डूरंड रेखा के पास हालिया हिंसक झड़पों के बाद अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है. अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए तालिबान के प्रवक्ता मावलवी जबीहुल्लाह मुजाहिद ने पाकिस्तान पर कई गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने दावा किया कि हाल ही में हुए सैन्य संघर्ष में अफगान बलों ने पाकिस्तान की 20 से अधिक चौकियों पर कब्जा कर लिया और इस कार्रवाई में पाकिस्तान के 58 सुरक्षा कर्मी मारे गए, जबकि 30 से अधिक घायल हुए हैं. तालिबान के भी 9 लड़ाकों की मौत और करीब 18 घायल होने की जानकारी दी गई है.
पाकिस्तान को बताया आतंकवाद का गढ़
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तालिबान प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान, विशेषकर उसका उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र खैबर पख्तूनख्वा (KPK), अब आतंकवाद का एक सक्रिय केंद्र बन चुका है. उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की मिलीभगत से आईएसआईएस (ISIS) जैसे संगठनों को वहां ठिकाने बनाने की खुली छूट मिली हुई है. तालिबान ने यह आरोप भी लगाया कि पाकिस्तान की जमीन का इस्तेमाल अफगानिस्तान के खिलाफ आतंकवादी अभियानों के लिए किया जा रहा है.
मुजाहिद ने कहा, "पाकिस्तान को चाहिए कि वह अपने क्षेत्र में सक्रिय आतंकवादियों को शरण देना बंद करे और उन्हें काबुल प्रशासन को सौंपे. यदि पाकिस्तान वास्तव में अफगानिस्तान में शांति चाहता है, तो उसे दोहरे मापदंड अपनाना बंद करना होगा."
डूरंड रेखा पर तनाव और गोलीबारी
डूरंड रेखा, जो कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच एक विवादास्पद सीमा रेखा है, पिछले कुछ समय से झड़पों का केंद्र बनी हुई है. तालिबान ने दावा किया कि पाकिस्तान द्वारा एकतरफा हवाई हमलों और सीमा पार गोलाबारी का जवाब देना जरूरी हो गया था. अफगान प्रवक्ता के अनुसार, "यह हमारी जमीन की रक्षा का मामला है. हमने जबाबी कार्रवाई की और यह दिखाया कि अफगानी बल किसी भी हमले का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम हैं."
पाकिस्तानी सेना में 'शांति विरोधी तत्व'
जबीहुल्लाह मुजाहिद ने पाकिस्तान के भीतर मौजूद 'शांति विरोधी' तत्वों की ओर इशारा करते हुए कहा कि वहां की सेना और खुफिया एजेंसियों में ऐसे लोग मौजूद हैं जो अफगानिस्तान में स्थिरता के खिलाफ काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की आम जनता और कुछ राजनीतिक दल अफगानिस्तान के साथ अच्छे संबंधों की इच्छुक हैं, लेकिन सेना और कुछ संस्थागत ताकतें इन संबंधों को बिगाड़ने में लगी हैं.
उन्होंने कहा, "पाकिस्तान की सेना आपसी समझ और शांति वार्ता का विरोध करती है. वे अफगानिस्तान को अस्थिर रखने के एजेंडे पर काम कर रहे हैं."
आतंकी हमलों में पाक का हाथ?
तालिबान ने यह भी आरोप लगाया कि अफगानिस्तान में हाल के वर्षों में हुए कई बड़े आतंकवादी हमलों में पाकिस्तान में पल रहे आतंकियों का हाथ है. उन्होंने हेरात, काबुल, कंधार और गोर जैसे शहरों में हुए विस्फोटों का हवाला देते हुए कहा कि इन हमलों की योजना पाकिस्तान में बनाई गई और वहीं से आतंकियों को भेजा गया.
पाकिस्तान पर 'नाकामी छिपाने' का आरोप
तालिबान प्रवक्ता ने पाकिस्तान पर यह भी आरोप लगाया कि वह अपनी घरेलू नीतिगत असफलताओं और सुरक्षा विफलताओं के लिए अफगानिस्तान को जिम्मेदार ठहराता है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने खुद को एक पीड़ित देश के रूप में पेश करने की कोशिश करता है, जबकि असल में वह आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली नीतियों को बढ़ावा देता है.
प्रवक्ता ने कहा, "पाकिस्तान अफगानिस्तान को बदनाम करने के लिए योजनाबद्ध दुष्प्रचार चलाता है, जबकि खुद आतंकियों को पनाह देकर पूरे क्षेत्र को खतरे में डाल रहा है."
तालिबान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि पाकिस्तान ने अपनी नीतियों में बदलाव नहीं किया और आतंकवादियों को संरक्षण देना जारी रखा, तो अफगानिस्तान को अपनी सुरक्षा के लिए और भी कड़े कदम उठाने पड़ेंगे. उन्होंने कहा कि अफगानी सरहद की हिफाजत हर हाल में की जाएगी और विदेशी हस्तक्षेप या साजिशों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
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