. कोई कह रहा है कि हमें दिल्ली छोड़ के वापसक आ जाएंगे. एक अलग तरह का मोमेंटम, एक उस अलग तरह का भावावेशज. इस तरह से ऐसा छाया हुआ है जो मुझे लगता है उसमें राम मंदिर का भी सेंटीमेंट था बंगाल के अंदर. ये सेंटीमेंट उससे बड़ा सेंटीमेंट है. और नरेंद्र मोदी को भगवान मानते हैं वहां सरेआम कह रहे हैं नरेंद्र मोदी भगवान है. उन्होंने हमारे ये कर दिया है. कंप्लीट जिसे कहते हैं ना ओवरऑल इमोशनल एक तूफान एक समुद्र जो है वो कोलकाता में पिछले तीन-चार दिनों में देखने को मिला. 

सवाल: सर तो क्या फिर इस चुनाव में भी नरेंद्र मोदी ही चेहरा रहे और उनकी जो पब्लिक मीटिंग्स में इतनी भीड़ आई. कैसे देखते हैं सर आप?

जवाब: ऑफकोर्स वो तो पूरे देश में भाजपा का चेहरा है. सारे चुनाव भाजपा सरकार उनके चेहरे पे जीतती हैं. देन बंगाल इज़ आल्सो नो एक्सेप्शन. उनके चेहरे पे है. 20 22 उन्होंने रैलीज़ करी. जितना जबरदस्त क्राउड आया. पिछले 10 दिनों में सारा माहौल चेंज हुआ. आपने देखा है तो निश्चित तौर पे है कि यह चुनाव भी उनके चेहरे पर और अमित शाह की रणनीति पर अमित शाह के हार्ड वर्क पर अमित शाह की स्ट्रेटजी पर जो है ना यह चुनाव लड़ा गया और चुनाव लड़ा गया और चुनाव सक्सेस है. 

सवाल: सर बिहार को जीतने के बाद नरेंद्र मोदी ने कहा था कि यह जीत की गंगा अब बंगाल से होकर गुजरेगी और बंगाल जीत के साथ ही नरेंद्र मोदी का यह सपना भी पूरा होता है. तो क्या कुछ कहना चाहेंगे आप? 

जवाब: सही है. उन्होंने कहा था गंगा सागर से लेकर कन्याकुमारी तक जो पांच राज्य हैं सब में भाजपा सरकारें होंगी एक दिन और उसमें कहा था उसमें गंगा मां ने मुझे बुलाया है. फिर बिहार के वक्त कहा था कि अब ये बिहार की गंगा है नाक हो के गुजरेगी. हमारी सरकार बनेगी वो सारे सपने सच हुए तो उनका जो कांसेप्ट था फिलॉसफी थी गंगावर्ती राज्य जो हैं उन समय भाजपा सरकारें बने वो सपना पूरा हो गया.  

सवाल: सर और चुनाव के दौरान कोलकाता के हुगली नदी में नाव में बैठकर नरेंद्र मोदी जब फोटोग्राफी कर रहे थे उस समय इसका क्या खास भाव रहा होगा? 

जवाब: भाव ये है कि देखो एक तो नरेंद्र मोदी है ना एक ओरिजिनल आदमी है एक मन के मोदीजी हैं कर्म योगी हैं जब क्षण मिलता है जनता से कनेक्ट करने की सोचते हैं बंगाल की जनता से कनेक्ट करने का एक दिन सुस ख्याल आ गया चलो आज चलते हैं हुगली नदी में चलते हैं हावड़ा की तरफ चलते हैं वहां बैठ के उन्होंने देखा आपने किस तरह से कैमरा से तस्वीरें ली है कितना इतना पॉपुलर हुए तो एक तो उन्होंने कहा कि लोकल सेंटीमेंट को टच किया अपने मन के भाव को पूरा करने के साथ-साथ जो है वो तो खुद ब्रांड है तो उसकी चर्चा हो गई सारे इलाके के अंदर और आप देखिए हावड़ा और सारे इलाके में कितना जबरदस्त सपोर्ट जो है बीजेपी को वहां पे मिला है और आप एक बात और देखना क्योंकि बहुत बड़े ब्रांड है नरेंद्र मोदी खुद तो जिस कैमरे से वो फोटो खींच रहे थे उस कैमरे की डिमांड इतनी हो जाएगी कैमरा बाजार में मिलना ही बंद हो जाएगा तो नरेंद्र मोदी का मूड था उनका मन था जनता से कनेक्ट होने की एक बात थी और मन में एक आता है कि इसे मैसेज टूरिज्म इंडस्ट्री को भी जाएगा और आप देखना आने वाले समय लोग टूट के पड़ेंगे हावड़ा पे वहां पे और कुछ लोग नाव भी तलाश करेंगे मोदी जी कहां बैठे थे यहां बैठे थे उसके मोन्यूमेंट बना देंगे वहां पे अभी तक हिस्ट्री तो यही कहती है सो दिस वाज़ अ गुड मूव.. 

सवाल: सर असम चुनाव में चाय बागान में वुमेन वर्कर्स के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो चाय की पत्तियां तोड़ी और चाय पीने का जो इनिशिएटिव लिया था इसका इंपैक्ट आप किस तरह से देखते हैं टी गार्डंस वाली छह सीटों पर...

जवाब: देखिए चाय जो है ना आसाम की आत्मा है और नरेंद्र मोदी की इस विजिट के साथ में जिस मौलिकता के साथ उन्होंने चाय की पत्तियां तोड़ी फिर चाय पी और यह भी कहा कि तुम्हें मालूम है कि मैं भी चाय वाला हूं. तो लोकल सेंटीमेंट को जीत लिया उन्होंने. उसका परिणाम ये हुआ कि जो लेडी वर्कर्स हैं पत्तियां चुनने वाली चाय के उद्योग से जुड़ी वो सारा सारा स्विंग जो है ना नरेंद्र मोदी के फेवर में भाजपा के फेवर में आया. और फिर आप उसमें एक बात और ये देखेंगे छह की छह सीटें हैं वहां इस बेल्ट के अंदर डिब्रूगढ़ से जुड़ी सारी. सभी सीटें भाजपा ने जीती. तो यह जो मूव था उनका यह वेल थॉट था के नोइंगली अननोइंगली हुआ जैसे भी हुआ इट वाज अ सुपर मूव जिसे कहते हैं इन्होंने बंगाल की जो लेडी वर्कर्स हैं जो चाय बागान में काम कर रहे हैं उनका दिल भी जीता जनता को एक मैसेज दिया और इन टोटिटी जो है ना आसाम की जो वुमेन फोर्स है उसका दिल उन्होंने जीता एंड इट पेड रिच डिविडेंड्स. 

सवाल: सर यह कैसा संयोग है कि हर चुनाव के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंदिर जाते हैं, तीर्थ स्थल जाते हैं, उपासना करते हैं और पार्टी चुनाव जीत जाती है. आखिर ये फार्मूला है क्या?

जवाब: श्रद्धा है उनके मन की. उनके मन का भाव है कि ऐसा करने से सफलता मिलती है. ऐसा करने से मन को शांति मिलती है. उनका दर्शन शास्त्र अपना मेरे विचार से पिछले 10 साल में 14 बार ऐसा कर चुके हैं वो. और रिजल्ट अगर देखा तो 80% जगह चुनाव सक्सेस में है. अब आप देखिए जिस दिन चुनाव खत्म हुआ उस दिन वो काशी चले गए भगवान शिव की आराधना करने. और जिस दिन मतगणना हुई तो वो प्रयागराज चले गए वहां. तो उनकी माया वही जानते हैं पर उनकी बेसिकली आस्था है उनकी और उनकी आस्था का भरोसा जो है ना ईश्वर उसका सम्मान करता है. आप देखिए जाते हैं तो उसका फल मिलता है. परिणाम मिलता है. भाजपा चुनाव जीतती है. 

सवाल: सर क्या आप इस आकलन से सहमत हैं कि पश्चिम बंगाल चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभाओं में उमड़ी हुई जबरदस्त भीड़ ने पिछले 10 दिनों में चुनावी पासा बदल दिया और बीजेपी पहुंच गई 207 के आंकड़े के पार. 

जवाब: अबब्सोलुटली करेक्ट. वैसे तो गाड़ी को अमित शाह काफी दूर तक खींच के ले आए थे. पर प्रधानमंत्री की 20, 22 रैलीज हुई और खासकर पिछले 10 दिन में जो उन्होंने किया मैसिव क्राउड आया. मैं समझता हूं खुद प्रधानमंत्री ने नहीं सोचा होगा कि इतना मैसिव क्राउड कैसे आ रहा है. लेकिन दूसरा पहलू ये था कि मैसिव क्राउड जो है प्रधानमंत्री की सभाओं का वो आने वाले कल का संकेत दे रहा था. और वही हुआ तो फेयरली इट कैन बी सेड कि जो आखिरी 10 दिनों का कैंपेन था प्राइम मिनिस्टर का जो है सपोर्टेड बाय अमित शाह ऑन द ग्राउंड ग्राउंड सपोर्ट जो है दैट वाज़ सुपर एंड इट हैज़ गिवेन हाई रिजल्ट्स. 

सवाल: सर कोलकाता चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक छोटी सी दुकान पे झालमड़ी खरीद के खाई. वो छोटी सी घटना है सर. लेकिन इतनी वायरल कैसे हो गई?

जवाब: मैंने कहा नरेंद्र मोदी जिस मिट्टी को हाथ लगाते हैं मिट्टी सोना बन जाती है. आज संसार के सबसे बड़े ब्रांडिंग मैन है. कोई क्रिकेट प्लेयर नहीं है. वो नरेंद्र मोदी हैं जिसे कहते हैं. और झालमड़ी क्या पूरे कोलकाता में झालमड़ी तूफान आ गया. दुकानों में झालमड़ी का स्टॉक ही गायब हो गया. इतने लोग खाने चले गए वहां पे. दैट वे जो है Facebook पे देखिए Instagram पे 100 मिलियन लोगों ने उसको लाइक किया. बियोंड पॉइंट सारे देश में एक तूफान आ गया. झालमुड़ी झालमुड़ी जो है तो है उनको कुदरत का वरदान है उनको वो जिस चीज को छूते हैं वो चीज आसमान में चली जाती है और यहां तक बात है कि अब अपन देखिए अपने देसी शो करते हैं जब भी देसी शो करते हैं तो अपनेप उत्साह में लड्डू कचोरी बांटते हैं वहां पुराना शौक है सबका 15 साल से सब लोग साथ हैं करते हैं तो इस बार क्या हुआ के अनु ने कहा पता नहीं पूर्णिमा ने किसने कहा कि हम झालमड़ी खाएंगे इस बार तो अब देखिए नीचे आज लड्डू कचोरी जगह झालमड़ी हो रही है अब कहां 1000 1200 किलोमीटर 15 किलोमीटर दूरक और कहा है नोएडा लेकिन नरेंद्र मोदी की झालमड़ी ट्रेवल कर रही है तो सक्सेस है उनको ईश्वर का वरदान है वो जिस जिस चीज को छुएंगे चीज ब्रांड बन जाएगी चाहे वो बिहार का मखाना हो चाहे झालमड़ी हो चाहे कुछ और वो चाय की पत्तियां चुनने जाएंगे चाय की पत्ती हो एनीथिंग.. 

सवाल: सर पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण के चुनाव से ठीक एक दिन पहले यानी 28 अप्रैल को प्रधानमंत्री मोदी ने सिक्किम में बच्चों के साथ फुटबॉल खेली थी. उनके इस मूड को आप कैसे देखते हैं?

जवाब: देखो मैंने कहा ना कि इसके दो पहलू हैं. एक तो होता है कर्म करो फिर परिणाम ईश्वर पर छोड़ दो. जब सारा चुनाव पूरा हो गया, चुनाव प्रचार पूरा हो गया तब फिर चले गए सिक्किम जो है और फिर अब बच्चों के साथ फुटबॉल खेल रहे हैं. तो मैं ऐसा समझता हूं कि नरेंद्र मोदी का जीवन जो है ना अभाव और गरीबी में बीता जैसे पढ़ते थे, चाय बेचते सब है. तो ये महंगे फुटबॉल, ये ग्राउंड, ये स्पोर्ट्स ये ड्रेसेस ये कहां देखी होंगी? तो बालक मन उनका जो है ना कभी-कभी जाग जाता है. तो उन्होंने फिर से बचपन को जिया बच्चों के साथ इसको खेल के. अच्छा लगा गदगद होंगे बच्चे तो दैट वे जो है तो एक अच्छा सा एक मूड की बात है और कर्म योगी के रूप में कहिए या बच्चों के प्रिय नेता के रूप में कहिए वो वहां पे आए उनके मन को भी संतोष मिला होगा. 

सवाल: सर उस दिन जीत के दिन बीजेपी हेड क्वटर्स में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बंगाल के जनमानस के अनुरूप उन्हें बंगाली वेशभूषा में हमने देखा. आखिर उन्हें देता कौन है इस तरीके के आइडियाज? 

जवाब: देखो वह तो अभी ऑल इन वन है. कोई पीएमओ का आदमी इस लेवल पे नहीं पहुंच सकता. कोई ऐड एजेंसी नहीं पहुंच सकती. कोई स्टाइलिश नहीं पहुंच सकते. कोई डिजाइनर नहीं पहुंच सकते. नरेंद्र मोदी खुद ही आईडिया लाते हैं. आई थिंक ड्रेस भी खुद ही डिजाइन करते होंगे. इतनी ड्रेसेस वो बदलते हैं. देखिए डिजाइन करते होंगे. तो शौक है और ईश्वर ने ऐसा उनको बॉडी दी है कि हर ड्रेस उनको सूट करती है. आप देखिए कुछ लोगों ने पहले आपत्ति की थी. उन्होंने कहा मैं वही पहनूंगा जो मेरी बदन को सूट करता है. जो किया उन्होंने तो वाकई कहना चाहिए कि नाउ ही इज़ ए मास्टर माइंड है कहो कि सुपर जो है ना स्टाइलिश कहिए या ड्रेस डिजाइनर कहिए वो करते हैं और देख कितना बाबू मुशाय के मुद्रा में किस तरह से आए वहां और वो तो हर चीज ब्रांड बन जाती है. अब आप देख लेना बाजार के अंदर वो धोतियां मिलना कम हो जाएंगी. वो जो उन्होंने पहनी है बंगाली धोतियों की उसकी मांग बढ़ जाएगी एकदम से और बहुत से पॉलिटिशियन घर भाजपा के लोग तो नहीं पहनेंगे. सोचेंगे हम कंपटीशन कर रहे हैं लेकिन बाकी जगह पॉपुलर हो जाएगी तो इस तरह की जो है तो ये है उनका एक अंदाज है अपना गुड नाइस 
सवाल: सर आखिर 9 मई को कौन लेगा कोलकाता राजभवन मुख्यमंत्री पद की शपथ? 

जवाब: देखो एक बार तो अमित शाह ने संकेत दिए थे कि अब कोलकाता प्रयोग करने का समय नहीं है राजस्थान मध्य प्रदेश उड़ीसा छत्तीसगढ़ जैसा प्रयोग करने का समय अब नहीं है इन ए वे ठीक है ना लेकिन राजनीति की मजबूरियां होती है कई बार विचार बदलता है भी व्यक्ति कहां तो अगर पुरानी विचारधारा से जाते हैं कि प्रयोग करने का वक्त नहीं है तो नेचुरल चॉइस तो शुभेंदु है देखिए और फिर आलाकमान का फैसला है दैट वे किस पे क्या-क्या फैक्टर वो देखते हैं बदलते हैं माहौल में क्या किस तरह से है लेकिन ये बात तय है अगर उनको अवसर मिलता है मुख्यमंत्री बनने का तो ही विल बी सक्सेसफुल चीफ मिनिस्टर वो चीफ मिनिस्टर नहीं भी बनते हैं और मान लो डिप्टी सीएम होम के साथ रहते हैं तब भी ही इज़ अ कॉम्पिटेंट पर्सन जिसे और आज आवश्यकता है इस बात कीक में जो लॉ एंड ऑर्डर का प्रॉब्लम है जिसे कहना चाहिए उसे वो चाहे मुख्यमंत्री के रूप में कहिए, चाहे होम मिनिस्टर के रूप में कहिए, ही इज ए प्रॉपर पर्सन, एप्रोप्रियट पर्सन टू हैंडल द सिचुएशन एंड टू फाइव टीएमसी ऑन रोड्स. 

