नासा के अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर नौ महीने अंतरिक्ष में बिताकर आखिरकार धरती पर लौट आए हैं. दोनों ने मंगलवार (18 मार्च) को स्पेसएक्स के क्रू ड्रैगन कैप्सूल में सवार होकर अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) से पृथ्वी की यात्रा शुरू की. उनका स्पेसक्राफ्ट बुधवार सुबह 3:27 बजे फ्लोरिडा के तट पर सफलतापूर्वक उतरा. खास बात यह है कि उनका यान पानी में उतरा, जिसे स्प्लैशडाउन कहा जाता है. आइए, जानते हैं कि स्प्लैशडाउन क्यों किया गया और इसकी अहमियत क्या है.
स्प्लैशडाउन क्या है?
स्प्लैशडाउन का मतलब है, अंतरिक्ष यान को पैराशूट की मदद से पानी में सुरक्षित रूप से उतारना. जब अंतरिक्ष यान पृथ्वी की ओर लौटता है, तो उसकी गति बहुत तेज होती है. इस तेज गति को धीमा करना जरूरी होता है ताकि यान सुरक्षित तरीके से उतरे. जब यान पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है, तो हवा के कणों से घर्षण पैदा होता है, जिससे यान की गति कम होती है. इस प्रक्रिया में बहुत अधिक गर्मी उत्पन्न होती है, और यान के चारों ओर का तापमान लगभग 1,500 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है.
स्प्लैशडाउन क्यों जरूरी है?
स्प्लैशडाउन का एक बड़ा कारण यह है कि अंतरिक्ष यान की गति को सुरक्षित तरीके से धीमा करने के लिए पैराशूट का इस्तेमाल किया जाता है. अंतरिक्ष यान की लैंडिंग को स्थिर और सुरक्षित बनाने के लिए कई पैराशूट लगाए जाते हैं. यान के पानी में उतरने से, इसकी गति को धीरे-धीरे कम किया जा सकता है. पानी एक अच्छा शॉक एब्जॉर्बर है, और इसलिए यह अंतरिक्ष यान की सुरक्षित लैंडिंग के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प माना जाता है. इसके अलावा, पानी की चिपचिपाहट कम होती है और घनत्व भी कम होता है, जिससे यान का लैंडिंग आसान हो जाता है.
पानी में लैंडिंग के फायदे
पानी में लैंडिंग का एक बड़ा फायदा यह है कि यह एक सामान्य और सुरक्षित सतह है. धरती की सतह पर यदि कोई असमानता हो, जैसे कि पहाड़ी इलाका या ढलान हो, तो यान पलट सकता है या लुढ़क सकता है, जिससे अंतरिक्ष यात्रियों के लिए खतरा बढ़ सकता है. इसके विपरीत, पानी में यान का गिरना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है.
कार हादसे जैसा अनुभव
अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहने के बाद, यान की वापसी और स्प्लैशडाउन का अनुभव कुछ हद तक कार दुर्घटना जैसा हो सकता है. 2007 में रूसी अंतरिक्ष यान सोयूज से लौटे नासा के पूर्व अंतरिक्ष यात्री माइकल लोपेज़-एलेग्रिया ने इसे एक कार दुर्घटना जैसा बताया. उन्होंने कहा कि पृथ्वी पर लैंडिंग के दौरान यह अनुभव बहुत तीव्र और चौंकाने वाला हो सकता है.
नुकसान भी हैं
हालांकि, पानी में लैंडिंग के कुछ नुकसान भी हो सकते हैं. अंतरिक्ष यात्री केन बोवसॉक्स, जो सोयूज यान के लैंडिंग विशेषज्ञ हैं, के अनुसार जमीन पर लैंडिंग ज्यादा सुरक्षित हो सकती है, क्योंकि वहां अगर लैंडिंग उबड़-खाबड़ भी हो तो अंतरिक्ष यात्री आसानी से बाहर निकल सकते हैं. वहीं, पानी पर लैंडिंग में अगर कोई गड़बड़ी हो जाए, तो मुश्किल हो सकती है, जैसे कि 2003 में सोयूज यान का कजाकिस्तान के मैदानों से 200 मील दूर उतरना.
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