Yemen Houthis: यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है. हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी की चेतावनी दी है. वहीं, यमन सरकार ने हूतियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है. इस पूरे घटनाक्रम से दुनिया में तेल सप्लाई और कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है.
यमन सरकार का बड़ा बयान
यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के प्रमुख रशाद अल-अलिमी ने कहा कि अब हूती विद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई का समय आ गया है. उन्होंने लोगों से सरकार और सेना का साथ देने की अपील की.
उन्होंने यह भी कहा कि 20 जुलाई से यमन फिर से तेल का निर्यात शुरू करेगा. सरकार का कहना है कि इससे होने वाली कमाई का इस्तेमाल देश के लोगों की भलाई के लिए किया जाएगा.
हूतियों ने दी नाकाबंदी की चेतावनी
यमन सरकार के बयान के बाद हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी का ऐलान कर दिया. हूती प्रवक्ता यह्या सारी ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर कहा कि यह फैसला तुरंत लागू होगा. हूतियों का आरोप है कि सऊदी अरब ने यमन की राजधानी सना की घेराबंदी कर रखी है. इसी के जवाब में उन्होंने यह कदम उठाया है.
सऊदी अरब ने दी सख्त चेतावनी
हूतियों की धमकी के बाद सऊदी अरब ने भी कड़ा रुख अपनाया है. सऊदी विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा. सऊदी का कहना है कि हूती लाल सागर में जहाजों को निशाना बनाकर पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा रहे हैं.
तेल बाजार पर पड़ सकता है असर
इस तनाव का असर दुनिया के तेल बाजार पर भी पड़ सकता है. अगर लाल सागर और बाब-अल-मंदेब समुद्री रास्ते पर खतरा बढ़ता है, तो सऊदी अरब से तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात और बिगड़े, तो दुनिया के कई देशों में महंगाई और ऊर्जा संकट बढ़ सकता है.
क्यों अहम है बाब-अल-मंदेब?
बाब-अल-मंदेब दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है. इसी रास्ते से एशिया और यूरोप के बीच बड़ी मात्रा में तेल और अन्य सामान की सप्लाई होती है. अगर यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो वैश्विक सप्लाई चेन पर असर पड़ सकता है और कई देशों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है.
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