सवाल: सर क्या नए मंत्रिमंडल में उप मुख्यमंत्री का कोई पद होगा और अगर होगा तो कौन-कौन है इसके दावेदार?

जवाब: देखो नरेंद्र मोदी अमित शाह के फार्मूले में इन दिनों उप मुख्यमंत्री के दो पद लगभग हर राज्य में आते हैं. यहां भी होंगे. अब कौन होंगे तो नाम उसी चलाइए लेकिन ऐन वक्त फैसला तो वहीं होगा. उसमें से एक महिला उप मुख्यमंत्री हो सकती है. उस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता. तो लेट्स सी इन द कमिंग थ्री फोर डेज व्हाट कम्स आउट. 

सवाल: सर विधायक दल की बैठक के लिए खुद गृह मंत्री अमित शाह को ऑब्जर्वर की तरह चुना गया है. अमित शाह जा रहे हैं. उसके पीछे के मायने क्या है?

जवाब: दो मायने हैं. एक तो जहां मेहनत की थी, परिश्रम किया था, हार्ड वर्क किया था. उस सफलता को अपनी आंखों से देखना. नरेंद्र मोदी तो जिस दिन शपथ होगी उस दिन देखेंगे उसको. अमित शाह एक दिन पहले देखेंगे. आप यह मानिए और दूसरा क्या है कि बड़ी घटना है वह और अगर इनके मन में किसी नए नाम को लाने का प्लान है या कुछ ऐसा नॉन पॉलिटिकल टाइप किसी व्यक्ति को जैसे सुना था कि उत्कल महाराज उनको लाने की चर्चा है मीडिया में इस तरह की है या और कोई ऐसा नया नाम है तो विधायक दल की बैठक ठीक से हो कानून व्यवस्था बनी रहे और फिर दूसरा क्या कोलकाता के हालात है ना अभी अभी थोड़ा सा मतलब कंट्रोल में है लेकिन अभी टेंपरेरी कंट्रोल में उनको स्थाई तौर पे कंट्रोल में आने का समय लगेगा तो अमित शाह आज ही नहीं हमेशा आगे भी कई बार वहां पे जाएंगे सारी व्यवस्थाओं को स्थाई रूप से ठीक करने के लिए तो मुझे ऐसा लगता है इन्हीं सब कारणों से और उसको प्रॉपरेंस देने के हिसाब से और मुझे लगता है शायद प्राइम मिनिस्टर ने ही कहा होगा कि आप जाइए वहां पे ऐसा मेरा अनुमान है. अच्छी बात है. 

सवाल: सर चुनाव प्रचार के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने टीएमसी के बैकग्राउंड वाले असामाजिक तत्वों, गुंडों को चेतावनी दी थी कि 5 मई के बाद बीजेपी की सरकार बनती है तो टीएमसी के गुंडों को उल्टा लटका कर सीधा कर देंगे. क्या इस चेतावनी का कुछ असर पड़ा? 

जवाब: ये चेतावनी वैसे तो अमित शाह का जो मूल व्यक्तित्व है जी एंटी सोशल एलिमेंट्स को हैंडल करने का उसके अनुरूप है और असर तो जबरदस्त था वहां पे जो है क्योंकि यहां तक उन्होंने कह दिया कि उस दिन घर पे रहना घर से बाहर मत आना हां जो है तो घबराहट मच गई वहां पे जो है और उसका एक परिणाम यह है कि वहां पे जो वोटों का हेरफेर नहीं हो पाया या सड़कों पे हिंसा नहीं हो पाई है उसके पीछे अमित शाह की चेतावनी का बड़ा असर रहा होगा ऐसा मेरा निश्चित निश्चित तौर पे मानना है. तो ये जो चेतावनी उन्होंने दी है इसका परिणाम देखने को मिला. इस चेतावनी का एक पहलू और है. कुछ लोगों ने कहा गृह मंत्री का पद बहुत बड़ा होता है. उन्हें ऐसी भाषा का उपयोग नहीं करना चाहिए था. लेकिन भाई मेरा मानना ये है कि एवरीथिंग इस फेयर इन लव वार एंड नाउ इलेक्शन आल्सो. और आजकल जो चुनाव है ना चुनाव नहीं युद्ध की तरह लड़ा जाता है और युद्ध में अपने बचाव के लिए हमला करने के लिए जो भी तरीका सही लगता है व्यक्ति उसको करता है और फिर दूसरा क्या था जो अमित शाह की भाषा थी आम आदमी को समझ में आने वाली थी इससे गुंडों को तो मैसेज गया सो गया एंटी स्पेशल एलिमेंट्स को साथ में आम जनता में भरोसा गया कि व्यक्ति हमारे साथ खड़ा हुआ है वोट दो डर निकालो मन से सेंटर पे जाओ वोट डाल के आओ तो इस चेतावनी ने मल्टीपल काम किया. 

सवाल: सर 60 साल में पहली बार पश्चिम बंगाल में हिंसा मुक्त हुए चुनाव का श्रेय आप किसे देते हैं? 

जवाब: बेसिकली लीडरशिप प्राइम मिनिस्टर अमित शाह इस तरह का है क्योंकि मोर ऑफ द होम डिपार्टमेंट से कंसर्न और सेंट्रल फर्सेस आप कहिए इलेक्शन कमीशन भी कही है अच्छे इंतजाम किए उन्होंने सेंट्रल फर्सेस में सारी फर्सेस थी और पहली बार ऐसा हुआ कि सेंट्रल फर्सेस जितनी भी है चाहे सीआरपीएफ है बीएसएफ है सीआईएसएफ है इनके सब डीजी की मीटिंग हुई वहां पे और प्रवीण रंजन जो डीजी हैं सीएसएफ के सीएम मोस्ट है शायद उन्होंने उसकी अध्यक्षता करी वहां पे उसको कोऑर्डिनेट किया वहां पे और एक अच्छा सब फोर्सेस ने मिलके काम किया वहां यह फर्सेस प्लस लोकल पुलिस उनके साथ जो उनका एडमिनिस्ट्रेशन था उसको मिलके उन्होंने काम किया तो बेसिकली क्या हुआ कि 2ाई लाख सेंट्रल फर्सेस 70 हजार वहां की पुलिस प्लस सेंट्रल दूसरी एजेंसीज इन सब ने मिलके जो कोऑर्डिनेशन था इलेक्शन कमीशन के साथ जो कोऑर्डिनेशन था द एंटायर क्रेडिट गोज़ टू एवरीवन अंडर द लीडरशिप नरेंद्र मोदी एंड हमेशा.. 

सवाल: सर इस चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को कैसा रिस्पांस मिला? 

जवाब: ही इज़ अ हीरो देखिए वो जहां भी जाते हैं तो लोग टूट के पड़ते हैं. डिमांड आती है हमेशा कि एक सप्ताह के लिए योगी को भेज दो. और यह बात नरेंद्र मोदी जानते हैं हमेशा जानते हैं. इसलिए उनको भेजते हैं. उनके कॉल पे ही जाते हैं. वहां पे अब भी मेरे ख्याल से 101 दिन और रहे वहां पे 20 22 रैलियां करी वहां पे और एक मैसेज चला गया कि बुलडोजर वाले बाबा आ गए हैं वहां पे जो है और वो भाषा वैसी बोलते हैं. तो उन्होंने कहा कि आप चिंता मत करो वोट डालने जाओ और चुनाव के बाद में ये जो मौलवी हैं या माफिया हैं, गुंडे हैं ये सब झाड़ू लगाते नजर आएंगे बंगाल की सड़कों पे. गो एंड वोट. तो कॉन्फिडेंस क्रिएट करते हैं वो तो ही इज अ थर्ड हीरो जिसे कहना चाहिए आफ्टर नरेंद्र मोदी अमित शाह ये और फॉललोड बाय आसाम चीफ मिनिस्टर जो है वो भी इसी लाइन पे हैं. गुड योगी का मतलब जिसे कहना चाहिए वो स्ट्राइक रेट भी बहुत अच्छा है. योगी पॉपुलर है और योगी हिंदू सेंटीमेंट केली अक्रॉस द कंट्री पॉपुलर है. और उनका सदुपयोग क्या हो ये नरेंद्र मोदी जानते हैं. 

सवाल: सर 4 मई को भाजपा मुख्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इशारोंइशारों में समाजवादी पार्टी पर जो निशाना साधा था क्या आपको लगता है कि कोलकाता के बाद अब नरेंद्र मोदी की निगाहें 2027 को लेकर लखनऊ पर हैं?

जवाब: अब्सोलुटली. हालांकि इसका एक पहलू और भी है. वो यह है कि एडवांस में उन्होंने वाण कर दिया अपोजिशन को. जैसे अमित शाह ने वर्णन किया था अलग भाषा अलग अंदाज में अलग विषय पे. इन्होंने पॉलिटिकल भाषा कर दिया कि बी केयरफुल इशारा था अखिलेश यादव की ओर वो भी चिंतित हुए होंगे और जो मैसिव टर्न आउट हुआ है हिंदू कंसोलिडेशन हुआ है बंगाल में जो जो हुआ है वो अद्भुत था इसका मतलब क्या हुआ इसका मतलब यह है कि हिंदू कंसोलिडेशन कैन बीट नाउ इजीली मुस्लिम कंसोलिडेशन तो ये तो उनके लिए चिंता का विषय होगा ना अखिलेश यादव के लिए तो इशारा बिल्कुल क्लियर था उनका कि नेक्स्ट मंजिल अपनी लखनऊ है वहां पर मतलब उत्तर उत्तर प्रदेश है और इशारा जो था वो निश्चित तौर पे सपा पार्टी अखिलेश यादव की ओर था. 

सवाल: सर क्या आपको लगता है कि पश्चिम बंगाल में मिली प्रचंड बहुमत के बाद में लोकसभा चुनाव 2029 को लेकर भाजपा की निर्भरता उत्तर प्रदेश पर कम हो जाएगी?

जवाब: ऑफकोर्स ऐसा निश्चित तो लगता है कि बिहार में 40 सीट है. परसेंट बहुमत है इनका. अब यहां देखिए कितनी सीट हैं और परसेंट बहुमत है. दैट वे और आगे बहुमत आएगा. तो कंपेयर यूपी यूपी हालांकि यूपी यू कांट रिप्लेस विद कोलकाता और पटना जो है 80 सीटें हैं. लेकिन बट स्टिल एक ब्रॉडर वे में कहा जा सकता है कि ऐसा है दैट वे जो है दूसरा क्या है कि अपोजिशन जो है थोड़ा सा वहां पे यूपी में एक बात और है डिसेंट है थोड़ा अपोजिशन अखिलेश यादव वगैरह थोड़ा डिसेंट और डिग्निफाइड तरीके से पॉलिटिक्स करते हैं अपनी दैट वे जो है वो इन राज्यों में नहीं है दैट वे अभी जो आवश्यकता है जो रिक्वायरमेंट है वो है एग्रेसिव पॉलिटिक्स की तो निश्चित तौर पे माना जाना चाहिए कि यूपी पे निर्भरता एज अ स्ट्रेटजी भी कम होगी उस तरह से और यह जो अग्रेसिव स्टेट्स हैं बिहार है और इधर बांग्ला जो है इन पे निर्भरता बढ़ेगी दूसरे शब्दों में भाजपा की रणनीति में, लोकसभा चुनाव जीतने की रणनीति में, बहुमत के लाने की रणनीति में जो है उत्तर प्रदेश में निर्भरता थी वो रहेगी. अपेक्षाकृत कम रहेगी. 

सवाल: सर चुनाव हारने के बाद 5 मई को कोलकाता में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस होती है. ममता बनर्जी कहती हैं कि मैं लोक भवन जाके इस्तीफा नहीं दूंगी और मैं नैतिक रूप से चुनाव जीत चुकी हूं. अब ऐसे में उनके आचरणों को आप कैसे देखते हैं? और सचमुच अगर ऐसा होता है तो केंद्र सरकार के पास क्या विकल्प है? 

जवाब: इट्स अनबिकमिंग ऑफ फॉर्मर चीफ मिनिस्टर और सीनियर पॉलिटिशियन इट इज वेरी इमेचोर एक्शन इट डज सूट द स्टचर एंड पर्सनालिटी ऑफ़ ममता दीदी जिसे कहते हैं जाने किस आवेश में किस भाव में उन्होंने कहा ये कह के उन्होंने अपना कद भी गिराया अपने समर्थकों को भी थोड़ा सा ए्बरेस किया इस तरह से और ऐसा उनको नहीं करना चाहिए था उन्हें बहुत शालीनता के साथ स्टालिन की तरह विजेंद्र की तरह दूसरे मुख्यमंत्री आ रहे हैं जाके के राजभवन में अपना इस्तीफा सौंपना चाहिए और इस्तीफा ही नहीं राजभवन के अंदर जो शपथ ग्रहण समारोह है उसमें बैठना चाहिए उसको अटेंड करना चाहिए एक बुके भी देना चाहिए जो मुख्यमंत्री बनेगा बांग्ला का जो है अमित शाह मिलेंगे वहां पे उनके साथ जो राजभवन में टी होती है उसमें भी शामिल होना चाहिए ग्रेस दिखानी चाहिए लड़ने के लिए सारी उम्र पड़ी है सारा जीवन पड़ा है पांच साल पड़े हैं आज ग्रेस दिखाइए तो मैं ऐसा मानता हूं इट वाज़ एन एरर ऑफ़ जजमेंट ऑन द पार्ट ऑफ़ ममता जिसको वो वो अब तो अपने आप ही सुधर गया. विधानसभा भंग हो गई है तो कोई मुद्दा नहीं रहा. और आपने विकल्प की बात की थी वो स्टेज ही नहीं आई है कोई विकल्प की. वैसे गवर्नर को 164 में और ऑटोमेटिकली अब विधानसभा भंग हो गई तो स्वतः सब कुछ समाप्त हो गया है. कोई जरूरत ही नहीं करने की. अगर उनको कोई ग्रीवांस है तो कोर्ट में जाएं. सुप्रीम कोर्ट में जाए. वहां वो चैलेंज कर सकती है फैसले को. देर आर एट द मोमेंट दिस क्वेश्चन हैज़ गॉन एब्सोलुटली इरिलेवेंट. कि ममता दीदी इस्तीफे की धमकी देंगी तो हम कैसे हैंडल करेंगे? 

सवाल: सर बंगाल से जुड़े हुए राजनीतिक प्रेक्षकों का यह कहना है हालांकि ममता बनर्जी चुनाव हार गई हैं लेकिन कुछ सीमा तक उनका जलवा या करिश्मा अभी बरकरार है आपको क्या लगता है? 

जवाब: ब्रिलियंट क्वेश्चन कल जो उन्होंने इस्तीफे की नहीं देने की उससे उनका बहुत गिरा है एकदम से लेकिन अ टाइम इज अ हीलर उसके समर्थक निराश हुए थे थोड़े दिन में ठीक हो जाएंगे कहीं खड़ी होंगी तो 5 700 8000 आदमी खड़ा हो जाएगा साथ आके देखने के लिए राजनी राजनीति में सत्ता में नहीं होने के कारण से 50 लोग इकट्ठे नहीं होते. बुलाना पड़ता है फोन करके. मान लो कोई एक्स चीफ मिनिस्टर है या एक्स है तो कहीं जा रहा है दौरा करने के लिए. मान लो तो बुलाना पड़ता है फोन करके वर्कर्स को यार पांच तुम लेके आना. पांच तुम लेके आना. 50 आदमी तो दिखे वहां पे सामने दिखने के लिए जो है ममता जो यहां पे भी है वो तो क्या स्ट्रीट में सड़कों पे रहेंगी. तो 50 100 200 400 आदमी हमेशा उनके साथ रहेंगे. हम प्रसाइजली कंक्लूड कर सकते हैं कि बंगाल के जितने पॉलिटिशियनंस हैं अभी जो है उस तरह से इस हार के बावजूद जो है एक लिमिटेड वे में जो है ममता का अपना अस्तित्व अभी है. एक थोड़ा सा आप मुझसे कहिए कि जलवा कह दीजिए, करिश्मा कह दीजिए, वो कह दीजिए. एक बहुत लिमिटेड वे में वो अभी पूरे तौर पे समाप्त नहीं हुआ है. उसको समाप्त होने में अभी समय लगेगा. अभी है वो. 

