प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मलेशिया दौरा सिर्फ एक औपचारिक विदेश यात्रा नहीं था, बल्कि इसमें कूटनीति, रणनीतिक साझेदारी और सांस्कृतिक जुड़ाव तीनों का साफ संदेश दिखा. कुआलालंपुर से चेन्नई तक गूंजा भारत का प्रभाव, और प्रवासी भारतीयों में दिखा जबरदस्त उत्साह, इस दौरे को खास बना गया. भारत 24 के सीईओ और एडिटर इन चीफ डॉ. जगदीश चंद्र ने 'The JC Show' में इस यात्रा का विश्लेषण किया.
सवाल- आज द जेसी शो की हेडलाइन है 'Modi’s Strategic Victory, Kuala Lumpur to Chennai' इसके मायने क्या हैं और क्या इस यात्रा का कोई तमिलनाडु चुनाव का एंगल भी है?
डॉ. जगदीश चंद्र का जवाब- Really it was all the way Narendra Modi, right from Kuala lumpur to Chennai And both the places he won the hearts to the people, lakhs of people, crores of people. तमिल के लिए उन्होंने कहा कि Tamil culture is global. It's India's connect in the outer world. यह वह भाषा है जो लोगों को दिलों से जोड़ती है और इसके साथ ही उन्होंने वहां की संस्कृति और संस्कारों में तमिल गानों का जिक्र किया. वहां के प्रधानमंत्री ने खुद एमजीआर की पुरानी फिल्म का गाना गाया और एक नए तरह का इमोशनल कल्चरल कनेक्ट दोनों देशों के बीच दिखा. जहां तक तमिलनाडु इलेक्शन की संभावनाओं का सवाल है तो Naturally Modi is a Politician, He is Visionary. दिमाग में सब बातें रहती हैं. मलेशिया में लगभग 30 लाख भारतीय प्रवासी रहते हैं. उसमें 80% लोग वो हैं जो तमिल भाषा बोलते हैं. तमिलनाडु के क्षेत्रों से आते हैं. तो इस अवसर पर नरेंद्र मोदी ने इशारों इशारों में संकेत दिया कि हमने आप लोगों के लिए क्या किया है? क्या-क्या नहीं किया है. एक उपराष्ट्रपति दिया, एक विदेश मंत्री दिया, एक वित्त मंत्री दिया, एक सूचना प्रसारण मंत्री दिया. तो भाई अब मैचिंग रिस्पांस का वक्त है. अब चुनाव सामने हैं. 10 मई लास्ट डे है. विधानसभा के जो मौजूदा कार्यकाल है उससे पहले नई सरकार बननी है. 234 मेंबर्स असेंबली में भाजपा के पास केवल चार एमएलए हैं. 39 एमपीज में कोई एमपी नहीं है. लेकिन अमित शाह नरेंद्र मोदी लगे हुए हैं. टफ है, चैलेंज है. लेकिन मोदी और शाह को चैलेंज स्वीकार करने में मजा आता है. मई लास्ट डे है विधानसभा के जो मौजूदा कार्यकाल है. उससे पहले नई सरकार बननी है. और आज जो स्थिति है वो टफ है और चैलेंज है. 234 मेंबर्स असेंबली में भाजपा के पास केवल चार एमएलए हैं. 39 एमपीज में कोई एमपी नहीं है. लेकिन अमित शाह नरेंद्र मोदी लगे हुए हैं. टफ है, चैलेंज है. लेकिन मोदी और शाह को चैलेंज स्वीकार करने में मजा आता है. let's see this time what miracle they will bring in Tamil Nadu.
सवाल- एक और मुस्लिम राष्ट्र मलेशिया में हुए प्रधानमंत्री मोदी के इस unusual reception को आप कैसे देखते हैं ?
