नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने 26 नवंबर को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए, प्रसिद्ध कॉमेडियन और यूट्यूबर समय रैना सहित तीन अन्य हास्य कलाकारों को एक नई जिम्मेदारी सौंपी. अदालत ने इन कलाकारों को निर्देश दिया कि वे अपने प्लेटफॉर्म्स पर दिव्यांगजनों की सफलता की कहानियों पर आधारित कार्यक्रम आयोजित करें, जिससे न केवल समाज में सकारात्मक संदेश जाए, बल्कि दिव्यांगजनों के उपचार के लिए धन भी जुटाया जा सके. इस आदेश का उद्देश्य हास्य कलाकारों को अपनी लोकप्रियता का उपयोग समाज के हित में करने के लिए प्रेरित करना है, ताकि वे अपने कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ा सकें.
क्यों आया यह आदेश?
यह आदेश क्योर एसएमए फाउंडेशन द्वारा दायर याचिका के आधार पर आया है, जिसमें दिव्यांगजनों के प्रति असंवेदनशील और भद्दी टिप्पणियों को लेकर कुछ हास्य कलाकारों पर कार्रवाई की मांग की गई थी. दरअसल, इस साल की शुरुआत में इंडियाज गॉट टैलेंट और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर विकलांगता के बारे में किए गए आपत्तिजनक चुटकुलों ने समाज में विवाद खड़ा किया था. सुप्रीम कोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए, अश्लील और विकृत सामग्री के प्रसार को लेकर चिंता जताई.
समाज में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि यह आदेश किसी तरह का दंड नहीं है, बल्कि एक सामाजिक बोझ है जिसे हास्य कलाकारों को अपनी लोकप्रियता का सही इस्तेमाल करने के रूप में समझना चाहिए. उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल धन जुटाना नहीं होना चाहिए, बल्कि दिव्यांगजनों के प्रति समाज की सोच में बदलाव लाना भी इसका मुख्य उद्देश्य होना चाहिए. कोर्ट ने अपेक्षाएँ जताईं कि अगले सुनवाई तक इन कार्यक्रमों में दिव्यांगजनों के संघर्ष और सफलता की वास्तविक कहानियाँ दिखाई जाएं.
सरकार और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की भूमिका
सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सामग्री की निगरानी को लेकर सरकार और संबंधित अधिकारियों से सवाल उठाए. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का विरोध नहीं कर रही है, लेकिन इस बात पर जोर दिया कि विकृत और अपमानजनक सामग्री की कोई भी अनुमति नहीं दी जा सकती. कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि कोई प्लेटफॉर्म किसी प्रकार की सामग्री प्रसारित करता है, तो उस प्लेटफॉर्म को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए, और उस पर पर्याप्त चेतावनियाँ दी जानी चाहिए.
मामले की आगामी सुनवाई
इस मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने 8 जनवरी 2026 को सुनवाई निर्धारित की है, जहां इस बारे में आगे की कानूनी प्रक्रिया पर चर्चा होगी. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को साफ किया कि इसे निगरानी तंत्र के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह एक ऐसा उपाय होना चाहिए जो समाज में संवेदनशीलता और सुरक्षा बढ़ाने के लिए काम करे.
समय रैना और अन्य कलाकारों के लिए नया निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना और अन्य आरोपित हास्य कलाकारों को यह निर्देश दिया कि वे हर महीने कम से कम दो कार्यक्रम आयोजित करें, जिनका मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजनों के बारे में जागरूकता फैलाना और सम्मान का संदेश देना हो. इन कार्यक्रमों के जरिए जुटाई गई धनराशि का इस्तेमाल दिव्यांगजनों के इलाज और उपचार के लिए किया जाएगा. कोर्ट ने यह भी कहा कि यह कार्यक्रम केवल औपचारिकता न होकर, समाज में वास्तविक बदलाव लाने की दिशा में काम करें.
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