सवाल: सर इन सारे हालात में अब टीएमसी का भविष्य क्या होगा? क्या आगे ऐसा हो सकता है कि ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी की अगुवाई में भाजपा ज्वाइन कर सकते हैं दो तिहाई विधायक और कुछ सांसद? 

जवाब: देखो ममता को शुरू से ही शक है विधायक दल की बैठक में उन्होंने कहा मुझे शक है पार्टी के लोग शामिल थे इस षड्यंत्र में मुझे हराने के दैट वे जो है और कई लोग दबी जुमान से बात करते हैं अभिषेक बनर्जी के बारे में कि उनके आईटी केस हैं ईडी केस हैं सीबीआई केस है कई लोग बात करते हैं इस तरह की दबाव में आएंगे कभी तो हो सकता है वो कंप्रोमाइज करें और वन थर्ड लोग के चले जाए. लेकिन मैं नहीं समझता कि ममता के कहते वन थर्ड लोग पार्टी छोड़ के चले जाए. ऐसा अभी तो चांस नहीं लग रहा. छ आठ महीने में हो जाए तो नहीं कह सकते. अभी एट द मोमेंट ऐसा कोई आसार जो है वो दिखाई नहीं देता है. 

सवाल: सर फिर कैसा होगा ममता दीदी का आने वाला कल?

जवाब: देखो ये दो अलग-अलग हैं. टीएमसी ममता थोड़ा सा है तो एक लेकिन फिर भी पर्सनालिटी में थोड़ा सा डिफरेंस है. टीएमसी मृत्यु द्वार पे है. आप कह सकते हैं. ममता नहीं है. थोड़ा वक्त लगेगा उसमें जो है और फिर खास बात क्या है बंगाल की राजनीति में एक बार जो घर चला गया वो कभी लौट के वापस नहीं आया जो है जनता ने एक बार जैसे रिजेक्ट कर दिया उसको वापस नहीं बुलाया जनता की निगाह से एक बार जो उतर गया वो वापस नहीं आया 1972 के बाद से उसमें एक एक्सेप्शन हुआ था आज तक कोई ऐसा एक्सेप्शन नहीं हुआ कि जनता ने एक बार नकार दिया फिर वो व्यक्ति सत्ता में लौट के आ गया उस फार्मूले से अगर देखें तो फिर कह सकते हैं टीएमसी इज अ हिस्ट्री नाउ सबसे पहले कांग्रेस थी लेफ्ट पार्टीज आई लेफ्ट गई लौट के नहीं आई ममता आई गई इट इज टू बी सीन के कभी लौट के आती है कि नहीं जो हिस्ट्री है वो ये कहती है लौट के नहीं आता है व्यक्ति इंडिविजुअली जिंदा रह जाता है दैट इज़ पार्टी लौट के पावर में आए आज की तारीख में तो नहीं है बाकी जो व्यक्ति हारने वाला होता है उसके मन में बड़ा आत्मविश्वास होता है नहीं मैं लौट के आऊंगा आई विल मेक ए कम बैक तो लेट्स सी ममता इसका एक्सेप्शन कर पाती है कि नहीं कि जहां तक ममता के आने वाले कल का सवाल है इसमें एक दिलचस्प बात यह है कि राजनीति के अलावा ममता को कुछ नहीं आता. एक किताब में भी लिखा है शी नोज़ नथिंग देन पॉलिटिक्स और पॉलिटिक्स में वो सरेआम कहती हैं कि आई कैन डू एनीथिंग. आई कैन फाइट एनीथिंग एंड आई विल बी ऑन ऑन द स्ट्रीट्स. तो बेसिकली क्या वो स्ट्रीट्स फाइटर है. उसका सारा जीवन राजनीति में बीता है. जिसे कहना चाहिए शी हैज़ एक्सपर्टाइज इन पॉलिटिक्स ओनली. तो पॉलिटिकल लाइफ के अलावा उनके सामने कोई दूसरा जीवन दूसरा आकर्षण नहीं है. तो आने वाले दिनों में इस बात के लिए तैयार रहना चाहिए भाजपा सरकार को कि ममता विल ऑलवेज ऑन द सीट्स एंड ऑलवेज ऑन द रोड्स और आप इस बात के लिए तैयार रहिए. छोटा-मोटा आंसू गैस तो अभी नहीं आएगा क्योंकि इतना समर्थन उसको नहीं है लेकिन उसको पकड़ने का, जेल में करने का, जमानत करने का इस मतलब शी विल बी अ रेगुलर इरिटेंट इन फ्रंट ऑफ़ द न्यू गवर्नमेंट. हम बिकॉज़ शी इस बेसिकली अ स्ट्रीट फाइटर. 

सवाल: सर क्या ऐसा हो सकता है कि 2029 में राहुल गांधी की जगह एनडी गठबंधन का नेतृत्व ममता बनर्जी करें या क्या होगा एनडी गठबंधन का भविष्य आने वाले समय में?

जवाब: देखो ममता नेतृत्व करें तभी उनके सामने उन्होंने पहले दिन ही बयान दे दिया कि मैं एंड में हूं. ठीक है? हालांकि एनडी से उनका मुंह भंग हो चुका था. और राहुल गांधी और ममता एक दूसरे को कैसे देखेंगे देखेंगे. पहली बात तो ये है कि राहुल गांधी अब वो उस स्थिति में नहीं रहे कि खुद वो इंडिया का नेतृत्व करें या उनको ऑफर हो. स्टाइलिन हार गए, ममता हार गई इधर से. दैट इज़ और दूसरा क्या है? मैं नहीं समझता कि ममता जो है ना अभी ऐसी कोई स्थिति में है या इंडिया ऐसी स्थिति में है कि ममता को अपना संयोजक अपॉइंट कर ले या उसका नेतृत्व राहुल की जगह उन्हें सौंप दे. और रही बात इसकी इंडी खुद का तो इंडी खुद डीरेड्ड है. इस समय इंडी गठबंधन जो है ऐसा लगता नहीं है इंडी गठबंधन. ये दो तो ये विकेट गिर गए उनके वैसे ही जैसे भी उनके साथ थे जिस तरह से जो है अभी क्या है कि वैसे भी नेतृत्व विहीन स्थिति में इंडिय गठबंधन लोग रह के राहुल गांधी की तरफ देखते हैं और राहुल गांधी क्या है आप सब जानते हैं नो होप एट द मोमेंट जो है इसलिए ना तो कोई इंडि गठबंधन का भविष्य भी दिखाई देता है एट द मोमेंट और क्योंकि उसका गठबंधन नहीं है और ममता पावरलेस है अभी ये पावर में नहीं है तो उनको भी नेतृत्व सौंपने में बहुत दिक्कत है मुझे उसकी उम्मीद फिलहाल अभी कम दिखाई देती है. 

सवाल: सर चुनाव में हार जीत तो चलती रहती है लेकिन ममता की पार्टी की सर इतनी बुरी हार क्यों हुई?

जवाब: इसलिए हुई कि बेसिकली हार के कारण अगर आप देखो तो आप कह सकते हो मिस रूल करप्शन पॉलिटिकल वायलेंस जिसे कहना चाहिए लॉ एंड ऑर्डर और उसके बाद में जो मिसय ऑफ़ पावर है हर लेवल पे उसको आप कह सकते हैं और बुरी हार इसलिए है ना आप देखिए खुद चुनाव हार गई कोई सोच नहीं सकता था कि ममता चुनाव हार सकती है और सामने वाले दो में लड़ रहे लोगों ने भी सोचा होगा चलो एक में जीता लो ममता को एक वहां करेंगे लेकिन आक्रोश इतना था और एंटी एस्टैब्लिशमेंशन फैक्ट इतना जबरदस्त था कि ममता नहीं जीती और अच्छे खासे शायद 15000 वोट से हार गई वो फिर आप देखिए 63% कैबिनेट हार गई 22 मंत्री हार गए केवल 13 जीते 35 में से दैट इज तो इसमें कोई शक नहीं है कि हार बुरी हुई है लेकिन वही बात है ना जो व्यक्ति गिरता है फिर गिरने की सीमा नहीं होती तो ममता उसी का शिकार हुई है. 

सवाल: सर मैंने सुना है कि ममता की हार का बहुत बड़ा का जो कारण है वह लोअर लेवल का ग्रास रूट करप्शन रहा. आम आदमी जिसकी वजह से परेशान हुआ इस पर आप क्या कहेंगे?

जवाब: यह आपका कहना सही है कि ग्रास रूट करप्शन और कभी-कभी ऐसा होता है लीडर को मालूम नहीं पड़ता कि नाक के नीचे क्या हो रहा है. ब्रोडली मालूम होता लेकिन किस लेवल पे ग्रास रूट पे करप्शन चला गया है. छोटी-छोटी बातों में जिसे कहते हैं वो पता नहीं चल पाता कई दफा. वो एक डिफरेंट इशू पता था कि नहीं था. लेकिन ये सच है कि ग्रास रूट करप्शन ऐसा हो गया था. आम आदमी परेशान था. मैं एक शादी में गया. वहां एक आदमी मिला मुझे तो उसने कहा ममता दीदी ये चलींगी तो बहुत अच्छा हो जाएगा. मैंने कहा क्या हुआ अभी? बोले हमारे इलाके में शांति हो जाएगी. मैंने कहा क्या शांति हो जाएगी? बोले मैं मकान का रिपेयर कर रहा था. रंग रोगन कर रहा था. पेंटवेंट कर रहा था. तो टीएमसी का लोकल वर्कर मेरे घर आ गया वो. बोला साहब कितना खर्चा कर रहे हो? मैंने कहा 15 लाख. उन्होंने कहा 10% मैं लूंगा ₹1.5 लाख. तो बोले दिए मैंने. तो इस तरह का जो ग्रास रूट करप्शन था ममता सरकार के पतन में उसका भी योगदान रहा है. वैसे तो क्या होता है नथिंग सक्सीड्स लाइक सक्सेस एंड देयर आर नो रीज़ंस फॉर फेलियर्स. लेकिन क्योंकि हम एक बात कर रहे हैं डिस्कशन में तो उसमें कह सकते हैं कि हां जो ग्रास रूट का करप्शन था ये भी एक पतन का कारण था. 

सवाल: सर क्या इन चुनाव में आपको लगता है कि टीएमसी से बेहतर रहा बीजेपी का महिला कार्ड? 

जवाब: ऑफकोर्स देखो बीजेपी के लोग मास्टरमाइंड लोग हैं. अमित शाह खुद तो है ही उनके नीचे के लोग भी ट्रेंड हो गए हैं. दैट वे जो है टीम ट्रेंड हो गई है. सीधा क्या किया? वहां 1500 मिल रहे थे. 1000 प्लस 500 500 बढ़ा दिए थे दीदी ने अभी फरवरी में. 1500 मिल रहे थे पर मंथ. इन्होंने सीधा कह दिया 3000 देंगे. तो लोगों को भरोसा नहीं हुआ कि 3000 देंगे. एक विश्वास पैदा करने के लिए माहौल पैदा करने के लिए जिसे कहते हैं ना नारा था वहां पे भना विश्वास है ऐसा नारा चला था तो मैसेज ट्रेवल कर गया वहां पे कि ये लोग जबान के धनी है ये कह रहे हैं तो पैसे देंगे फिर 33% वुमेन रेजोलेशन का जो नारा था या जो प्लान है बीजेपी का 29 से पहले कर लेंगे इसको वो उसका जो एक आश्वासन को अट्रैक्शन को जो है उसको जो है उसने काम किया तो कुल मिला के है कि बीजेपी प्लेड देयर वुमेन कार्ड बेटर देन ममता.. 

सवाल: सर 4 मई की शाम को बीजेपी मुख्यालय पर जो विक्ट्री सेलिब्रेशन मनाया गया उसमें प्रधानमंत्री मोदी को जो माला पहनाई गई वो माला उन्होंने खुद ना पहन के नितिन नवीन के गले में डाल दी. इसके क्या मायने हैं?

जवाब: इसके मायने यह है कि उस दिन पहली बार भाजपा के मंदिर में नरेंद्र मोदी ने नितिन की प्राण प्रतिष्ठा करवाई बाकायदा. जी कि भाई इसे सीरियसली लो. यह पार्टी प्रेसिडेंट है. रिपोर्ट्स ऐसी आ रही थी कि सीनियर लीडरशिप उसको ज्यादा सीनियर नहीं मानते. कई ऐसी घटनाएं आई. शिकायत भी हुई. नितिन ने खुद भी शिकायत करी. लोग संबोधित कर रहे हैं कि नितिन करके और नितिन जी हैं. अध्यक्ष हैं. तो इनकी प्राण प्रतिष्ठा हुई. दूसरा क्या हुआ? पूरे कैडर के अंदर जो है ना एक मैसेज चला गया कि ही चॉइस ऑफ़ प्राइम मिनिस्टर. पहले अमित शाह का तो कहते ही हैं. लेकिन फॉर्मली प्राइम मिनिस्टर ने उसको ओन किया एक तरह से. ही इज़ माय चाइल्ड जिसे कहते हैं. सपोर्ट हिम जो है इसका मैसेज था एक तरह से. तो वो तो गदगद होगा. तो यही समझ में नहीं आया होगा नितिन जी को कि हो क्या रहा है मेरे जीवन में ये प्रधानमंत्री पहना रहे हैं. लेकिन लक और डेस्टिनी और वर्कर तो है ही वो और प्रधानमंत्री में सोचा समझ के कि हमें यंग लीडरशिप को आगे लाना है. इसलिए उसकी प्राण प्रतिष्ठा जरूरी है. अगर हमारा यह प्रयोग फेल हो गया तो यंग लीडरशिप आ ही नहीं पाएगी. वहां पे जो है ना एक अच्छा मैसेज था पूरी जो जनरेशन है भाजपा की जिस जनरेशन चेंज की बात हम कहते हैं न्यू जनरेशन उसमें अच्छा मैसेज गया कि यार प्राइम मिनिस्टर इतने यंग आदमी को इस तरह से मान सम्मान दे सकते हैं. चलो आगे बढ़ाओ नारा लगाओ भगवा का. 

सवाल: सर बंगाल चुनाव में पार्टी अध्यक्ष के रूप में आप नितिन नवीन की परफॉर्मेंस को कैसे देखते हैं?

जवाब: अच्छी थी. पहला तो उनका मास्टरमाइंड मूव तो था ही एक कायस्त वहां भेजने का. बहुत लोग हैरान हुए थे कि बंगाल में कायस्त का क्या काम? उस तरह से तो बाद में पता लगा कि वहां जो भद्र लोग पूरी कास्टेंसी मानते हैं उसको. स्वर्ण वर्ग प्लस कायस्थ एक बड़ा वर्ग है. वहां की राजनीति और सांस्कृतिक चेतना अनुसुर का बड़ा रोल है. कम से कम 3% वोट उनके हैं. 40-50 सीटों को लोग इन्फ्लुएंस करते हैं. आज तक का इतिहास ये है बांग्ला का कि वहां का चीफ मिनिस्टर या तो रहा है ब्राह्मण और या रहा है कायस्त. मतलब भद्रोक का व्यक्ति चीफ मिनिस्टर रहा है. चाहे ज्योति बसू हो चाहे कोई दूसरा हो चाहे ममता बनर्जी हो. वही ब्राह्मण है. इस बार इनके जाने के बाद में एक कास्ट फैक्टर तो इंडिया में जो कहीं कहीं कम है, कहीं ज्यादा है. लेकिन है जरूर. उसने बंगाल में काम किया. तो उन लोगों ने मन बनाया कि यार ममता कुछ ज्यादा ही अपीज़मेंट कर रही है. चलो छोड़ो अब चलते हैं इधर. नितिन के कंधे पे हाथ रख दिया उन्होंने. दैट वेयर. तो वो जो भद्र लोग जिसको हम कहते हैं वो पूरा का पूरा काफी हद तक जो इधर आया उसमें एक मेजर कंट्रीब्यूशन जो है ना ये था. नरेंद्र मोदी का चार्म अपनी जगह है. अमित शाह का ग्राउंड वर्क अपनी जगह है. लेकिन एक लिमिटेड स्पेस में जो रोल था इसका उस रोल को इन्ह अच्छे से किया. प्लस दूसरा क्या है कि वो जो कोऑर्डिनेशन है बिटवीन आरएसएस एंड बीजेपी वो इन्होंने बहुत अच्छा किया दैट वे और काफी अच्छा एक इनका जाने आने का और विनम्र भाव जिस तरह से किया तो आप कह सकते हैं और वहां पे क्या है जो प्रवासी हैं बिहार के लोग हैं प्रवासी बहुत से मजदूर हैं वहां पे आसनसोल में दुर्गापुरा सारा उन समय इनका अच्छा इंपैक्ट था तो कुल मिला के क्या है कि एक अच्छा प्रयास था और जो भाजपा ने सोचा था कि बंगाल के चुनाव में रेलेवेंट रहेंगे वो अनुमान जो आकलन था वह सही निकला. 