डॉ. जगदीश चंद्र ने कहा- यह रिसेप्शन वास्तव में अद्भुत था और वहां के प्रधानमंत्री खुद एयरपोर्ट लेने आए. गाड़ी में अपनी सीट पर बैठाया, फिर से मोदी की कार डिप्लोमेसी हुई. इसके बाद यह भी कहा कि मैं भाग्यशाली हूं कि नरेंद्र मोदी मेरे मित्र हैं. कुल मिलाकर नरेंद्र मोदी का जो सरकार की तरफ से स्वागत था वो अद्भुत था.
सवाल- मलेशिया में प्रवासी भारतीयों द्वारा नरेंद्र मोदी को देखते ही उत्साह और जोश के साथ 'मोदी-मोदी' के नारे लगाने की घटना को देखते हुए मेरे मन में बार-बार ये सवाल उठता है कि आखिर विदेशों में मोदी को देखकर इतने क्यों उत्साहित हो जाते हैं भारतीय प्रवासी ?
जवाब- Craze है मोदी का, देश में, विदेश में equally surprise है, Miracle कह सकते हैं, जहां भी जाते हैं, कितने देशों में हमने देखा है जहां जाते हैं लोग टूट पड़ते हैं. वहां पे 15,000 लोग आ गए. ये सच है कि नरेंद्र मोदी का जो क्रेज है, across the country है, across the globe है, भारत और भारत के बाहर लगभग एक जैसा है. Its a miracle but its a fact, let's feel pride that our Prime Minister is so popular across the globe.
सवाल- पीएम मोदी ने 2026 की पहली यात्रा के लिए मलेशिया को क्यों चुना?
जवाब- इसके 2-3 कारण रहे होंगे, पहला कारण था कि मोदी ज़ुबान के पक्के हैं, वादे के पक्के हैं. पिछली बार जो ASEAN सम्मेलन हुआ था, तब पीएम ऐन वक्त पे नहीं जा पाए, पोस्टपोंड हो गया. प्रधानमंत्री ने वहां से फोन किया कि आप आए नहीं, तो उन्होंने कहा मैं जल्द आऊंगा, वादा करता हूं. तो वादा पूरा करने के लिए 2026 की पहली विदेश यात्रा उन्होंने मलेशिया शुरू की. एक तो यह पहलू है, दूसरा यह है कि वहां 30 लाख लोग रहते हैं, एक मिनी भारत वहां रहता है. फिर एक कारण यह है कि जलडमरू मध्य जो खाड़ी है, जो गल्फ का है वो हिंद महासागर को कनेक्ट करती है, साउथ चाइना सी से बड़ा स्ट्रेटेजिक एरिया है. भारत का 55% समुद्री ट्रांसपोर्टेशन का जो माल है वो उसी रास्ते से हो के गुजरता है. फिर क्या भारत भी सोचता है कि साउथ चाइना सी में मेरा प्रभुत्व नरेंद्र मोदी का एजेंडा है. अमेरिका सोचता है ताइवान चाइना का झगड़ा है, सेंसिटिविटी है, तो यह सब कारण थे जिनसे इनका मन हुआ कि चलो वादा भी निभाएंगे और वहां अपनी स्ट्रेटेजिक रेलेवेंस भी बनाएंगे और जो ब्रांड मोदी है इसको थोड़ा और मजबूत करेंगे.
सवाल- नरेंद्र मोदी ने कुआलालंपुर में जो भाषण दिया उसमें वे अर्थशास्त्र के एक प्रोफेसर की भांति दिखाई दे रहे थे, क्या आपने भी ये भाषण सुना है ?
