पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में नोककुंडी जिले में फ्रंटियर कॉर्प्स (FC) के मुख्यालय पर रविवार देर रात एक आत्मघाती हमला हुआ. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमलावरों ने मुख्य गेट के पास खुद को उड़ा लिया, जिससे गेट पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया. इसके बाद 6 हथियारबंद लड़ाके परिसर में प्रवेश करने में सफल रहे, लेकिन सुरक्षा बलों ने तेजी से जवाबी कार्रवाई की. गोलीबारी के दौरान कम से कम तीन हमलावर मारे गए, जबकि कुछ सूत्रों के अनुसार सभी 6 हमलावर ढेर किए गए.
FC के प्रवक्ता ने इस हमले की जिम्मेदारी बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) पर डाली. पंजाबगुर जिले के गुरमाकन इलाके में भी इसी प्रकार का एक हमला दर्ज किया गया, जिसमें FC चेकपोस्ट को निशाना बनाया गया.
पिछले 24 घंटों में बलूचिस्तान में कई हमले
इस हमले से कुछ घंटे पहले ही बलूचिस्तान में एक ही दिन में 7 धमाके हुए थे. संदिग्ध उग्रवादियों ने क्वेटा और डेरा मुराद जमाली में अलग-अलग जगहों पर IED और ग्रेनेड ब्लास्ट किए. इनमें किसी की मौत नहीं हुई, लेकिन दो सुरक्षा गार्ड घायल हुए.
क्वेटा में सरियाब रोड पर एक निर्माण कंपनी के कैंप पर हथियारबंद लोगों ने ग्रेनेड फेंके. मनजूर शहीद पुलिस स्टेशन पर मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने दो ग्रेनेड फेंके, जिनमें से एक फट गया और दूसरा बम स्क्वाड ने निष्क्रिय कर दिया. लोहर करेज के पास रेलवे ट्रैक को IED ब्लास्ट से नुकसान पहुंचाया गया.
Severe attack on the Frontier Corps (FC) headquarters in Nokkundi, one of Balochistan's most sensitive and strategic areas.
— The Balochistan Post - English (@TBPEnglish) November 30, 2025
Extremely close to Iran and Afghanistan borders, nuclear test sites, as well as the Reko Diq and Saindak mining projects. #Nokkundi #Balochistan pic.twitter.com/eYOeaWubUD
डेरा मुराद जमाली में पुलिस गश्ती गाड़ी पर भी हमला हुआ और क्वेटा के केच बेग इलाके में पुलिस पोस्ट के पास हथगोले फेंके गए. इन हमलों की कोई संगठन ने आधिकारिक तौर पर जिम्मेदारी नहीं ली थी.
बलूचिस्तान में लगातार बढ़ती हिंसा
बलूचिस्तान में पिछले कुछ सालों में हिंसा में लगातार वृद्धि देखी गई है. इस साल अब तक प्रांत में 782 लोग मारे जा चुके हैं. मार्च में बलूच लिबरेशन आर्मी ने एक ट्रेन हाइजैक कर कई सैनिकों को मार डाला था. सितंबर में क्वेटा में एक राजनीतिक रैली पर हुए आत्मघाती हमले में 11 लोगों की मौत हुई थी.
पाकिस्तान के डिप्टी प्रधानमंत्री इशाक डार ने हाल ही में दावा किया कि पिछले चार सालों में पाकिस्तान के 4,000 सैनिक मारे गए, जबकि 20,000 से अधिक घायल हुए. उन्होंने अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान को झेलनी पड़ी चुनौतियों का हवाला देते हुए कहा कि सीमा क्षेत्रों में TTP (पाकिस्तानी तालिबान) के लड़ाकों को पनाह नहीं दी जानी चाहिए.
पाकिस्तान ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में दूसरे नंबर पर
2025 के ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स के मुताबिक, पाकिस्तान दुनिया का दूसरा सबसे आतंक प्रभावित देश बन चुका है. 2024 में यह चौथे स्थान पर था. TTP के हमलों में 90% की वृद्धि हुई है, जबकि बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) के हमलों में 60% वृद्धि दर्ज की गई है.
इस्लामिक स्टेट-खुरासान (IS-K) ने भी अब पाकिस्तान के शहरों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान सबसे अधिक आतंक प्रभावित क्षेत्र हैं. देश में होने वाली कुल आतंकी घटनाओं का 90% हिस्सा इन प्रांतों में दर्ज किया जाता है.
तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान को लगातार दूसरे साल देश का सबसे खतरनाक आतंकवादी संगठन बताया गया. 2024 में इस संगठन ने 482 हमले किए, जिनमें 558 लोगों की मौत हुई, जो 2023 के मुकाबले 91% अधिक है.
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