सवाल: सर प्रधानमंत्री की भावनात्मक अपील कि अगर पश्चिम बंगाल में इसी तरीके से चलता रहा तो हिंदू अल्पसंख्यक हो जाएंगे. कितना कारगर रहा यह हिंदू वोट के कंसोलिडेशन में?

जवाब: यही जीत का सबसे बड़ा कारण था. यह गेम चेंजर था. प्रधानमंत्री की अपील लोगों के दिल में उतर गई और लोगों को भरोसा हो गया कि अगर हमने इस बार मौका खो दिया तो यह जो पश्चिम बंगाल है बांग्लादेश बन जाएगा. पाकिस्तान बन जाएगा. दूसरा मुस्लिम राज्य हो जाएगा. तो इट हेल्प्ड एंड इट इंस्पायर्ड मेजर कंसोलिडेशन ऑफ़ हिंदू फर्सेस. और जीत का सबसे बड़ा कारण भी जो है ना वो यही बना जिसे कहना चाहिए. तो ये जो शुरुआत की थी नरेंद्र मोदी ने जिससे वो आगे जो है ना वो मोमेंटम लेता चला गया और उसका अंतिम परिणाम उसमें जो हिंदू फैक्टर है इसका कैसा इस तरह का इंपैक्ट हुआ कि भाजपा ने क्या किया एज अ स्ट्रेटजी जो है ना 100 वोट है मान लीजिए. उन्होंने कहा 2800 मुस्लिम वोट हैं. छोड़ दो. बाकी रह गए 72. 72 पे फोकस करो. सेलेक्टिव फोकस करो. डोंट वे रिसोर्सेज ऑल द 100 जो है उस 72% में जो है 66% वोट जो है हिंदू वोट जो भाजपा को मिला. दूसरे शब्दों में पहले क्या था?
10 में से छह वोट मिलते थे हिंदू के भाजपा को. अब 10 में से सात वोट मिले और इस एक वोट के अंतर ने भाजपा को 207 सीटों पे पहुंचा दिया. तो ये जो जो शुरुआत की थी नरेंद्र मोदी ने उस अपने भाषण से उस इमोशनल स्पीच से जो है उसका अंतिम परिणाम ये निकला कि हिंदुत्व का जो कार्ड था आप कहिए हिंदू कंसोलिडेशन था वो इतना जबरदस्त हुआ एक्सट्रीम पोलराइजेशन ऑफ़ हिंदू वोट्स जिसे हम कह सकते हैं उसका परिणाम है 207 सीट.. 

सवाल: सर इतिहास में पहली बार पश्चिम बंगाल में भगवा फहराने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की आखिर रणनीति क्या रही जिसमें सबसे पहले अमित शाह का अद्भुत चुनावी प्रबंधन देखने को मिला उस पर मैं आपसे समझना चाहती हूं. 

जवाब: बिल्कुल सही कह रहे हैं आप. सुबह 3:00 बजे तक बैठ के लेना, काम करना वो भी एक अध्ययन का विषय है. अमित शाह भी जो है दैट जो है कितना काम करते हैं. अब देखो राजस्थान के चूरू का चुनाव भी वो लड़ाएंगे. मान लो बैठ के एमएलए का किसी का होगा तो आसाम के अंदर डिब्र चुनाव भी वो लड़ाएंगे. गजब एक आदमी के मल्टी फेस्टेड पर्सनालिटी जिसे कहते हैं मेहनत के अंदर जो है तो उनका प्लानिंग है उनका अद्भुत रोल है जिसे कहा जाए नरेंद्र मोदी का चेहरा और अमित शाह की स्ट्रेटजी और हार्ड वर्क दिस इज द कंबाइन ऑफ दिस सक्सेस ऑफ बांग्ला.. 

सवाल: सर अमित शाह 15 दिन बंगाल में रहे पन्ना प्रमुख स्ट्रेटजी पर काम किया लगभग 44000 मतदान केंद्र थे जिन्हें तीन श्रेणियों में बांटा. 

जवाब: बिल्कुल ठीक कह रहे हैं आप ये 15 दिन में बहुत बड़ी बात है और उन्होंने घोषणा की थी उस समय मैं 15 दिन के लिए बंगाल आ रहा हूं. वो मैसेज तथा टीएमसी के लोगों के लिए मैं हूं वहां पे. मैं फेस करूंगा. आई विल कंफ्रंट विद यू ऑन ग्राउंड वन टू वन. मैं 15 दिन आ रहा हूं. लेकिन उन्होंने समय का उपयोग इस सारी स्ट्रेटजी को बंगाल को समझने में, वहां की भाषा को समझने में, लोगों को समझने में किया. एंड इट वाज़ अ सक्सेस. 

सवाल: सर एसआईआर की स्ट्रेटजी क्या रही?

जवाब: एसआईआर का फैक्टर कितना काम किया? एसआर फैक्टर देखो गुगली है. वैसे तो मैंने कहा आपसे दोनों दल टीएमसी तो यही मानती रहेगी हारने के बाद कि एसआर ने मरवा दिया. एसआर ने हरवा दिया और भाजपा के लोगों में एक इनडायरेक्ट उस तरह का है मन में भाव कि शायद हमें एसआर का कोई लाभ मिला हो. लेकिन अंतर इतना ज्यादा है 80 और दो सात के बीच में कि अब कोई भाव दूसरा काम नहीं करेगा. इलेक्शन फेयर है. लेकिन फिर भी मन का एक भाव तो आता है कि अब चलो हमारे 10 कारण थे जीतने के. तो एक उसमें ऐसा ही आर भी रहा. हालांकि फक्चुअली करेक्ट नहीं है क्योंकि गैप इतना ज्यादा है. हम इट गिव्स यू ओनली मेंटल सेटिस्फेक्शन. 

सवाल: सर पोलराइजेशन ऑफ हिंदू वोट्स.. 

जवाब: उसकी प्रेरणा प्रधानमंत्री स्पीच से मिली. अमित शाह ने बार-बार उसको हैमर किया. उसको बार-बार उसको रिपीट किया उस बात को. भाजपा की पूरी लाइन ने इस बात को रिपीट किया और सारा प्रचारतंत्र इसी बात पे रहा कि यह पोल राइजेशन कर लो. यह आखिरी मौका है. अब पांच साल अगर और आपने टीएमसी को दे दिए तो ये बांग्लादेश बन जाएगा. इट वर्क. 

सवाल: सर राष्ट्रवाद का नैरेटिव और राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा.. 

जवाब: यह जोड़े दोरे उन्होंने उसके अंदर जो है अब राष्ट्रीय सुरक्षा तो राष्ट्रवाद का मुद्दा था घुसपैठियों को बाहर निकालो बांग्लादेशियों को बाहर निकालो इस नारे ने काम किया इस भावना ने काम किया ये जो हिंदुत्व का जो सेंटीमेंट है वो एक पैकेज है उसमें तीनों पॉइंट शामिल है इसके अंदर हिंदुत्व भी शामिल है उसमें जो है राष्ट्रवाद भी शामिल है और राष्ट्रीय सुरक्षा का नाम भी शामिल है इनका पैकेज मिलाके तीनों का पैकेज है व्हिच इज़ इक्वल टू हिंदुत्व कहिए हिंदू कार्ड कहिए हिंदू कंसोलिडेशन जिसको आप कहिए एनी वर्क.. 

सवाल: सर जय श्री राम की जगह मां काली का नारा काबा बनाम मां काली टीएमसी के एक सांसद ने कहा कि मुस्लिम इलाकों में कि मेरे दिल में काबा है मेरी आंखों में है मदीना बड़ा वायरल हुआ था अब इसका जवाब दिया काबा वर्सेस मां काली के मुद्दे को लेकर.. 

जवाब: उस काबा वायरल ने तो मरवा दिया लोगों को सामने मौका मिल गया बीजेपी को उसके मुकाबले में इन्होंने दूसरा वायरल कर दिया और वायरल करने का जो सिस्टम है मैकेनिज्म बीजेपी का बेटर है. उस एमपी के बजाय जिसने एमपी ने किया था. तो जो एक माहौल बना पोलराइजेशन हुआ उसमें इस नारे ने इस ये जो गीत बजा आपका जो भी स्लोगन था ये इसने भी काम किया. इट वर्क इन फेयर ऑफ़ बीजेपी. 

सवाल: सर मतदाताओं के बीच में भय के माहौल को खत्म करना, भरोसे का माहौल पैदा करना क्योंकि ममता दीदी ये भरोसा खो चुकी थी. ये था क्या?

जवाब: बिल्कुल सही है. नारा था भाजपा का भोए ना भरोसा कैंपेन चला भला कि भरोसा करिए. क्यों भरोसा खो चुकी हैं और भय हटाइए. बेसिक बात यह थी ना कि वहां एक बहुत बड़ा फैक्टर यह था कि भय से लोग वोट देने नहीं जाते थे. ऐसा मानना है लोगों का. सोसाइटी से बाहर नहीं निकलते थे. बाहर लोग खड़े होते थे. ताला लगा होता था. कहीं नहीं जाना बैठो और उनके वोट फिर दूसरे लोग डाल देते थे. एक ऐसी थ्योरी एक फिलोसफी चली आ रही है इसके अंदर. और भाजपा ने इसको एनकैश किया कुल मिला के जिसमें अमित शाह की वो धमकी भी काम आई कि घर पे बैठे रहना सड़क पे मत आना. उल्टा लटका दूंगा उस पे. टोटल जो है पैकेज यह है. 

सवाल: सर पहले टीएमसी के गुंडों की सार्वजनिक पिटाई फिर ढाई लाख सिक्योरिटी फर्सेस का डिप्लॉयमेंट आपको लगता है कि इस तरीके से पहले लोगों के मन से डर हटाया और फिर उसके बाद अपना विश्वास जलाया. 

जवाब: यू आर अब्सोलुटली करेक्ट इलाके में मान लो गली का कोई भी गुंडा है वो बड़ी दादागिरी करता है आके पुलिस उसको चौराहे पे ले जाके ठोक दे सबके सामने दादागिरी तो खत्म है ना उसकी और डरना कम हो जाएंगे तो दिस आल्सो व हालांकि उसे मानना पड़ेगा कि अजयपाल शर्मा और दूसरे लोगों ने सेंट्रल फर्सेस जिसने भी किया ये ठुकाई करी या बंगाल पुलिस ने करी बड़ा मर्दा मर्जी काम था इस तरह से घर से निकालना उसको ठोकना चौराहे पे ले जाना और उसकी जिसे कहते हैं ना मुर्गा बना देना वो बना देना कर देना उसका उसका अधिकार खत्म कर देना तो ये सब बातें हुई लेकिन कभी-कभी क्या होता है ना लॉ एंड ऑर्डर में मैसेज देने के लिए हम ये पुलिस का 18वीं शताब्दी का तरीका है आज का नया नहीं है ये तो थोड़ा बहुत वहां भी यूज़ हुआ होगा. 
सवाल: सर इसी संदर्भ में ये सिंघम और पुष्पा का मामला क्या है? 

जवाब: फिल्में लोकप्रिय बना देती है व्यक्तियों को जो है वो अजयपाल शर्मा जो आए हैं वो 2011 बैच के हैं ज्यादा सर्विस नहीं हुई मेरे ख्याल से 15 साल की सर्विस हुई है लेकिन कोई कोई अफसर ऐसे होते हैं जांबाज कफ़न बांध के चलते हैं जिसे कहते हैं कि ये एनकाउंटर स्पेशलिस्ट है तो अमित शाह की निगाह में आ गए होंगे कहीं यूपी में जाते-आते कहीं दिख गए होंगे अच्छा अफसर है भाई इसको लगाओ ये ठीक करेगा लोगों को तो जहांगीर के इलाके में वो सबसे ज्यादा दुर्दांत व्यक्ति माना जाता था टीएमसी में उसको वहां लगा दिया और वायरल कर दिया उसको उस बात को तो लोगों को भरोसा हो गया कि यह है और वो सामने वाला था उसने पलट के कहा उसने कहा कि यूपी नहीं बंगाल है ये जो है और ये लड़ाई फिल्मी स्टाइल में ये लड़ाई तुमने शुरू की खत्म मैं करूंगा इसको फिल्मी डायलॉग तो दोनों पॉपुलर हो गए दैट वे जो है फिर अल्टीमेटली घर से भाग गया वो कहते हैं और फिर चुनाव ही स्थगित हो गया उसी कास्टेंसी का घूम फिर के जो भी हुआ तो उसने कहा कि मैं पुष्पा हूं तुम सिंघम हो तो क्या है ऐसी रोचक लड़ाईयां ग्राउंड की बातें सारी जो है लेकिन कुल मिला के यह है कि मतलब दिल्ली के आशीर्वाद से कहो या अमित शाह की सपोर्ट से जो है जो पुलिस अफसर थे उनका खोया हुआ आत्मविश्वास पॉलिटिशियन के सामने जो विश्वास खत्म हो जाता है वो रिवाइव हुआ और पुलिस अफसर ने अपनी ताकत अपनी शक्तियों को पहचाना और सरेआम जो है एंटी सोशल एलिमेंट्स को हैंडल करने के लिए अपने अधिकारों का उपयोग किया अजयपाल शर्मा उन्होंने इतना अच्छा काम किया और केंद्र को इतना अच्छा लगा उनकी परफॉर्मेंस जो है तो ऐसा मैंने सुना है कि उन्हें 5 साल के लिए बंगाल कैडर प्रतिनियुक्ति पे डेपुटेशन भी भेजा जा सकता है. तो लेट्स सी इट मे बी अ गुड एक्सपेरिमेंट. 

सवाल: सर एक और फैक्टर रहा कि लोग बिना किसी डर के इस बार वोट देने के लिए निकले. 

जवाब: सच है ये सब बातों का जो टोटल आउटकम क्या था वो यही तो था ना भरोसा हो गया लोगों को. भय कम हुआ तो लोग चले गए. ऐसा माना जाता है कि लोग गए इसी तरह से. 

सवाल: सर एक और इंपॉर्टेंट फैक्टर जो इस स्ट्रेटजी में नजर आया वो एक तो आरएसएस के रोल को लेकर और 1 लाख 75,000 बैठ के कैसे देखते हैं? 

जवाब: जबरदस्त है. आरएसएस का रोल हर बार होता है. लेकिन इस बार आरएसएस का रोल प्लस नरेंद्र मोदी का चेहरा प्लस अमित शाह का ग्राउंड वर्क ये तीनों मिलके एक जबरदस्त कॉम्बिनेशन वहां पे बना. 3000 शाखाएं हैं बंगाल के अंदर. हर शाखा पे काम हुआ. मैंने सुना कि आरएसएस के वर्कर्स ने बीजेपी के वर्कर्स ने जो है 1,75,000 मोहल्ला बैठकें करी और उनका परिणाम किया. तो आरएसएस तो ग्रास रूट पे है ही देखिए. आप उसको माने नहीं माने. तो अब की बार क्या हुआ कि आरएसएस टोटली एक्सटेंडेड देर सपोर्ट टू बीजेपी. कभी-कभी ऐसा होता था कि आरएसएस सपोर्ट कर रहा है कि नहीं कर रहा है. इस बार होल हार्टेडली आरएसएस सपोर्टेड बीजेपी इसलिए मैंने कहा ये एक पैकेज बना है इस तरह का नरेंद्र मोदी अमित शाह एंड आरएसएस लीडरशिप आप मोहन भागवत कह सकते हैं दैट एट द टॉप लेवल जो है इट हैज़ गिवेन ह डिविडेंड्स. 

सवाल: सर भूपेंद्र यादव सहित उत्तर भारत से गए किसी भी नेता को चुनाव प्रचार या प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की इजाजत नहीं थी. इसे आप कैसे देखते हैं और क्या वजह थी इसके पीछे की. 

