8th Pay Commission: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं. कर्मचारी संगठनों की ओर से लगातार वेतन ढांचे में व्यापक बदलाव की मांग की जा रही है. इसी बीच सामने आए प्रस्तावों के अनुसार, यदि प्रमुख सिफारिशें स्वीकार होती हैं तो कर्मचारियों की मासिक सैलरी में करीब 65 फीसदी तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. हालांकि, यह बढ़ोतरी अभी केवल कर्मचारी संगठनों द्वारा सुझाए गए प्रस्तावों पर आधारित है. अंतिम फैसला सरकार और 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद ही होगा.
क्यों बदलने की मांग उठ रही है मौजूदा वेतन व्यवस्था?
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मौजूदा वेतन संरचना तेजी से बढ़ती महंगाई और बड़े शहरों में जीवन-यापन की वास्तविक लागत के अनुरूप नहीं है. मकान का किराया, परिवहन, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी खर्चों में लगातार इजाफा हुआ है, जबकि वेतन ढांचे में उसी अनुपात में बदलाव नहीं हुआ. इसी वजह से कर्मचारी संगठन बेसिक पे, महंगाई भत्ता (DA), हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA) में संशोधन की मांग कर रहे हैं.
फिटमेंट फैक्टर बढ़ने से बढ़ सकती है बेसिक सैलरी
8वें वेतन आयोग को लेकर सबसे अधिक चर्चा फिटमेंट फैक्टर को लेकर हो रही है. कर्मचारी संगठनों का मानना है कि वर्तमान फिटमेंट फैक्टर में बढ़ोतरी किए बिना कर्मचारियों को वास्तविक राहत नहीं मिल पाएगी. कुछ संगठनों ने सुझाव दिया है कि पारिवारिक इकाई (Family Unit) की मौजूदा परिभाषा में बदलाव किया जाए. यदि आश्रित माता-पिता को भी इसमें शामिल किया जाता है तो फिटमेंट फैक्टर लगभग 2.05 से बढ़कर 2.10 तक पहुंच सकता है. इससे एंट्री लेवल कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में उल्लेखनीय वृद्धि संभव मानी जा रही है.
HRA में भी बड़े संशोधन की मांग
कर्मचारी संगठनों ने हाउस रेंट अलाउंस की मौजूदा दरों को बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है. प्रस्ताव के अनुसार X, Y और Z श्रेणी के शहरों के लिए क्रमशः 36%, 24% और 12% HRA देने की मांग की गई है. कुछ संगठनों ने इससे भी अधिक दरें लागू करने का सुझाव दिया है, ताकि भविष्य में महंगाई बढ़ने के बावजूद कर्मचारियों को पर्याप्त राहत मिलती रहे.
ट्रांसपोर्ट अलाउंस बढ़ाने की भी सिफारिश
मेट्रो शहरों में बढ़ते यात्रा खर्च को देखते हुए ट्रांसपोर्ट अलाउंस बढ़ाने की मांग भी जोर पकड़ रही है. कुछ कर्मचारी संगठनों का सुझाव है कि लेवल-1 कर्मचारियों को कम से कम 9,000 रुपये मासिक ट्रांसपोर्ट अलाउंस दिया जाए. वहीं अन्य संगठनों ने मौजूदा भत्ते को तीन गुना तक बढ़ाने और इसे महंगाई भत्ते से जोड़ने का प्रस्ताव रखा है.
DA को बेसिक पे में शामिल करने की मांग
महंगाई भत्ते (DA) को लेकर भी कर्मचारी संगठनों ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं. उनका कहना है कि जब DA एक निश्चित स्तर, जैसे 25 प्रतिशत तक पहुंच जाए, तो उसे बेसिक वेतन में समाहित कर दिया जाना चाहिए. इससे भविष्य में वेतन, भत्तों और पेंशन की गणना अधिक व्यावहारिक और कर्मचारियों के हित में होगी.
लेवल-1 कर्मचारियों की सैलरी कितनी बढ़ सकती है?
वर्तमान वेतन संरचना के अनुसार X श्रेणी के शहर में कार्यरत लेवल-1 कर्मचारी की कुल मासिक ग्रॉस सैलरी लगभग 37,000 रुपये के आसपास है. यदि कर्मचारी संगठनों द्वारा प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर, संशोधित HRA, ट्रांसपोर्ट अलाउंस और अन्य बदलाव लागू किए जाते हैं, तो यही सैलरी बढ़कर करीब 61,000 रुपये तक पहुंच सकती है. यानी कुल वेतन में लगभग 65 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का अनुमान लगाया जा रहा है.
कैसे निकाला गया 65% बढ़ोतरी का अनुमान?
यह अनुमान कई प्रस्तावित बदलावों को जोड़कर तैयार किया गया है. इनमें बढ़ा हुआ फिटमेंट फैक्टर, अधिक HRA, संशोधित ट्रांसपोर्ट अलाउंस और नई बेसिक सैलरी पर लागू होने वाला महंगाई भत्ता शामिल है.इन सभी बदलावों का संयुक्त प्रभाव कर्मचारियों की कुल मासिक आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी कर सकता है.
किन संगठनों ने दिए हैं ये सुझाव?
इन प्रस्तावों को कई कर्मचारी संगठनों ने सरकार के सामने रखा है. इनमें AINPSEF, NC-JCM स्टाफ साइड, AIDEF, FNPO और IRTSA जैसे संगठन शामिल हैं. हालांकि विभिन्न संगठनों के सुझावों में कुछ अंतर है, लेकिन लगभग सभी इस बात पर सहमत हैं कि मौजूदा वेतन व्यवस्था में व्यापक सुधार की जरूरत है.
क्या सरकार ने इन प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है?
अभी तक सरकार ने इन सिफारिशों को मंजूरी नहीं दी है और न ही 8वें वेतन आयोग की अंतिम रिपोर्ट जारी हुई है. इसलिए फिटमेंट फैक्टर, HRA, DA मर्जर, ट्रांसपोर्ट अलाउंस और अन्य वेतन संबंधी बदलावों पर अंतिम निर्णय सरकार द्वारा आयोग की सिफारिशों पर विचार करने के बाद ही लिया जाएगा.
कब तक लागू हो सकता है नया वेतन आयोग?
यदि सरकार जल्द 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया को आगे बढ़ाती है, तो आने वाले समय में करोड़ों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को इसका लाभ मिल सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि नया वेतन आयोग लागू होने से कर्मचारियों की क्रय शक्ति बढ़ेगी. इसका सकारात्मक असर उपभोक्ता खर्च, खुदरा बाजार और देश की अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल सकता है.
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