नाकाबंदी, न्यूक्लियर, होर्मुज स्ट्रेट... अमेरिका-ईरान के बीच लगातार बढ़ रहा तनाव, फिर शुरू होगी जंग?

पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव गहराता नजर आ रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती बयानबाजी और रणनीतिक गतिविधियों ने हालात को गंभीर बना दिया है.

Tension is increasing between America and Iran will war start again
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव गहराता नजर आ रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती बयानबाजी और रणनीतिक गतिविधियों ने हालात को गंभीर बना दिया है. ताजा विवाद एक प्रस्ताव को लेकर सामने आया है, जिसने दोनों देशों के रिश्तों में नई खाई पैदा कर दी है.

ईरान ने अमेरिका के सामने एक प्रस्ताव रखा, जिसमें तीन अहम मुद्दे प्रमुख थे- होर्मुज जलडमरूमध्य, परमाणु कार्यक्रम और नाकाबंदी. ईरान की मांग थी कि सबसे पहले होर्मुज से जुड़ी नाकाबंदी हटाई जाए, उसके बाद ही न्यूक्लियर मुद्दे पर बातचीत आगे बढ़े. साथ ही उसने अपने मिसाइल प्रोग्राम पर चर्चा से साफ इनकार कर दिया.

इस प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाया और इसे अस्वीकार कर दिया. उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी शर्तों के साथ किसी समझौते की संभावना नहीं है और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती.

तेज हुई बयानबाजी

दोनों देशों के बीच बयानबाजी लगातार तीखी होती जा रही है. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के सामने सीमित विकल्प हैं—या तो ईरान के खिलाफ कड़े कदम उठाए जाएं या उसकी शर्तों को स्वीकार किया जाए, जिसे उन्होंने अव्यवहारिक बताया.

वहीं ईरान की ओर से भी सख्त प्रतिक्रिया सामने आई. सैन्य नेतृत्व ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका किसी तरह की आक्रामक कार्रवाई करता है, तो उसे तुरंत और कड़ा जवाब दिया जाएगा.

ईरान के वरिष्ठ नेताओं ने यह भी संकेत दिया कि किसी भी हमले की स्थिति में जवाब क्षेत्रीय स्तर पर दिया जा सकता है, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है.

सैन्य गतिविधियों ने बढ़ाई चिंता

तनाव के बीच सैन्य हलचल भी तेज हो गई है. अमेरिका ने अपनी नौसैनिक मौजूदगी बढ़ाते हुए USS Boxer को क्षेत्र की ओर रवाना किया है. इस जहाज पर बड़ी संख्या में मरीन तैनात हैं और यह आधुनिक लड़ाकू विमानों से लैस है.

इसके अलावा, B-1 Lancer जैसे सुपरसोनिक बॉम्बर की गतिविधियां भी सामने आई हैं, जो आमतौर पर संवेदनशील परिस्थितियों में ही सक्रिय होते हैं.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पश्चिम एशिया में पहले से ही हजारों अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं और समुद्री क्षेत्र में एयरक्राफ्ट कैरियर की तैनाती इस स्थिति को और गंभीर बनाती है.

होर्मुज पर बढ़ा टकराव

इस पूरे विवाद का केंद्र बना हुआ है होर्मुज जलडमरूमध्य, जो दुनिया की तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग है. ईरान का दावा है कि इस क्षेत्र पर उसका अधिकार है और वह यहां से गुजरने वाले जहाजों पर नियंत्रण रख सकता है.

वहीं अमेरिका इसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग मानता है और उसने चेतावनी दी है कि यदि कोई देश ईरान को टोल देता है, तो उसे प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है.

ईरान ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए संकेत दिए हैं कि वह इस मार्ग को रणनीतिक दबाव के तौर पर इस्तेमाल कर सकता है.

आर्थिक मोर्चे पर भी तनाव

ईरान ने सैन्य के साथ-साथ आर्थिक मोर्चे पर भी जवाब देने की बात कही है. वहां के नेतृत्व का कहना है कि अगर दबाव बढ़ाया गया, तो अमेरिका के खिलाफ आर्थिक रणनीति अपनाई जाएगी.

दूसरी ओर अमेरिका प्रतिबंधों और कूटनीतिक दबाव के जरिए ईरान को झुकाने की कोशिश में जुटा है.