जवाब: ये स्ट्रेटजी थी पिछली बार कैलाश वर्ग गए थे वहां पे कुछ लोगों ने कहा साहब हिंदी बोलने वाले की जगह बंगाली बोलने वाला होना चाहिए और बंगाली बोलने वाले हां आउटसाइड बंगाल तो है नहीं लोग इस तरह के तो ये कहा गया कि ये लोग जाएंगे लेकिन ये वहां जाके अपना हिंदी चेहरा नहीं दिखाएंगे एक तरह से जो है इसलिए इनसे कहा गया कि नो प्रेस कॉन्फ्रेंस नो भाषण कमरे में रहिए स्ट्रेटजी बनाइए फील्ड में जाइए वन टू वन किसी आदमी से मिलिए तो ग्रीवेंसेस है वो देखिए कोऑर्डिनेशन का काम करिए वहां जाके आरएसएस और बीजेपी की मशीनरी ठीक से काम कर इसको देखिए जाकर भाषण नहीं देना प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करना और यह निर्देश इसलिए चलते हैं कि पार्टी है यहां हाई कमांड है उसकी चलती है तो एक बार अमित शाह ने कह दिया नहीं करना फिर नहीं करना है और जो मीडिया का शौक होता है कई लोगों को किसी नेता ने कोई मीडिया से कोई भाषण नहीं दिया कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करी कोई भाषण जाके पब्लिक के बीच में नहीं दिया वहां जा के एंड दे कंप्लाइट विद और उनका ऐसा ही बीजेपी के स्ट्रेटजी से ये चाहते थे कि ये मैसेज बिल्कुल नहीं जाए कि हिंदी वाले लोग आगे डोमिनेट कर रहे हो वो किया.

सवाल: सर क्या इसी कड़ी में था कि बंगाल में पूरे चुनाव प्रचार के दौरान जितने भी बैनर पोस्टर्स लगे या होर्डिंग्स लगे वह सब कुछ बंगाली भाषा में थे तो इसके पीछे की रणनीति क्या थी और क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कोई बंगाली भाषा में भाषण दिया था. 

जवाब: नीति बिल्कुल सही थी जैसे मैंने आपसे कहा ना कि हिंदी का प्रभुत तो नहीं दिखे बांग्ला के अंदर वहां पे पिछले साल जो पिछले चुनाव में जो छपे थे वो हिंदी भी था ट्रांसलेशन और बांग्ला भी था इस बार कहा नो ओनली बांग्ला विल वर्क और बांग्ला किया उन्होंने रही बात प्रधानमंत्री जी की तो प्रधानमंत्री अपना भाषण देते थे तो आजकल कई सभाओं में देखा मैंने कि पहला सेंटेंस है ना बांग्ला का बोलते थे उसके अंदर एक लोकल कनेक्ट करने के लिए दैट वेयर अब आप देखिए इस बार जो है ना कि जो व्यक्ति बंगाली हिंदी वाले किसी व्यक्ति को भाषण जो करने का मौका नहीं दिया तो उसमें एक अपवाद हुआ उसके अंदर जो है ना यह मौका अपवाद हुआ एक तो खुद प्रधानमंत्री जी का अपवाद था दूसरा अमित शाह अपवाद है तीसरा नितिन का अपवाद है और इक्कादुक्का कोई और कोई लोग गए होंगे करने के लिए और बाकी देखिए वहां स्मृति ईरानी पहुंची वहां पे तो लोगों ने कहा कि यह क्यों आई तो फिर पता लगा उन्होंने बहुत फ्लुएंटली बंगाली में भाषण दिया. लोग हैरान हुए तब पता लगा उनके मैटरनिटी साइड जो है बंगाल से थी तो गई है ऑल इन वन. तो उनका भी वहां पे जो एक्सेप्शन था बंगाली में भाषण देने का उन्होंने किया और वो काफी इंप्रेसिव था. 

सवाल: सर साकी इस स्ट्रेटजी में ममता बनर्जी की 15 साल के एंटी इनकंबेंसी फैक्टर का रोल आप कैसे देखते हैं?

जवाब: इंपॉर्टेंट है. बिल्कुल था. वही मैंने आपसे कहा ना मिस रूल और पॉलिटिकल मर्डर ये सारा वही मतलब एंटी फैक्टर वो था उसको आप किसी भी तरह से कर लीजिए सो मेनी फैक्टर्स जो है लेकिन ये था बिल्कुल एंटीशन फैक्टर था बिल्कुल जैसे आसाम में था तो प्रो एस्टैब्लिशमेंट फैक्टर था यहां पे एंटी था एंटी होने के वही कारण से सारे मिस रूल है आपका पॉलिटिकल मर्डर्स हैं करप्शन है ग्रास रूट करप्शन है और दूसरी कारवया है ये सब बातें. 

सवाल: इसके साथ सर एक और स्ट्रेटजी दिखी कि सभी विधानसभा क्षेत्रों में सारे सारे साधन, सारी मशीनरी फूंक देने की बजाय 70% सिलेक्टेड एरियाज में फोकस करते हुए 100% का रिजल्ट अचीव कर लेना. 

जवाब: बिल्कुल किया उन्होंने. एंड दिस एक्सपेरिमेंट वाज़ अ सक्सेस. नो डाउट अबाउट इट. 

सवाल: सर इसके साथ ही पश्चिम बंगाल की चुनावी जीत की स्ट्रेटजी में राजस्थान बीजेपी का कितना इंपॉर्टेंट रोल रहा?

जवाब: राजस्थान बीजेपी सेंट्रल स्टेज पे थी. एक तरह से देखा है. पहली बात तो ये कि भूपेंद्र यादव जो प्रभारी थे वो राजस्थान के हैं. फिर सुनील बंसल बड़े इंपॉर्टेंट लीडर हैं. वो हैं. फिर चीफ मिनिस्टर खुद गए. फिर राजेंद्र राठौड़ गए. सीनियर लीडर हैं वहां पे. उधर से दिल्ली से देखें तो धर्मेंद्र प्रधान भी गए. अब इधर से देखें तो गजेंद्र सिंह शेखावत गए. 28 कांसी का जिम्मा था. 26 में जीत गए. जो है कैलाश चौधरी गए. उनका भी कुछ ऐसे था. बड़ा हाई रहा. सक्सेस रेट. 27 था तो 26 जीत गए. समथिंग इस तरह से अर्जुन मेघवाल गए. तो सारे के सारे राजस्थान से कुल 51 नेता वहां पे गए एक तरह से और यह खास रहा वहां पे कि पन्ना प्रमुख का काफी रोल रहा वहां पे राजस्थान के लीडर्स थे अशोक पणामी भी थे अरुण छत्र भी थे पन्ना प्रमुख योजना जो है इसमें 800 900 वहां पे लोग इसमें इन्वॉल्व थे वहां पे और पन्ना प्रमुख ने भी राजस्थान के नेताओं के साथ-साथ वहां जो है अच्छा काम किया चीफ मिनिस्टर खासकर जिन इलाकों में गए मारवाड़ी वोट काफी थे वहां पे और सबका काम पड़ता है सरकार में जो हैक से जयपुर आते हैं तो चीफ मिनिस्टर जहां-जहां गए वहां की सक्सेस रेट भी काफी अच्छी थी. 

सवाल: सर लास्ट बट नॉट द लीस्ट ममता बनर्जी के खतरनाक मछली नैरेटिव का जवाब बीजेपी ने कैसे दिया?

जवाब: दे दिया बीच में फंस गए थे एक बार तो लेकिन फिर होशियारी से निकल गए उसके अंदर से जनता ने निकाल दिया. एक्चुअली क्या है कि हिंदू कंसोलिडेशन इतना जबरदस्त था कि मछली मछली सब पीछे रह गए थोड़ा सा. लेकिन फिर बीजेपी ने स्मार्टली हैंडल किया. हैंडल कैसे किया? फिर अगले दिन से क्या प्रचार में जब लोग गए तो मोटी मोटी मछलियां 5 किलो की मछलियां टोकरी में रख के साथ ले गए प्रचार करने. लोगों के घर में मछली बांटने में लगे 200 ग्राम की 400 ग्राम की काली मछली पीली मछली छोटी मछली मैं देखता हूंक में जो है तो सारी वो बांटने लग गए और अभी फिर क्या हुआ उसी समय फिर किसी ने ये कह दिया वहां पे जो है कि हमारा जो अगला मुख्यमंत्री होगा वो नॉन वेजिटेरियन होगा. करने की कोशिश की. फिर अनुराग ठाकुर को भेजा. वो तो ठाकुर हैं. राजपूत हैं. उनको देखा अच्छा अवसर था बढ़िया मछली खाने का जो है तो गए वहां पे सबके साए मछली खाई. उसका वीडियो बनाया उसको वायरल किया जो है और एक भरोसा कर लोगों को हां यार बीजेपी के लोग भी मछली खाते हैं. और वो असम के चीफ मिनिस्टर आए. उन्होंने कहा मैं ममता से ज्यादा मछली खा सकता हूं. मांस खा सकता हूं. ये खा सकता हूं. तो कुल मिला के सब बातें चली. वायरल हुआ क्या सारा जो है लेकिन यह क्या हुआ कि बाद में नरेंद्र मोदी की सभाओं से और इससे जो है ना हिंदू कंसोलिडेशन इतना ज्यादा हो गया कि मछली वछली सब पीछे रह गए बट बीजेपी स्मार्टली हैंडल दिस फैक्टर व्हिच कुड हैव प्रूव्ड वैरी डेंजरस.. 

सवाल: सर मैंने सुना है कि बंगाल में मानवीय आधार पर बीजेपी वालों ने जो गरीब लोगों की मदद की उससे सर कहीं ना कहीं बीजेपी के पक्ष में एक अच्छा माहौल बना तो कोई ऐसा किस्सा आप बता सकते हैं? 

जवाब: हां मैंने पढ़ा एक जगह एक बीजेपी लीडर जो है बंगाल में अपने घूमते हुए प्रचार के दौरान मैन टू मैन कनेक्ट वो पहुंचा एक घर के अंदर जो है वहां दो स्त्रियां थी एक सास थी एक बहू थी सास मिलने आई पहले हां भाई कैसे क्या काम है तो एक साड़ी पहन के आई चली गई उस व्यक्ति ने कहा दूसरा कौन है वो घर में उनका कहा बहू है तो मिलवाओ तो अंदर गई बहू आई 10 मिनट बाद वही धोती पहन के वो बहू आ गई तो देखकर तो बहुत हैरान हुआ कि इस घर में कुल एक ही साड़ी या वो धोती है तो मालूम पड़ा कि दो है लेकिन एक वो धुलने गई है खराब हो गई है तो इसलिए एक ही काम में आ रही है दैट वे जो है व्यक्ति बड़ा चिंतित हुआ उसने जेब में हाथ डाला जितने पैसे थे कुछ निकाल के वहां दिए और आके अमित शाह को रिपोर्ट किया कि साहब आज मेरे साथ ये हुआ मैंने ये देखा हमेशा भावुक व्यक्ति है तो कहा नहीं ऐसे लोगों की लिस्ट बनाओ चुनाव और नौ चुनाव हमें थोड़ी इनकी मदद करनी चाहिए लिस्ट बनी और फिर ऐसे कुछ लोगों को मदद हुआ. तो भाजपा का यह जो सेंटीमेंट है ना ह्यूमन ओरिएंटेड यह बहुत डीप रूटेड काम करता है. 

सवाल: सर बीजेपी ने घरों में जाकर बर्तन माजने वाली एक महिला को जिताकर जो वुमेन एंपावरमेंट का संदेश दिया है उसको आप कैसे देखते हैं?

जवाब: अच्छा प्रयास है. देखिए उसी दिशा में वुमेन को गरीब को आगे बढ़ाने का प्रयास है. एक औरत थी वहां पे 2021 में उसको चुनाव लड़ाया वो और घरों में बर्तन मारने जाती थी. ₹2500 कुल मिलते थे. परिवार को पालती थी. भाजपा ने कहा नहीं इसको आगे लाएंगे. बेचारी हार गई फर्स्ट बार. अब कहा नहीं इसको फिर आगे लाएंगे. इस बार जीत गई वहां पे जो है अभी भी जाती है बर्तन मांगने करने. सत्ता का नशा उस पे सवार नहीं हुआ. इस तरह से दैट वे जो है तो एक अच्छा मैसेज जाता है इन सारी घटनाओं से. आप देखिए वो रेप विक्टिम थी. उसकी मदद को टिकट दिया. वो जीती. अच्छा मैसेज गया. तो हिमिटेरियन अप्रोच जो पहले आरएसएस की हुआ करती थी वो अब क्या है? बीजेपी ने भी उसको एक्वायर कर लिया. के साथ-साथ तो नाउ इट्स अ डेडली कॉम्बिनेशन ह्यूमन अप्रोच इंजीनियर्ड बाय बीजेपी एंड आरएसएस.. 

सवाल: सर साल 2016 से लेकर 2026 ये पूरा एक दशक आप बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के राइज को कैसे देखते हैं? 

जवाब: राइज एंड राइज अनप्रेसिडेंटेड राइज 2016 में तीन सीट 2021 में 77 सीट 2026 में 207 सीट इमेजिन संसार के किसी पॉलिटिकल पार्टी का शायद ऐसा राइज़ नहीं देखने को मिला होगा. गजब. द एंटायर क्रेडिट गोज़ अगेन टू द लीडरशिप ऑफ़ मोदी एंड द स्ट्रेटजी ऑफ़ अमित शाह एंड ऑल अदर पीपल एंड ऑफ कोर्स जेपी नड्डा जो इतने साल तक अध्यक्ष रहे. इसमें से उनका कंट्रीब्यूशन रहा. अभी क्योंकि आज वो नहीं है. आज वो क्या है कि इनफॉर्मल हैं. और पिछले दिनों भी मैंने कहा था आपसे कि नए अध्यक्ष को कहा गया है कुछ समय तक उनके मार्गदर्शन में उनके सलाह मशरे से ही काम करें. दैट वे जो है लेकिन जेपी नड्डा भी एक एक सॉल्वर्ट हैं. इस सारे प्रोसेस के अंदर जो है यह जो आया है तीन से बढ़के पिछले 10 सालों में छ साल का कार्यकाल तो उन्हीं का था. जो है ही आल्सो डिर्व्स अ वोट ऑफ एप्रिसिएशन बाय द बीजेपी लीडरशिप. 

सवाल: सर बीजेपी के द्वारा चुनाव से पहले 80,000 फुटबॉल और 5,000 बैट खिलाड़ियों के बीच में उपलब्ध करवाना सर इस पीियर एक्सरसाइज को आप कैसे देखते हैं?

जवाब: एक्सरसाइज है. मास्टरमाइंड एक्सरसाइज है. ग्रास रूट में कैसे पहुंचा जाता है धीरे-धीरे उसका एक यह प्रयास है. वहां पे टूर्नामेंट हुआ नरेंद्र मोदी कप टूर्नामेंट उसमें सब लोग जुड़े तो नाम तो आता है ना और ऐसे इलाके में जाएंगे तो पहली बार नाम तो सुनेंगे भाजपा कोई पार्टी है नॉर्थ ईस्ट में इधर-उधर यहां और ऐसे धीरे-धीरे आदमी इन रोड्स बनाता है ना अपनी इट वाज़ एन अनदर इफेक्टिव पीआर एक्सरसाइज. 

सवाल: सर एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान 34 लाख मतदाताओं की अपील की सुनवाई ट्रिब्यूनल के सामने है. इसके परिणाम स्वरूप वो लोग वोट नहीं दे पाए. इस पर आप क्या कहेंगे?

जवाब: देखो यह तो अनफॉर्चूनेट तो है ही. गलती किसी की रही हो, आयोग की रही हो, ब्यूरोक्रेसी की रही हो, ममता की एडमिनिस्ट्रेशन की रही हो, एट द एंड ऑफ द डे जो है 34 लाख लोग - 139 वो बाद में अलऊ हो गए थे एट द 11थ आवर जो है एज अ सप्लीमेंट्री लिस्ट बाय सुप्रीम कोर्ट. तो आप देखिए इतनी बड़ी संख्या में लोग वोट देने से वंचित रह गए हैं. दिस इज़ अनफॉर्चूनेट. इट्स अ लेसन फॉर द कमिंग टाइम्स. और अभी ये मामला खत्म नहीं हुआ है. अब आया जाए कोर्ट कचहरी में लोग फिर जाएंगे लेकर. यह जो 34 लाख लोग हैं, यह 34 में से 139 निकाल दो. 139 अपील में गए और अपना जस्टिस लेके वहां से आगे क्या वोट दे सकते हैं? अब यह लोग कैसे चुनाव तो हो चुके हैं. अब क्या होगा? इट इज़ वेरी डिफिकल्ट क्वेश्चन बिफोर द कोर्ट्स आल्सो. तो लेट्स सी व्हाट फाइनली कम्स आउट इन दिस एरिया. बट इट वाज़ रियली अनफॉर्चूनेट इतनी बड़ी संख्या में लोग वोट देने से वंचित रह गए. गलती चाहे किसी की भी रही हो.

