F-16 और Su-30 से भी घातक TEJAS MK-1A Fighter Jet, सुनते ही छूट गए पाकिस्तान-चीन के पसीने! जानें ताकत

बदलते सामरिक परिदृश्य को देखते हुए भारत के लिए डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता हासिल करना अब अनिवार्य हो गया है. मिसाइल और हथियार विकास में देश ने कई महत्वपूर्ण मील के पत्थर पार किए हैं.

TEJAS MK-1A Fighter Jet is powerfull with f16 and su30  know its power
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बदलते सामरिक परिदृश्य को देखते हुए भारत के लिए डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता हासिल करना अब अनिवार्य हो गया है. मिसाइल और हथियार विकास में देश ने कई महत्वपूर्ण मील के पत्थर पार किए हैं. अब अगली बड़ी चुनौती देसी मॉडर्न फाइटर जेट तैयार करना है, और इस दिशा में तेजस प्रोजेक्ट केंद्रीय भूमिका निभा रहा है.

साथ ही, 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान को घरेलू स्तर पर विकसित करने के लिए AMCA प्रोजेक्ट भी शुरू किया गया है. तेजस के तहत भारत कई अपग्रेडेड वेरिएंट पर एक साथ काम कर रहा है. आने वाले महीनों में इसके असर को भारतीय वायुसेना की फ्रंटलाइन तैनाती में देखा जा सकेगा.

तेजस MK-1A और MK-2A: नई पीढ़ी के विमान

तेजस MK-1A और MK-2A पर तेजी से काम चल रहा है. खासतौर पर MK-1A वर्जन को तकनीकी और रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है. इसकी चपलता और घातक क्षमता इसे अमेरिकी F-16 और Su-30 जैसे विमान से कहीं आगे खड़ा करती है. चीन के कई फाइटर जेट्स भी MK-1A के मुकाबले पीछे हैं.

EL/M-2052 AESA रडार से लैस यह विमान 150–160 किमी दूर 5m² RCS वाले टारगेट और 110–120 किमी दूर 1m² RCS वाले छोटे टारगेट को डिटेक्ट कर सकता है. इसका मतलब है कि तेजस दुश्मन की नजर से पहले देखकर पहले मारने की क्षमता रखता है.

फ्रंटलाइन तैनाती और भरोसा

भारतीय वायुसेना ने राजस्थान, गुजरात और लद्दाख में तेजस स्क्वॉड्रन को तैनात करने की योजना बनाई है. रेगिस्तानी, तटीय और पहाड़ी क्षेत्रों में यह विमान भरोसेमंद प्रदर्शन दिखा रहा है. स्क्वॉड्रन की तैनाती यह भी दर्शाती है कि एयरफोर्स इसे सिर्फ ट्रायल के रूप में नहीं, बल्कि एक्टिव फ्रंटलाइन रोल में उपयोग कर रही है.

हथियार और इलेक्ट्रॉनिक क्षमताएं

  • BVR (Beyond Visual Range) कॉम्बैट: Astra MK-1 मिसाइल (110 किमी रेंज)
  • WVR (Within Visual Range) कॉम्बैट: Python-5 और ASRAAM (20–25 किमी रेंज)
  • इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर: Elta EL/M 8222 जामिंग पॉड
  • SEAD/DEAD मिशन: NGARM (100 किमी से अधिक) और BrahMos-NG
  • प्रेसिजन स्ट्राइक: Spice-2000 बम और SAAW (100 किमी रेंज), Litening टारगेटिंग पॉड

परफॉर्मेंस और मल्टीरोल क्षमता

तेजस Mach 1.6 की गति तक पहुंच सकता है और आठ हार्डपॉइंट्स पर 3,500 किग्रा तक पेलोड ले जा सकता है. इसका डिजिटल फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम और तेज़ टर्निंग क्षमता इसे नज़दीकी हवाई युद्ध (dogfight) में भी घातक बनाती है. विमान में 40% से अधिक कंपोजिट मटेरियल का उपयोग इसे हल्का और स्टील्थ बनाता है. तेजस की सबसे बड़ी ताकत इसकी मल्टीरोल क्षमता है – यह इंटरसेप्शन, डीप स्ट्राइक और रिकॉन मिशन को एक साथ पूरा कर सकता है. पुराने विमान जैसे मिग-21 और जगुआर ऐसा करने में सक्षम नहीं थे. तेजस केवल मिग-21 का रिप्लेसमेंट नहीं है, बल्कि यह आने वाले तीन दशकों के लिए भारत का हल्का लड़ाकू विमान है. इसकी ग्रोथ रोडमैप और भविष्य की कॉन्फ़िगरेशन विकल्प इसे वैश्विक मानकों के बराबर खड़ा करते हैं.

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