मॉस्को/वॉशिंगटन/बीजिंग: बीते वर्षों में रूस के Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट को लेकर कई सवाल उठते रहे हैं. अमेरिका के F-35 लाइटनिंग II और चीन के Chengdu J-20 को वैश्विक रक्षा विशेषज्ञ अधिक उन्नत मानते रहे हैं. लेकिन अब रूस ने एक ऐसी रणनीति अपनाई है, जो आने वाले समय में युद्ध के तरीके को पूरी तरह बदल सकती है.
रूसी रक्षा उद्योग अब केवल स्टील्थ फाइटर विकसित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह Su-57 को एक नेटवर्क-सेंट्रिक वार प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित कर रहा है, जो मानवयुक्त (manned) और मानवरहित (unmanned) युद्धक विमानों को एक साथ युद्धक्षेत्र में उतारेगा.
सिर्फ फाइटर नहीं, पूरा युद्धक सिस्टम
रूस की प्रसिद्ध विमान निर्माता कंपनी Sukhoi Design Bureau के अनुसार, Su-57 अब सिर्फ एक फाइटर जेट नहीं रह गया है, बल्कि इसे ऐसे प्लेटफॉर्म में बदला जा रहा है जो कई ड्रोनों को नियंत्रित और लॉन्च कर सकता है.
Sukhoi के एक वरिष्ठ अधिकारी मिखाइल स्ट्रेलेट्स के अनुसार, "आधुनिक युद्ध में केवल पायलटेड एयरक्राफ्ट पर निर्भर रहना जोखिम भरा और महंगा है. इसलिए अब जरूरत है मल्टी-लेयरड, मल्टी-डोमेन कॉम्बैट स्ट्रक्चर की, जिसमें हर प्लेटफॉर्म का अलग मिशन हो."
इसी दिशा में रूस ने 8 से ज्यादा यूएवी (Unmanned Aerial Vehicle) वैरिएंट्स पर काम शुरू कर दिया है. इनमें से कई को सार्वजनिक रूप से दिखाया भी गया है. इन ड्रोनों को Su-57 से ही दुश्मन के ठिकानों तक पहुंचाया और लॉन्च किया जा सकता है.
Su-57 के साथ जोड़े जा रहे 3 प्रमुख ड्रोन
1. S-70 'Okhotnik' (हंटर) UCAV
हालांकि 2024 में एक ऑपरेशन के दौरान एक Su-57 द्वारा गलती से एक ओखोतनिक को मार गिराने की खबर आई थी, लेकिन इसके बावजूद इसका परीक्षण और अपग्रेड जारी है.
2. S-71M 'Monochrome'
3. S-71K 'Carpet'
AI और नेटवर्क वॉरफेयर में रूस की छलांग
Su-57 और इसके ड्रोन सिस्टम केवल हार्डवेयर तक सीमित नहीं हैं. इसमें AI-बेस्ड टारगेटिंग, डेटा लिंक, और रियल टाइम कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम लगाए जा रहे हैं. यह अमेरिकी F-35 की MADL (Multifunction Advanced Data Link) प्रणाली जैसी क्षमताओं से मिलती-जुलती है, लेकिन इसे मल्टी-ड्रोन ऑपरेशन के लिए बेहतर बताया जा रहा है.
Su-57 अब एक ऐसा 'कॉम्बैट इकोसिस्टम' बन रहा है जिसमें एक सिंगल फाइटर जेट कई ड्रोनों को कंट्रोल कर सकता है, और ये सभी मिलकर एक सामूहिक मिशन अंजाम दे सकते हैं.
रूस की नई सैन्य रणनीति क्या संकेत देती है?
रूस की यह रणनीति दिखाती है कि अब युद्ध केवल जेट्स की गति, रडार से बचने की क्षमता या हथियारों की संख्या पर आधारित नहीं रहेगा. भविष्य की लड़ाइयों में मशीनों का समन्वय, ऑटोनॉमी, और इंटीग्रेटेड वारफेयर सिस्टम निर्णायक भूमिका निभाएंगे.
जहां अमेरिकी F-35 अभी भी मुख्य रूप से एक मानवयुक्त प्लेटफॉर्म है, और चीन का J-20 अपेक्षाकृत बंद टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम में काम करता है. वहीं रूस ने Su-57 को एक ओपन-एंडेड, मल्टी-फंक्शनल फाइटर के रूप में तैयार करना शुरू कर दिया है.
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