सवाल: सर, एक बात बताइए कि ट्रिब्यूनल के अधीन जो 34 लाख जिनका जिक्र अभी आप कर भी रहे थे. तो ऐसे लोगों में एक भाग्यशाली व्यक्ति कौन था जिसकी ऐन मौके पर अपील मंजूर हुई और वह विधायक भी बन गया. 

जवाब: एक फरक्का सीट से मोहताब शेख नाम का व्यक्ति बताया गया है जिसकी फरक्का विधानसभा सीट जो है उसे चुनाव लड़ा उसका नाम कट गया था चुनाव से पहले तो वो लकी था और किसी ने एडवाइस किया होगा तो वो चला गया सुप्रीम कोर्ट में उसकी तकदीर थी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी इंडिविजुअल केस की दैट वे जो है और सुप्रीम कोर्ट ने फिर डायरेक्शन दिया कि भ वोटिंग से दो दिन पहले तक अगर ट्रिब्यूनल क्लियर कर देता तो हम उसको वोट देने का अधिकार देंगे. लकी था इसका क्लियर हो गया. क्लियर हो गया तो वोट तो डाला सो डाला. एमएलए और बन गया वहां पे उसी सीट से. लक डेस्टिनी कोई सोच नहीं सकता. तो एसआईआर का जो वरदान बना सिस्टम में वो ये व्यक्ति बना जो है.. 

सवाल: सर मैंने एक अखबार में पढ़ा कि चुनाव ड्यूटी के दौरान जिन लोगों की ड्यूटी लगी हुई थी उनका नाम भी एसआईआर में कट गया. यह कैसी विडंबना है? 

जवाब: यह तो रियल अनफॉर्चूनेट है जिसे कहना चाहिए इट्स अनबिकमिंग ऑफ अ सिस्टम लेकिन अब चुनाव आयोग के लोग यही कहेंगे कि भाई इनमें से हम जब घर गए थे इनके तो कोई एब्सेंट होगा कोई शिफ्ट कर गया होगा कोई कहीं और गया होगा मौके पे हमको नहीं मिला ये ये कहने की बात है दैट विल है लेकिन गलत है देखो जो गलत है सो गलत है जो लोग चुनाव की ड्यूटी कर रहे हैं बैठ के उनको वोट का क्लीयरेंस नहीं है तो ऐसी आशा की जानी चाहिए कि ऐसी गलतियां ऐसी मिस्टेक्स ऐसे लेप्सिस भविष्य में चुनाव आयोग नहीं होने देगा. ऐसा माना जाना चाहिए. ऐसी आशा की जानी चाहिए. 

सवाल: सर क्या आप इस आकलन से सहमत है कि एसआईआर के इस पूरे प्रोसेस में अगर नुकसान हुआ तो टीएमसी का हुआ. दूसरा ये छापा वोटर्स का इशू क्या है? हाउ वुड यू लाइक टू कंक्लूड दिस एंटायर इशू?

जवाब: टीएमसी का मानना यह है कि उसे नुकसान हुआ है. चाहे वो छापा वोट के कारण हुआ हो. एक तरह से टोटल सिचुएशन इसमें ये ऐसे हरकी जो है कि टोटल 91 लाख 90 लाख 83,000 वोट कटे. 91 मान लेते हैं हम काउंटिंग के हिसाब से. ठीक है? उसमें 58 लाख वोट थे जो कटे तो अपील में कोई व्यक्ति आया नहीं. तो जो तीन कैटेगरीज़ हैं कि शिफ्ट हो गए, मृत्यु हो गई, डुप्लीकेट थे, लोग सामने नहीं आए. जो भी कारण था 58 लाख लोग जो है ना पहले चरण में कट गए. वापस नहीं आया कोई अपील करने. फिर उसके बाद में 5 लाख और कट गए. कोई अपील करने नहीं आया. 63 लाख लोग कट गए इसके अंदर. बाकी रह गए 37 लाख. अब उनका कहना यह है टीएमसी का कि यह जो 63 लाख लोग जो कटे हैं यह हमारे वोट थे. इनको अनड्यूली काट दिया गया है. इसलिए भाजपा वालों का कहना यह है कि नो यह छापा वोट थे. यह वो वोट थे जो आदमी कोई वोट डालने आता ही नहीं था. टीएमसी के लोग ही ठप्पा लगा देते थे दोपहर को पोलिंग बूथ में बैठ के. भाजपा का कहना यह है कि 63 लाख जो छापा वोट थे यह कट गए. एक तरह से जो है तो इसके कारण से टीएमसी वाले चिल्ला रहे हैं या विरोध कर रहे हैं दैट वे और टीएमसी वाले मन में जानते हैं कि भाई ये 63 लाख लोग थे चलो आधे तो होंगे हमारे या 25 लाख होंगे 30 लाख होंगे तो टोटल जो गैप है दोनों पार्टियों के बीच में जीत हार का वो 32 लाख का है. तो टीएमसी की थ्योरी ये है कि अगर ये 63 लाख वोट नहीं कटे होते तो आधे भी हमें मिलते तो हम चुनाव जीत जाते. एक तो ये इसका अब सवाल रह गया बाकी 34 का मैंने बताया आपसे. अब 34 में क्या है?

इनिशियली तो 27 थे. बाद में यह जो 63 लोग थे 7 लाख इसमें से भी वापस अपील में चले गए. तो आज की तारीख में क्या है कि 63 लाख वोट कट गए. एक वो अपनी जगह है. इस 63 में से 7 लाख लोग वापस अपील में आ गए. तो 27 7 = 34 लाख लोग आज अपील में खड़े हुए हैं. -139 जिसको रिलीफ मिल गया वहां पे जो है. दैट वे जो है अब इनका क्या होगा? 34 लाख -139 का जितना भी है यह इनका क्या होगा आगे लोकतंत्र में यह तो हुआ है ना कि यह वोट देने से वंचित रह गए तो ये कोर्ट कचहरी जाएंगे कोर्ट क्या व्यू लेगा ये अपील में जाएंगे कि नहीं जाएंगे दिस इज टू बी सीन लेकिन इशू कॉम्प्लिकेटेड है और इन लोगों की बात अपनी जगह खड़ी हुई है के ये जो 34 लाख लोग हैं इनका नेक्स्ट स्टेप अब क्या होगा कि नहीं होगा.. 

सवाल: सर सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों ये कहा था कि बंगाल चुनाव में जिन सीटों पर हार-जीत का अंतर एसआईआर में कटे वोटों से कम होगा. उन पर सुप्रीम कोर्ट हस्तक्षेप करेगा. अभी इस श्रेणी में आई है 47 सीट्स. तो अब क्या करेगा सुप्रीम कोर्ट?

जवाब: नेचुरली कहा था उन्होंने पर इस बार क्या है ट्रेजडी को या कोइंसिडेंस को कि 26 सीटें बीजेपी की है तो 21 सीटें टीएमसी की भी हैं. तो अगर ये सारा मामला रीओपन होता है तो दोनों को नुकसान हो सकता है उसमें. तो कोई बड़ी बात नहीं कि दोनों पार्टियां जाए नहीं सुप्रीम कोर्ट में उस डायरेक्शन के कवर में या उस डायरेक्शन के आड़ में. अगर उल्टा होता मान लो अगर बीजेपी की सारी होती ये तो टीएमसी वाले चले जाते वहां पे जो है अब क्या छह सीट का पांच सीट का अंतर है 26 और 21 का तो पांच सीट के लिए मुझे नहीं लगता कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा जाके और फिर कोर्ट भी उसको उतनी तवज्जो देगा तो आई थिंक दिस विश ओवर नाउ.. 

सवाल: सर आखिर कब तक खत्म होगी एसआईआर की ये पूरी प्रक्रिया पूरी? 

जवाब: देखो 10 प्लस तीन 10 राज्य और तीन केंद्र शासित प्रदेश इनमें हो चुकी है टोटल 99 करोड़ वोटर हैं. 60 करोड़ इसमें कवर हो चुके हैं. अब बाकी जो बचे हैं इसके अंदर जो है वो 17 राज्य हैं और कुछ पांच एक केंद्र शासित प्रदेश बचे हैं इस एक्सरसाइज में आने के लिए उनका भी हो जाएगा. कुल मिला के अभी तक यहां 6 करोड़ वोट कट चुके हैं. अभी तक जो है 2 करोड़ अकेले यूपी में कटे हैं. 91 बांग्ला में कटे थे. तो एक्सरसाइज होने वाली है कंप्लीट. मेरे ख्याल से छ आठ महीने में मैक्सिमम इन अ ईयर. आई थिंक इट शुड बी ओवर.

सवाल: सर इलेक्शन स्वीप करने के बाद अब क्या-क्या चुनौतियां होंगी भाजपा सरकार के सामने पश्चिम बंगाल में?

जवाब: बड़ी चुनौतियां हैं. देखिए हर नई सरकार के सामने होती हैं. सबसे बड़ी चुनौती तो ये होती है कि वी एक्सपेक्टेशंस आर द ट्रेजडी ऑफ़ लाइफ. प्रॉमिससेस आर द ट्रेजडी ऑफ़ लाइफ. जो चुनाव आदमी प्रॉमिस करता है उसको पूरा करना पड़ता है. तो सबसे पहली चुनौती थी इसमें यह है कि टू मेंटेन लॉ एंड ऑर्डर टू क्रिएट कॉन्फिडेंस इन द माइंड ऑफ़ द कॉमन मैन के यू आर सेफ. द स्टेट इज सेफ. कल जो गोलीकांड हो गया तो उससे इस कॉन्फिडेंस को धक्का लगा एक बार वापस नए सिरे से. तो पहली प्रायोरिटी पहला चैलेंज स्टेट का यह टू मेंटेन ए प्रॉपर एंड फुल प्रूफ लॉ एंड ऑर्डर ऑनक रोड्स एंड ऑल वेस्ट बंगाल रोड्स एंड स्टेट्स. पहली बात तो उसमें ये आ गई. उसमें जो है दूसरा फिर उसमें है कि आपने ₹3000 पर महिला को देने का कहा है चुनाव में कहते हैं. ₹72,000 करोड़ हर साल के चाहिए. आपको बजट करना पड़ेगा इसके लिए. फिर कहा गया था अमित शाह ने कहा था 45 दिन के अंदर सातवां वेतन आयोग कर्मचारियों को जो है उसका साल का खर्चा है ₹00 करोड़ ₹100 करोड़ डीए के अलग पेंडिंग पड़े हुए हैं तो ₹00 करोड़ आपको उसमें चाहिए दैट वे जो है फिर कहा था कि भ यह घुसपैठिए बाहर निकालेंगे तो मैकेनिज्म बनाना पड़ेगा घुसपैठिए बाहर निकालने पड़ेंगे सारे वेस्ट बंगाल से लंबा प्रोसेस है प्रोसेस तो चालू करना पड़ेगा और फिर डेवलपमेंट के चैलेंजेस डेवलपमेंट की बातें हैं तो इस तरह से हैं ये सारा जो है.. 

सवाल: सर क्या बंगाल के ऐतिहासिक परिणाम नामों का 2027 में उत्तर प्रदेश सहित छह राज्यों में आने वाले नतीजों पर भी इसका असर पड़ता हुआ नजर आएगा और साथ ही 2029 के लोकसभा चुनावों पर इसका क्या असर होगा?

जवाब: सात पे तो असर है ही 2027 में और शायद छह सात राज्यों के और चुनाव हैं 2028 में राजस्थान मध्य प्रदेश के इनको मिलाकर के तो दिस रिजल्ट विल बी अ मोराल बूस्टर फॉर एवरीबॉडी और 2029 का तो किसी को चाहिए नरेंद्र मोदी हैं उनके पास में तो जैसे फिल्म में डायलॉग था ना कि मेरे पास मां है हम भाजपा के पास क्या नरेंद्र मोदी है टॉपिक एंड्स चाहे 29 हो चाहे 34 जब तक फिट है वैसे ही लड़ते रहेंगे ऐसे ही जीतते रहेंगे दैट विल बट दिस इलेक्शन रिजल्ट विल बी अ मोरल बूस्टर दिस कैन बी सेट.. 

सवाल: सर राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में नई सरकार के आने के बाद ममता सरकार में हुए भ्रष्टाचार सिंडिकेट की अवैध वसूली हो या फिर महिला बलात्कार जैसे जो मामले थे उनकी पुरानी फाइलों को खोलकर फिर से सीबीआई ईडी या पुलिस में एफआईआर हो सकती है. 

जवाब: निश्चित तौर पे अपार्ट फ्रॉम इंडिविजुअल केसेस, इंडिविजुअल एफआईआर आई थिंक देयर विल बी अ प्रॉपर इंक्वायरी कमीशन जिसे कहते हैं. एंड दैट मे बी अनाउंस इन अ कपल ऑफ़ डज़. इट लुक्स लाइक दैट. 

सवाल: सर, बंगाल चुनाव की इस पूरी कहानी में आप चुनाव आयोग की भूमिका का मूल्यांकन कैसे करेंगे?

जवाब: देखो इन द रियल सेंस जिसे कहना चाहिए दे हैव डन ए गुड जॉब. इन द एंटायर डेमोक्रेटिक प्रोसेस. इलेक्शन कमिशन एमर्ज एस द विनर बाय प्रोवाइडिंग प्रोएक्टिव लॉजिस्टिक सपोर्ट टू द एंटायर मशीनरी एंड ए वर्ड ऑफ एप्रिसिएशन फॉर द करज एंड कन्वक्शन पार्ट ऑफ ऑल पॉलिटिकल असोल्ट्स ऑन देम पॉलिटिकल अटैक्स ऑन देम अब वो दूसरा पक्ष क्या कह रहा है वो कह रहा है चुनाव आयोग सरकार का मोहरा है वो अपनी जगह है लेकिन जहां तक चुनाव आयोग की परफॉर्मेंस का सवाल है एडमिनिस्ट्रेटिव परफॉर्मेंस का जब जो सवाल है इट वास सुपर एंड आई थिंक ऑन द नेक्स्ट 26 जन रिपब्लिक डे चीफ इलेक्शन कमिश्नर मे बी रिवार्डेड विद पद्म भूषण और समथिंग ऐसा लगता है. 

सवाल: सर आपको लगता है जो पिछले दिनों खासतौर पे 16 17 18 तारीख को अप्रैल को जो हुआ महिला आरक्षण बिल के अंदर जो संशोधन लाया गया और वो पारित नहीं हो पाया तो नरेंद्र मोदी ने विपक्ष को इसका जिम्मेदार ठहराया. इसका कोई लाभ भारतीय जनता पार्टी को इन चुनाव में मिला है? 

जवाब: बिल्कुल मिला है. हिडन लाभ मिला. मैंने कहा ना बंगाल में तो अकेला हिंदुत्व ऐसा था. पोलराइजेशन यह सब साइड फैक्टर थे. लेकिन था फैक्टर ये खुद नरेंद्र मोदी ने कहा है कि देखा यह चुनाव परिणाम से बात स्पष्ट है कि अपोजिशन को वुमेन फोर्स ने पनिश कर दिया है. सो दिस इज ऑल. तो माना जाना चाहिए कि इसका इंपैक्ट हुआ है और चेतावनी थी नरेंद्र मोदी की कि आपको इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी. दैट आई थिंक इट अपीयर्स दैट इट हैज़ टेकन प्लेस. 

सवाल: सर चुनाव में ओवैसी और हुमायूं कबीर की पार्टी मुस्लिम वोटों को आकर्षित करने में आखिर विफल क्यों रही?

जवाब: हुमायूं कबीर जो है इसको तो कोई घाटा नहीं हुआ. देखिए 182 सीट पे लड़ा शायद 294 में से दो सीट पे खुद लड़ा खुद दोनों सीट पे जीत गया. ही इज़ अ हीरो इन लिमिटेड वे ही इज़ नॉट ए लूजर. लूजर इज़ ओवैसी. 12 सीट पे लड़ा एक भी नहीं आया. द कंपनी कीप इसी कंपनी में आ गए थे. फिर वो टेप का झगड़ा हुआ और वीडियो का झगड़ा हुआ. उसने गठबंधन तोड़ लिया. तो ओवैसी की पार्टी डूब गई वहां पे. उसको कोई बेनिफिट नहीं मिला. 