डॉ. जगदीश चंद्र का जवाब- वो मैंने देखा, मुझे बड़ा प्रभावी लगा, Black jacket और white shirt एक typical तरह का जो पहनते हैं बड़े अच्छे लग रहे थे. ऐसे लग रहे थे कि जैसे एक प्रोफेसर या एक मास्टर क्लास में बच्चों को समझा रहे हों. अर्थशास्त्र की बातें कर रहे थे, तो ऐसा लग रहा था कि अर्थशास्त्री के रोल में हैं. ये तय करना बहुत मुश्किल है कि He is a born teacher और He is a born professor. At the end of the day फिर यही conclude करना पड़ता है कि He is all in one. एक नया उन्होंने और अच्छा किया impressive अंग्रेजी में बोले, एक भाषा में सुना अंग्रेजी में बोल रहे थे very impressive, एक व्यक्ति की इसमें इच्छा शक्ति और जो Will power है उसको दर्शाता है. अर्थशास्त्री के रूप में वहां इस बार उनका भाषण जो था उसने सबको प्रभावित किया.
सवाल- इस यात्रा का मूल मंत्र या driving force क्या रहा?
visit should be something different than others, It should not be a routine bilateral agreement visit, We should think beyond that, जिसे कहते हैं. और दूसरा उनको लगा कि India's rise जो है भारत का जो उत्थान है ये It offers जिसे कहना चाहिए Tough areas and also at the time of accepting the challenging areas, तो ये उनके दिमाग में Basically ये एक कारण रहा होगा कि हमें रुटीन यात्रा से हटकर इसको एक Multiple यात्रा बनाना है इसको उस तरह की यात्रा बनाना है जिसमें हम उसे कह सकते हैं कि It's a multiple comprehensive strategic visit. तो ये मूल मंत्र उनका रहा है, जो History पर आधारित है, विश्वास पर आधारित है. आने वाले कल में दोनों का भविष्य अच्छा हो इन संभावना जिसे कहते हैं कि Shared future aspirations उस पर आधारित हो तो ये मूल मंत्र इस तरह के उनके मस्तिष्क में रहे हैं और यात्रा अच्छी हुई है.
सवाल- दक्षिण- पूर्व एशियाई देशों के संगठन आसियान और भारत के व्यापारिक रिश्ते कैसे हैं ?
डॉ. जगदीश चंद्र का जवाब- व्यापारिक रिश्ते अच्छे हैं, काफी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. 2016 में आप देखिए कि 65 अरब डॉलर का व्यापार था दोनों के बीच में और 2025 में 125 अरब डॉलर का व्यापार है. More Than Double जिसे कहना चाहिए ऑलमोस्ट डबल है, तो ये बहुत अच्छा है. और दूसरा क्या हो रहा है कि भारत जो है मलेशिया के साथ थर्ड बिगेस्ट बिजनेस पार्टनर है. हमारा तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक रिश्ता उस देश के साथ है. भारत यह सोच रहा है कि जितने एशियन कंट्रीज हैं इनके साथ में हम जो फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स कर लें. फिर भारत की 100 से ज़्यादा कंपनियां जो मलेशिया में काम कर रही हैं, तो रिश्ते व्यापार रिश्ते एशियन कंट्री के साथ भारत के अभी बहुत अच्छे हैं और आगे बढ़ेंगे.
सवाल- इस यात्रा के दौरान नरेंद्र मोदी ने दो जबरदस्त और दिल को छूने वाले बयान दिए हैं - पहला ये कि no double standards, और दूसरा - no compromise on terror, इसे आप कैसे देखते हैं?
