Haryana Stubble Burning: हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में लगातार गिरावट आई है और यह राज्य शून्य पराली जलाने वाले राज्य बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है. मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने हाल ही में इस बारे में सकारात्मक जानकारी दी, और बताया कि हरियाणा ने पिछले दो वर्षों में इस समस्या पर काबू पाने के लिए उल्लेखनीय प्रयास किए हैं. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि इस वर्ष पराली जलाने की घटनाओं में 77 प्रतिशत की गिरावट आई है.
किसानों और अधिकारियों का सहयोग
पराली जलाने की घटनाओं में गिरावट में किसानों और राज्य सरकार के अधिकारियों के समन्वित प्रयासों का बड़ा हाथ है. विशेषकर करनाल और कुरुक्षेत्र जिलों के किसानों की सक्रिय भागीदारी ने इस मुद्दे पर सकारात्मक प्रभाव डाला है. सीएक्यूएम के अध्यक्ष राजेश वर्मा ने इस सफलता का श्रेय स्थानीय किसानों को दिया और आगामी दिनों में सतर्कता बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन को निर्देशित किया.
हरियाणा की त्रि-आयामी रणनीति
अनुराग रस्तोगी के अनुसार, हरियाणा की त्रि-आयामी रणनीति जिसमें पराली के अवशेषों का यथास्थान प्रबंधन, बाह्य उपयोग, और चारे के रूप में उपयोग किया जाना शामिल है, ने फसल अवशेषों को जलाने की घटनाओं में कमी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. राज्य के विभिन्न हिस्सों में किसानों को इन उपायों के बारे में जागरूक किया गया है, और परिणामस्वरूप 39.31 लाख एकड़ क्षेत्र में धान की फसल के अवशेषों का सही तरीके से प्रबंधन किया जा रहा है.
किसानों को वित्तीय प्रोत्साहन
राज्य सरकार ने किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन, फसल विविधीकरण और प्रत्यक्ष बुवाई जैसे टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन देने की योजना बनाई है. हरियाणा में 1,200 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से अवशेष प्रबंधन, 8,000 रुपये प्रति एकड़ फसल विविधीकरण, और 4,500 रुपये प्रति एकड़ प्रत्यक्ष बुवाई (डीएसआर) के लिए अनुदान दिए जा रहे हैं. इन प्रोत्साहनों के माध्यम से सरकार कृषि क्षेत्र में बदलाव लाने का प्रयास कर रही है.
ध्यान में रखे जाने योग्य तकनीकी पहल
हरियाणा ने पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए तकनीकी उपायों का भी सहारा लिया है. हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की देखरेख में 2 लाख एकड़ भूमि पर बायो-डीकंपोजर पाउडर का निःशुल्क छिड़काव किया जा रहा है, जो पराली के प्राकृतिक विघटन में मदद करता है. इसके साथ ही, पराली के औद्योगिक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कई नए संयंत्र लगाए गए हैं, जिनसे ऊर्जा उत्पादन और अन्य औद्योगिक प्रक्रियाओं में पराली का उपयोग किया जा रहा है.
पराली के औद्योगिक उपयोग में विस्तार
हरियाणा ने पराली के औद्योगिक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न संयंत्रों की स्थापना की है. इनमें पेलेटीकरण और ब्रिकेटिंग संयंत्र, बायोमास बिजली संयंत्र, और इथेनॉल संयंत्र शामिल हैं. इसके अलावा, राज्य ने ईंट भट्टों को पराली-आधारित पेलेट्स का 2025 तक 20 प्रतिशत उपयोग करने के निर्देश दिए हैं, जो 2028 तक बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने का लक्ष्य है. इन पहलों से न केवल पराली जलाने की समस्या का समाधान होगा, बल्कि राज्य में ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में भी एक नया आयाम जुड़ सकेगा.
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