सवाल: सर पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार आने के बाद क्या भी निर्माणधीन रहेगा बाबरी मस्जिद को बनाने का हुमायूं कबीर का प्रोजेक्ट?

जवाब: देयर इज नो चांस ऑफ़ एनी बाबरी मस्जिद कमिंग अप इन वेस्ट बंगाल नाउ. होम मिनिस्टर ने खुद ने कहा था नो चांस ऑफ़ दिस. योगी ने भी यही कहा है के कयामत तक जो है यहां नहीं बनेगी. कोई नहीं बनेगी. दूसरे ने कहा है हुमायूं कबीर ने कि बनेगी जरूर बनेगी यहां पे और यह यूपी नहीं है यह बंगाल है और योगी जी बोलते हैं तो उनको बोलने दीजिए बट एट द एंड ऑफ़ द डे आई एम कन्विंस नो बाबरी मस्जिद लाइकली टू कम अप इन बंगाल एट लीस्ट ऑन अनदर फाइव इयर्स..

सवाल: सर कुछ कहेंगे आप दुर्गा मंदिर और जगन्नाथ मंदिर प्रोजेक्ट के बारे में.. 

जवाब: दुर्गा मंदिर एक वरदान साबित हुआ है देखिए इनके आने के बाद में वहां के लोकल एमएलए नेसों से प्रोजेक्ट बंद पड़ा हुआ था उस मंदिर को खुलवा दिया है और दूसरा मंदिर जो आप बता रही तो सरकार टेक अप कर रही है. बहुत बड़ा उसको प्रोजेक्ट के रूप में बना रहे हैं और मेरे ख्याल से 5700 करोड़ लगेंगे उसमें. इट विल बी वन मोर ग्रेट मंदिर लाइक राम मंदिर टाइप एक बड़ा मंदिर जो है ना भगवान राम मंदिर का जैसे बना है उस तरह का बड़ा मंदिर उसके रूप में इसको कन्वर्ट करेंगे. 

सवाल: सर क्या पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार आने के बाद मुहर्रम की तुलना में दुर्गा पूजा से जुड़े प्रशासनिक प्रबंधों को ज्यादा प्राथमिकता दी जाएगी?

जवाब: ऑफकोर्स अब कोई कंफ्यूजन नहीं होगा एडमिनिस्ट्रेशन पुलिस के माइंड में. व्हिच इज़ द प्रायोरिटी व्हिच इज़ नॉट अ प्रायोरिटी. अब कोई बात आएगी तो दुर्गा पूजा अरेंजमेंट्स विल बी गिवन अ प्रायोरिटी ओवर मुहर्रम एंड ऑल दैट. समय-समय की बात है. दैट इज़ और मुहर्रम वाले लोग भी कोई ज्यादा जिद नहीं करेंगे. माहौल देख के सब लोग समझते हैं. हालात देख के सब समझते हैं. पहले चीफ मिनिस्टर थी जो स्लाइटली फ्रॉम मुस्लिम को मतलब मुस्लिम को ज्यादा सपोर्ट करती थी. एक तरह से जो है अब जो रूल है ये उस तरह का फेवरेबल नहीं है उनके लिए उस तरह से. इन मैरिट ओनली दैट वे जो है तो आई डोंट थिंक मुहर्रम विल गेट एनी प्रेसिडेंस ओवर दुर्गा पूजा सेलिब्रेशनंस इन वेस्ट बंगाल..

सवाल: सर क्या गुजरात और कुछ बीजेपी शासित राज्यों की तरह पश्चिम बंगाल के प्रशासन का भी रिमोट कंट्रोल दिल्ली के हाथ में होगा. 

जवाब: देखो रिमोट कंट्रोल तो नहीं होता हर जगह चीफ मिनिस्टर है वो है लेकिन एक कनेक्टिविटी रहती है पीएमओ की सुपरविजन रहता है ताकि जो सेंट्रल स्पोंसर्ड स्कीम्स हैं राज्यों में वो ठीक से चलती है कि नहीं चलती हैं और कोई मेजर कोई डिसरप्शन है वहां पे करप्शन की कंप्लेंट्स हैं कुछ और सरकार का फेल है डिलीवरी में फेल है तो पीएमओ थोड़ा बहुत उसको प्राइम मिनिस्टर के उसको मॉनिटर करते हैं. होम मिनिस्टर लॉ एंड ऑर्डर को देखते हैं. बाकी ऐसा नहीं कह सकते कोई रिमोट कंट्रोल है. ऑल द बीजेपी चीफिनिस्टर्स आर ऑलमोस्ट बाय एंड लार्ज फ्री. दे हैव फ्री हैंड इन देयर डे टू डे ऑपरेशंस लाइक वाइज बंगाल आल्सो. तो ऐसा कुछ नहीं है. दिल्ली से कुछ एक अच्छे अफसर जा सकते हैं वहां पे जैसे जाते हैं. जैसे अजय पाल को वहां भेज दिया है. ऐसे हो सकता है चीफ सेक्रेटरी डीजीपी लगेंगे तो सेंटर का थोड़ा बहुत सेव हो सकता है. क्योंकि वहां क्या है ना बिगर इंटरेस्ट आर एट स्टेक इन वेस्ट बंगाल. इट इज नॉट लाइक एनी अदर स्टेट हरियाणा और एनी अदर छत्तीसगढ़ इट बंगाल जहां स्टेक है पार्टी के तो थोड़ा सा मॉनिटरिंग दिल्ली से होगा बाकी रिमोट कंट्रोल जैसी कोई बात नहीं है. 

सवाल: सर इन चुनावों में ओपिनियन पोल्स और एग्जिट पोल की परफॉर्मेंस कैसी रही? 

जवाब: अच्छी थी इन अ वे ओपिनियन पोल तो पिटे ज्यादातर ने उसमें ममता के लिए कह दिया था कि शी इस कमिंग अप और ये एग्जिट पोल थे इसमें तो ऑलमोस्ट आई थिंक ऑलमोस्ट 100% सबने इसी बीजेपी का ये प्रोड कहा था कि बीजेपी आ रही है. इसमें जो है हालांकि सारे एग्जिट पोल का जो हीरो है वो चाणक्य टुडे रहा. बी के बजाज है जिसके जो है उन्होंने कहा कि 192 पे हम आएंगे. तो किसी ने कल्पना नहीं की थी 192 बीजेपी खुद नहीं सोचती थी 192 बीजेपी के एक दो लोगों ने फोन करके उसको कहा भी होगा ये क्या कह रहे हो? 192 कैसे हम 170 मान रहे हैं. 175 मान रहे हैं. 192 कैसे आगे 207 सीट तो ही प्रूव्ड टू बी अ मैन ऑफ़ द मैच ऑफ दी एग्जिट बॉल्स. 

सवाल: सर क्या आपको भी लगता है कि बंगाल चुनाव के बाद क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के पतन की प्रक्रिया और तेज हो गई है?

जवाब: हां वो तो पहले से है इन प्रोसेस और तेज हो जाएगी. आप देखिए बंगाल से तो टीएमसी बहुत बड़ा रीजनल पार्टी थी. डाउन है. देखा आपने उड़ीसा में पहले डाउन है. बीएसपी वहां डाउन है. यूपी में मतलब डिक्लाइन है. दैट वे आप देखते हैं. और कोई दूसरी रीजनल पार्टी उधर जो महाराष्ट्र में है वो भी डिक्लाइन की तरफ है. कुमार एंड ऑल जो है तो जितनी रीजनल पार्टी इधर उधर है वो सब डिक्लाइन पे है. अल्टीमेटली रीजनल पार्टी वहीं सर्वाइव करेगी जहां भाजपा को उनकी जरूरत होगी सरकार बनाने के लिए या कुछ बैलेंसिंग के लिए. बाकी अब्सोलुटली राइट कि इन द कमिंग डेज दिस बंगाल इलेक्शन हैज़ फदर ट्रिगरर्ड द प्रोसेस ऑफ डिक्लाइन ऑफ रीजनल पार्टीज इन द कंट्री. 

सवाल: सर पश्चिम बंगाल के बड़े अखबार टेलीग्राफ ने नतीजों के अगले दिन यानी 5 मई को पहला पृष्ठ भगवा कर दिया. तो इस एक्सपेरिमेंट को आप कैसे देखते हैं?

जवाब: देखो वैसे उन्होंने अकेले नहीं किया. लंदन और वहां के न्यूयॉर्क के अखबारों में जो खबर इस ढंग से छपी तो कलर उन्होंने भगवा टाइप दिया उसका. लेकिन इसने अखबार ने तो भगवा किया ही तो कुछ लोगों ने ऐसा माना कि शायदोरियल पॉलिसी है जो ममता के प्रति सहानुभूति रखती थी वैसे अखबार की रेपुटेशन एक इंडिपेंडेंट और फेयर अखबार की है लेकिन फिर भी ऐसा माना जाता थाक में स्लाइटली प्रो ममता जो है तो वो बार जो है ना थोड़ा सा उसने शिफ्ट ले रहा है और फिर अगले दिन हेडिंग लगाया उन्होंने मैडम दिस इज व्हाट लुक्स लाइक रिजेक्शन एक हेडलाइन लगाई नेक्स्ट डे जो है तो इन दो घटनाओं को जोड़ के देखा तो ऐसा ऐसा लगता है कि वो भी इंसान है. वो भी भारत में रहते हैं. तो ऐसा होगा कि चलो थोड़ा सा देखते हैं इसको ग्राउंड रियलिटी तो है नहीं कि नाउ सैफन ग्राउंड रियलिटी और वो स्वतंत्र और निष्पक्ष है अखबार तो स्वतंत्र निष्पक्ष है तो उसको भाजपा को तो करना ही पड़ेगा ना प्रोजेक्ट आज. क्या उसको प्राथमिकता देनी पड़ेगी? तो इसलिए ये नहीं कहा जा सकता कि उनकी पॉलिसी में वो शिफ्ट ले रहे हैं. दे आर गेटिंग मोर प्रैक्टिकल वी कैन से. 

सवाल: सर हेमंत शर्मा की जो जीत हासिल हुई है इस जीत को आप कैसे देखते हैं सर असम में.. 

जवाब: वो तो हीरो है लकी है देखिए कांग्रेस से बीजेपी में आए लेकिन लगता है 50 साल से वो तो बीजेपी में ही काम कर रहे हैं ही इज़ क्लोज टू प्राइम मिनिस्टर एज वेल एज क्लोज टू अमित शाह एज वेल एज क्लोज टू सिस्टम जो है असम में देखिए एनडीए 102 उसमें अकेले भाजपा के 82 सीट्स हैं. एंटायर क्रेडिट गोज़ टु द चीफ मिनिस्टर एट द लोकल लेवल. ऑफ़ कोर्स बिकॉज़ ऑफ़ द पॉपुलरिटी ऑफ़ द प्राइम मिनिस्टर. उनकी जो स्पीचेस थी वहां पे चाहे बागान का नैरेटिव था. प्लस अमित शाह का जो ग्राउंड वर्क था. लेकिन निश्चित तौर पे 102 में अकेले चीफ मिनिस्टर का 82 सीट्स लाना इस तरह से है. ये उनकी एक उपलब्धि माना जा रहा है. दैट वे और काम वो अच्छा करते हैं. उनके दो ही एजेंडा हैं. एक तो हिंदुत्व और एक डेवलपमेंट. डेवलपमेंट भी बहुत करते हैं वो डेवलपमेंट किया उन्होंने. तो उनका तो काम बिल्कुल परफेक्ट है इस समय. आई थिंक मोस्ट कंफर्टेबल चीफ मिनिस्टर इन द कंट्री अमंग ऑल बीजेपी स्टेट्स इज़ ओनली हेमंत मिश्रा एट द मोमेंट एंड ही इज़ नॉट ओनली चीफ मिनिस्टर असम. ही इज़ प्रैक्टिकली द चीफ मिनिस्टर ऑल सेवन नॉर्थ ईस्ट स्टेट्स आल्सो. तो बिल्कुल स्टिल हैव यू. 

सवाल: सर चुनाव के दौरान कांग्रेस की नेता पवन खेड़ा ने हेमंता शर्मा की पत्नी पर तीन पासपोर्ट रखने का आरोप लगाया. उसके बाद सुप्रीम कोर्ट से उन्हें जमानत मिल गई. इस पूरे घटनाक्रम को आप कैसे देखते हैं?

जवाब: इट्स रियली अनफॉर्चूनेट इट शुड नॉट हैपन फॉर एनी ऑफ़ द साइट्स लेकिन हुआ सो हुआ एट द एंड ऑफ़ द डे अब पवन खेड़ा को जमानत मिल गई है और वन रंस बाय एक्सपीरियंस ओनली अगली बार वो कुछ करेंगे तो और अच्छा होमवर्क कर लेंगे और अच्छी तैयारी कर लेंगे. दैट वे जो है और पॉलिटिक्स में सब चलता है. कभी-कभी आदमी क्या है पॉलिटिक्स में जो चलता है उसको आउट ऑफ प्रोपोशनली सीरियसली ले लेता है. तो असम चीफ मिनिस्टर ये कहना चाहिए प्रपोशन से ज्यादा सीरियसली लेके ये सब इस तरह से एफआईआर हुई और ये सब हुआ ये बट उनका कहना अपनी जगह है कि फैमिली मेंबर्स को नहीं घसीटना चाहिए. मेरी पत्नी को इसमें घसीटा गया. तो कौन सही है, कौन गलत है. इस बात को छोड़ के ये है कि व्हाट एंड्स वेल एट द एंड ऑफ द डे इज गुड. अब शांति हो गई है. उनकी जमानत हो गई है. वो चुनाव जीत गए हैं. वो अपनी सरकार चलाएंगे. यह अपनी पार्टी चलाएंगे दिल्ली में बैठ के. दिस इज ऑल. 

सवाल: सर आखिर कैसे हार गए कांग्रेस के यंग, टैलेंटेड और मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार गौरव गोग कोई अपना ही चुनाव. 

जवाब: मैंने सुना 23,000 वोट से हार गए. छोटा-मोटा नहीं. दैट वे जो है. एक कारण यह भी रहा हारने का कि यह तो वही दिल्ली में रहते हैं. यहां तो रहते नहीं है. तो कैसे आएंगे, कैसे जाएंगे? फिर लोगों को फील हो जाता है कि कांग्रेस हारने वाली है. कांग्रेस आने वाली नहीं है. और आप देखिए ना कांग्रेस की 19 सीटों में से 18 तो मुस्लिम है. लोगों को एक असेस कर लेते हैं लोग पहले कि कल क्या होने वाला है. तो लोगों ने रीड कर लिया था कि ये बीजेपी रिपीट होने वाली है. तो किसी ने वोट ही नहीं दिया कांग्रेस को दैट वे. तो इसी का शिकार हुए हार गए. सबसे बड़ी बात है अपनी सीट हार गए. दैट्स रियल अनफॉर्चूनेट. जो चीफ मिनिस्टरशिप का दावेदार था कांग्रेस का जो है बट सम टाइम इट हैपेंस. इट इज़ पॉलिटिक्स. एवरीथिंग इज़ पॉसिबल. 

सवाल: सर आपको लगता है जो असम चुनाव के दौरान एन वक्त पे दो लोग खासतौर पे भूपेंद्र बोरा जो कि पूर्व प्रदेश अध्यक्ष थे और सांसद जो हैं प्रदु तो वो जब छोड़ के गए कांग्रेस को और भाजपा में शामिल हुए उसका इंपैक्ट या उसका खामियाजा कांग्रेस को भुगतना पड़ा. 

जवाब: देखो ऐसा इंपैक्ट का तो थोड़ा बहुत ही होगा क्योंकि कांग्रेस तो क्या 19 सीट पे खड़े हो आप तो कोई ऐसा इंपैक्ट नहीं आता. अगर आपकी 70-80 सीट आ जाती तो आप कहते थोड़ा इंपैक्ट आ गया है. लेकिन यह है कि दे वर लकी दे आर वाइज एट द एप्रोप्रियट टाइम दे है टेकन अ राइट डिसिशन टू क्विट द पार्टी क्योंकि कांग्रेस सिंकिंग पार्टी थी वहां पे आप देख रहे हैं राहुल गांधी ने कुछ नहीं किया वहां पे जो है तो वक्त पे उन्होंने जंप किया दूसरी पार्टी में चले गए और चुनाव जीत गए वहां जाके एक 500 जीत गए एक 8000 जीत गए तो दिस इज ऑल पार्ट ऑफ द गेम.. 