डॉ. जगदीश चंद्र का जवाब- देखिए सबसे बड़ी बात तो उन्होंने कहा ना कि नो कंप्रोमाइज नो डबल स्टैंडर्ड्स. हम तो पहला इशारा तो अमेरिका की तरफ है जो पाकिस्तान को लेकर, टेरर को लेकर डबल स्टैंडर्ड अपनाता है. इंडिया से शुरुआत में बात हुई तो कहा कि पाकिस्तान तो टेरर है, इसको देखेंगे और इंडिया ने प्रूव कर दिया पहलगाम में. इसके बाद 10 दिन में फिर वो गए आर्मी चीफ वहां के प्राइम मिनिस्टर गए और ट्रंप के फैमिली मेंबर से रेयर अर्थ मिनरल्स की कोई डील हो गई. ट्रंप वहां पे बदल गए और ये कहने लगे कि आतंकवाद की लड़ाई में पाकिस्तान का साथ बहुत जरूरी है. तो बिल्कुल डबल स्टैंडर्ड है, तो इशारा उनका उनकी तरफ था. थोड़ा सा इशारा मलेशिया की तरफ भी था कि जाकिर जिसको सरकार लाना चाहती है, जाकिर नायक वहां पे जो है तो इशारा थोड़ा सा था और यह तो उन्होंने कहा कि देशों में डबल स्टैंडर्ड्स और नो कंप्रोमाइज जो है ये वो साफ तौर पे इस कंप्रोमाइज केवल टेरर के लिए नहीं है, ये कंप्रोमाइज क्या है कि ये ट्रंप की ओर संकेत भी करता है. हमने डील की है अपनी शर्तों पे. हम झुके नहीं अल्टीमेटली जो शुरू में था झुकेंगे नहीं, दबेंगे नहीं, भारत झुकेगा नहीं. उन सारी शर्तों के साथ जो डील की है तो दोनों संकेत उन्होंने इस बात में दिए. सबसे बड़ी बात ये है कि उनका जो स्टेटमेंट था वो इतना पावरफुल था कि सारे अखबारों ने लीड बना के छापा.
सवाल- मलेशिया के साथ भारत के कुल 11 समझौते हुए हैं उनके बारे में क्या कहा प्रधानमंत्री मोदी ने?
जवाब- प्रधानमंत्री ने मोटे तौर पर दो बातें कही. एक तो उन्होंने कहा कि It's a beginning of a new era between two nations. दूसरा उन्होंने कहा कि अब Indo-pacific region is going to emerge as a new growth engine of the entire world. यह जो देश है ASEAN के और हम जो सब देश हैं यह सारे संसार का नया ग्रोथ इंजन बनने जा रहे हैं. ये दो बड़ी आशाओं के साथ और दो बड़े वाक्यों के साथ उन्होंने वहां Agreements साइन किए.
सवाल- सर क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि ब्रिटेन, EU और अब अमेरिका के साथ ट्रेड डील के बाद भारत संसार का एक बड़ा इन्वेस्ट एंड ट्रेड हब बन चुका है?
जवाब- 100%, These all agreements have reflected India's global credibility in the globe. सब राष्ट्रों ने देखा कि भारत वहां भी डील कर रहा है, यहां भी कर रहा है, अमेरिका से भी कर रहा है, और ट्रंप जैसे Whimsical आदमी को भी लाइन पर ला रहा है, उससे भी डील कर रहा है अपने हिसाब से. इससे आपकी इमेज बनती है, आपकी ब्रांडिंग होती है, आपकी मैसिजिंग जाती है उन Countries के अंदर तो इसलिए इन डील्स का सारे संसार में बहुत अच्छा मैसेज गया है कि नरेंद्र मोदी कौन हैं? नरेंद्र मोदी वो हैं जो ब्रिटेन से डील करके आए हैं, EU से डील करके आए हैं, ट्रंप से डील करके आए हैं, वो आज हमारे देश में हैं. इससे Personality cult मजबूत होता है. इससे, International political and economic Personality cult वो मजबूत होता है.
सवाल- भारत की 7.2 growth rate के मुकाबले चीन की growth rate केवल 4.2% रह गई है, आखिर कैसे हुआ यह चमत्कार?
जवाब- It's again Narendra Modi miracle, जहां Political stability होती है, वहां growth rate होती है. आप देखिए Political stability है और ये rate कहां है? यहां Political stability है और development है, miracle तो है ही. कहां चीन और कहां भारत ? हमेशा मानते थे ना कि China बड़ी शक्ति है, हमसे ज्यादा बड़ी शक्ति है और आप देखिए और कम से कम आज Moody ने भी rates निकाली तो भी 6.2% से कम नहीं निकाली है हम कहते हैं 7.2% है.