सवाल: सर केरला में पिछले 10 सालों से मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे विजयन की हार को आप कैसे देखते हैं? 

जवाब: विजयन के आर भी अनयू है एक तरह से साफ सुथरा चेहरा था बाय एंड लार्ज इन लोगों ने सोचा ही रिटायरिंग नाउ जा रहे हैं जो है तो वोट कम दिए कोई बेटी का केस था एक वो मंदिर का कोई कंट्रोवर्सी थोड़ी बहुत हो गई थी लेकिन ये सारी बातें गौण है. असली कारण यह है कि वहां पे केरल में जो है मुस्लिम एंड दिस क्रिश्चियन कंबाइन जो 45% है ये एक साथ हो गए कांग्रेस के फेवर में एंड विज़ लॉस द गेम एक्चुअल तो यह है बाकी हार के कारण गिनने लगो तो आप एक से 10 तक कारण गिना सकते हो दैट जो है ही गुड मैन नॉर्मली कंपेरेटिवली और सनस लेकिन खुद को नहीं हारना चाहिए था ये थोड़ा सा ज्यादा हो गया मतलब जो है कि खुद के हारने की उम्मीद नहीं थी पार्टी हार गई कोई बात नहीं दैट विल जो है खुद हार गए तो समथिंग एक्स्ट्रा इट नीड्स टू बी लुक्ड इंटू बट एट द एंड ऑफ़ द डे जो मेन कारण था हार का और कांग्रेस की जीत का आप जो कहो वो यही था डेडली कंबाइन ऑफ़ मुस्लिम्स प्लस क्रिश्चियंस इक्विवेलेंट टू 45% 

सवाल: सर तो आखिर आप केरल में कांग्रेस की जीत का श्रेय किसको देंगे?

जवाब: श्रेय तो देखो ऐसा है कि मैंने कहा ना बेसिक कॉम्बिनेशन थी ये मुस्लिम और ये वाला दूसरा एक खास बात ये थी यूनाइटेड लीडरशिप थी इस बार राहुल गांधी को इसे क्रेडिट मिलनी चाहिए फॉर द फर्स्ट टाइम कि केरला में अच्छा काम हुआ उस तरह से और पूरी टीम ने काम किया और सचिन पायलट भी प्रभारी थे वहां के क्रेडिट गोज़ टू हिम आल्सो और बाकी सारे सीनियर लीडर एक्टिव थे. सबसे बड़ी बात थी कि इन फाइटिंग नहीं थी वहां पे. चाहे वहां से केसी वेणुगोपाल लड़ रहे थे, एक सतीश हम लड़ रहे थे, चैलक लड़ रहे थे. तो उससे गुटबाजी कोई वो वो नहीं था. और राहुल केरल की लीडरशिप थी और प्रियंका गांधी वहां पे गई थी. तो टोटल इसका जो कारण है जीतने का पहला कारण तो यह कि कंबाइन ऑफ़ मुस्लिम प्लस दश फेवर ऑफ़ कांग्रेस और सेकंड था के कलेक्टिव लीडरशिप थी कांग्रेस की वहां पे. थर्ड आप कह सकते हैं कि ग्रास रूट लेवल पे भी. पीपल लाइक सचिन पायलट दे आल्सो डन गुड जॉब दे. जो है तो 

सवाल: सर फिर कौन होगा केरलम का मुख्यमंत्री? 

जवाब: अब यह तो देखो इस बार ऐसा सुना है कि सोनिया गांधी राहुल दे आर ट्राइंग टू बी वेरी डेमोक्रेट और ये कह रहे हैं जो एमएलए चुनेंगे हम उसी को बनाएंगे तो एमएलए के मापदंड पे अगर आप जाएंगे राजस्थान फार्मूला राजस्थान में हुआ था ट्रायल इस तरह का तो अशोक गहलोत को हैंड्स डाउन मेजॉरिटी मिली थी तो चीफ मिनिस्टर बने थे वहां पे उस समय जो है तो अभी के हिसाब से ऐसा सुना मैंने कि एमएलए का सपोर्ट ज्यादा जो है केसी वेणुगोपाल के पक्ष में जा रहा है दैट जो है तो अगर वहां पे हेड काउंटिंग होगा ऐसा सुना मैंने दैट समथिंग वेरी गुड पीपल्स वॉइस शुड बी ऑनर्ड मैरिट शुड बी ऑनर्ड जो है तो ऐसा लगता है कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी के इनडायरेक्ट सपोर्ट से मोराल बूस्टर सपोर्ट से और प्लस एमएलए के सपोर्ट से जो है बाय एंड लार्ज ही माइट इमर्ज एज अ फ्रंट रनर विधायक दल पे बैठक होगी उसके अंदर जो है अब सेकंड सवाल लोगों को यह चिंता है कि कंसर्न है खुशी भी है गम भी है खुशी उन लोगों को है यहां एआईसीसी में जो लोग जिनके केसेस ही पड़ती है. दूसरा ग्रुप है कि अरे चला जाओ भाई चीफ मिनिस्टर बनाओ. तुम भी खुश हम भी खुश जो है ये और गमन थोड़ा सा उन लोगों को है. हर आदमी की अपनी कोठरी बनती है. ग्रुप बन जाता है. तो एआईसी से उनके भी अपने कुछ पसंद के लोग हैं. वो थोड़ा सा अपने आप को मतलब अनाथ तो नहीं कहना चाहिए. थोड़ा सा डीरल्ड थोड़ा सा डीरल्ड महसूस करेंगे इस नए सेटअप में. राहुल तक पहुंचने का रास्ता थे केसी. अब नया रास्ता ढूंढना पड़ेगा. फिर सवाल ये आएगा हु शुड रिप्लेस केसी? इज़ अ वेरीेंट पोजीशन. तो अकॉर्डिंग टू ऑल अवेलेबल इंडिकेशंस आई थिंक अशोक गहलोत मे बी आस्क टू टेक ओवर दिस रेसिबिलिटी. पहले तो पार्टी का अध्यक्ष बनने का उनको ऑफर दे दिया था लेकिन डेस्टिनी में नहीं था. उनको अच्छा लगा जयपुर में रहना चीफ मिनिस्ट्री करना. तो उन्होंने उस पे डिक्लाइन किया और वो चीफ मिनिस्टर रहे वहां पे. बट आई थिंक नाउ शायद अशोक गहलोत की जन्मपत्री कह रही होगी कि अब चलो भाई दिल्ली आना है. केसी की जगह बैठना है और फिर इंडी गठबंधन को रिवाइव करना है ममता को साथ लेके और सबको साथ लेके. लेट्स सी व्हाट फाइनली कम्स आउट. 

सवाल: सर पश्चिम बंगाल, असम और तमिलनाडु चुनाव में कहां स्टैंड कर रही है कांग्रेस पार्टी? और सर मैंने यह भी सुना है कि ममता बनर्जी की हार से कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी खुश हैं. 

जवाब: ये तो ऐसे ही खुश हैं. मतलब बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना एक तरह से. अरे आप अपने घर को देखो यार. वो तो संभल नहीं रहा. बंगाल में दो सीट पे खड़े हो. ठीक है ना? और इधर-उधर कोई इस तरह का महत्व बन नहीं रहा. दो मेजर तो डिफ़ॉल्ट यही हो गए ना आपके तमिलनाडु में पांच सीट आई हैं. 28 लड़े थे उसमें से पांच सीट आई हैं. तमिलनाडु इज़ ओके. बट आसाम इज़ पुअर. केवल मुस्लिम उम्मीदवार जीते हैं आपके. आप 19 पे खड़े हो. वहां पे जो है तो आप अपने घर को ठीक करो यार. दूसरे घर में कोई डूब गया उस पर क्या खुशी मना रहे हो. इसलिए मैंने कहा बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना. दैट इज़ तो कोई इसका मतलब नहीं है. कांग्रेस परफ़ेंस कंटिन्यू टु बी पुअर इन दिस इलेक्शन आल्सो एक्सेप्ट देयर ड्रामेटिक विन और देयर एक्सपेक्टेड विन इन केरला. इन केरला दे डिर्व अ वोट ऑफ़ एप्रिसिएशन कि एक सरकार उन्होंने बड़े स्टेट की बना ली. ये एप्रिसिएशन है उनका. बाकी जगह पुअर है. 

सवाल: सर तमिलनाडु और केरल में बीजेपी की परफॉर्मेंस को आप कैसे देखते हैं?

जवाब: केरल में 115 में लड़े तो तीन जीते. तमिलनाडु में 27 पर लड़े और एक जीता. बीजेपी का यह था कि केरल में कम से कम तीन लोग उसके जीते. एक आधार बना. एक मोराल बूस्टर है उनके लिए और जो लोग जीते हैं वहां केरल में उनके वो सब बड़े इंपॉर्टेंट लोग हैं. उसमें राजीव चंद्रशेखर हैं, बी मुरलीधरन है, बीबी गोप कुमार हैं. ये सारे पिलर्स हैं बीजेपी के केरला में. तो इट इज़ ए बूस्टर फॉर बीजेपी के तीन एमएलए तो जीता के लाए इस बार वहां पे. दैट वे जो है तमिलनाडु में नहीं कुछ कर पाए ज्यादा. एक व्यक्ति को जीता पाए दैट. लेकिन भाजपा के लिए आज देखने का वक्त नहीं है कि मैं केरल और तमिलनाडु में कितना जीते. भाजपा तो आज सेलिब्रेशन में है. बंगाल अकेला सबके बराबर है. फाइव टाइम्स मोर देन एनी केरला और एनी तमिलनाडु. आज कोई गम का माहौल ही नहीं है भाजपा के अंदर तमिलनाडु और केरल में अपना लिमिटेड विक्ट्री लाने का. आज तो दे आर ओवर एंजॉयंग द बंगाल विक्ट्री. 

सवाल: सर पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरलम तीनों में जो कांग्रेस ने टिकट वितरण किया और जो परिणाम आए यह देखते हुए कुछ जो कांग्रेस के आलोचक हैं उनका ये मानना है कि कांग्रेस भारत की एक मुस्लिम लीग पार्टी की तरह बन गई है. तो ये आकलन क्यों है सर उनका? आप ऐसे कैसे देखते हैं इसको?

जवाब: भाई देखो वैसे तो आयोलॉजिकली तो सही नहीं है. कांग्रेस की डिफरेंट आयोलॉजी उनकी डिफरेंट आयोलॉजी लेकिन इट अ कॉन्स सरकमस्ट्ससेस कि फैक्ट्स यही बोल रहे हैं. इलेक्शन रिजल्ट से यही निष्कर्ष निकलता है. वन कैन से दिस थिंग जो है आप देखिए ना आसाम के अंदर आप 19 सीटें अगर जीतते हैं 18 से मुस्लिम है. एक दूसरी स्टेट में आप जीतते हैं बंगाल में दो सीट तो दोनों मुस्लिम हैं. तो उससे आप इनफ्रेंस ड्रॉ कर सकते हैं. एक तरह से जो क्रिटिक्स हैं पार्टी के कांग्रेस के वो वो कह सकते हैं इस बात को इन तथ्यों के आधार पे कि ऐसा लगता है कि कांग्रेस अब मुस्लिम लीग पार्टी हो गई है. वो अपनी बात कह सकते हैं क्योंकि फैक्ट्स इस तरह के हैं. लेकिन आइडियोलॉजिकली ऐसा नहीं है. कांग्रेस इस बिग इंस्टीट्यूशन इन नेशनलिस्ट इंस्टीट्यूशन उसकी तुलना हम मुस्लिम लीग से नहीं कर सकते. लेकिन जो आज ग्राउंड रिजल्ट्स हैं वो रिजल्ट्स उसी की ओर इशारा कर रहे हैं जो आलोचक कह रहे हैं. 

सवाल: सर पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में जो रिकॉर्ड वोटिंग हुई पश्चिम बंगाल में 92.7 और तमिलनाडु में 85.17 इस वोटिंग परसेंटेज को आप कैसे देखें?

जवाब: इट्स अ वोटिंग रेवोल्यूशन. इट्स अ डेमोक्रेटिक रेगुलेशन और इसका बहुत बड़ा क्रेडिट जो एक्सरसाइज शुरू की है इलेक्शन कमीशन ने उसको जाता है. एसआईआर को जाता है. एसआर से जो भय क्रिएट हो गया था वोट नहीं देंगे तुम्हारा राशन कार्ड रद्द हो जाएगा. हमारा आधार कार्ड रद्द हो जाएगा. लिस्ट से नाम कट जाएगा. हमको बांग्लादेश भेज दिया जाएगा. इलेक्शन कमीशन का जो मोमेंटम था यह मिलाकर के सारा हुआ. और फिर एक बात और थी इसमें. इसमें एक बहुत बड़ा क्रेडिट जो है वो होम मिनिस्टर को जाता है क्योंकि इलेक्शन कमीशन एडमिनिस्ट्रेटिवली वहां रिपोर्ट करता है. इलेक्शन कमीशन बिल्कुल फेयर इंडिपेंडेंट है. इन प्रशासनिक प्रबंधों में ओवरऑल संविधान के तहत उनका डीलिंग मिनिस्ट्री है. दैट इज है तो वहां से जो फर्म डायरेक्शन था एक तरह से जो लीडरशिप थी जो डिसाइसिव सपोर्ट था चीफ इलेक्शन कमिश्नर को चाहे वो सुप्रीम कोर्ट ने सपोर्ट दिया सरकार ने चाहे ग्राउंड पे सपोर्ट दिया चाहे लॉ एंड ऑर्डर में सपोर्ट दिया सेंट्रल फोर्सेस का सपोर्ट दिया वो अद्भुत था. तो यह जो अद्भुत परसेंटेज हुआ है जो रिकॉर्ड वोटिंग हुआ है इन दो स्टेट्स के अंदर उसका सारा शेयर कलेक्टिव शेयर जो है वो सेंट्रल लीडरशिप प्लस इलेक्शन कमीशन प्लस फर्सेस एंड ऑल दैट ये पूरा पैकेज जो है इसको जाता है एंड इट्स अ गुड साइन आप वोट चाहे मुझे दें इसको दें बट यू मस्ट वोट और सबसे पहली बात ये हुई है कानून बनने की बात चल रही थी कि सरकार कानून लाएगी कंपलसरी वोटिंग का कोई आवश्यकता नहीं है आवश्यकता आविष्कार की जननी है हालात ने कर दिया अब यह परमानेंट हो गया है. हर चुनाव में वोटिंग आपको 80% ज्यादा दिखाई देगा. सो दिस बंगाल हैज़ शोन ए रोड फॉर दिस थिंग. सो एवरीबडी डिर्व्स ए वोट ऑफ़ एप्रिसिएशन, ए वोट ऑफ रिवार्ड. 

बंगाल की चर्चा हर जगह है और शायद इसी को लोकतंत्र की खूबसूरती भी कहा जाता है. लेकिन वो कहते हैं ना कि हालात बदल गए, जज्बात बदल गए. बंगाल का यह जनादेश सिर्फ एक राज्य की जीत नहीं है बल्कि पूर्वी भारत में बीजेपी की जीत का एक राजनीतिक मानचित्र है. अंग बंग कलिंग यानी कि बिहार, बंगाल और ओसा तीनों दिशाओं में बीजेपी अब सिर्फ मौजूद नहीं है बल्कि निर्णायक शक्ति बन चुकी है. जिस पूर्वी भारत को कभी बीजेपी की कमजोर कड़ी माना जाता था. आज वहीं मोदी शाह की रणनीति ने भगवा विस्तार का सबसे बड़ा मॉडल खड़ा कर दिया है. मानना होगा जोड़ी हो तो ऐसी मोदी शाह की आक्रामक रणनीति इन सब ने मिलकर पूर्वी भारत में बीजेपी की राजनीति का रंग भगवा कर दिया. और अब नजर 2027 के चुनाव पर. 2027 के चुनाव में क्या बीजेपी इसी मॉडल के सहारे देश की राजनीति का एक नया अध्याय लिखेगी? यह देखना होगा.