मिसाइलें, सेंसर, एंटी-सबमरीन हथियार... भारतीय नौसेना बेड़े में शामिल होगा स्वदेशी युद्धपोत 'महेंद्रगिरि'

भारतीय नौसेना को जल्द ही एक और अत्याधुनिक स्वदेशी युद्धपोत मिलने जा रहा है. INS महेंद्रगिरी (F-38) को 11 जुलाई को विशाखापत्तनम में आयोजित एक समारोह में आधिकारिक तौर पर नौसेना के बेड़े में शामिल किया जाएगा.

Indigenous warship Mahendragiri to join the Indian Navy fleet Stealth Frigate Warship
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नई दिल्ली: भारतीय नौसेना को जल्द ही एक और अत्याधुनिक स्वदेशी युद्धपोत मिलने जा रहा है. INS महेंद्रगिरी (F-38) को 11 जुलाई को विशाखापत्तनम में आयोजित एक समारोह में आधिकारिक तौर पर नौसेना के बेड़े में शामिल किया जाएगा.

यह प्रोजेक्ट-17A श्रृंखला का छठा स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट है. आधुनिक हथियारों, उन्नत सेंसर और स्टील्थ तकनीक से लैस यह युद्धपोत समुद्र में भारत की ताकत को और मजबूत करेगा.

आधुनिक हथियारों से लैस है INS महेंद्रगिरी

INS महेंद्रगिरी को भारतीय नौसेना की अलग-अलग युद्ध जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है.

इसमें सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली, आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, एडवांस सेंसर, पनडुब्बी रोधी हथियार और एकीकृत कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम लगाया गया है. इसकी वजह से यह एक साथ कई तरह के खतरों से मुकाबला कर सकता है.

क्या है स्टील्थ तकनीक की खासियत?

INS महेंद्रगिरी एक स्टील्थ फ्रिगेट है. इसका मतलब है कि इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि दुश्मन के रडार पर इसकी पहचान करना बेहद मुश्किल हो.

इसकी बाहरी बनावट और विशेष तकनीक रडार सिग्नेचर को कम करती है, जिससे यह दुश्मन की निगरानी प्रणाली को आसानी से धोखा देकर ऑपरेशन कर सकता है.

पूरी तरह स्वदेशी डिजाइन और निर्माण

महेंद्रगिरी का डिजाइन भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है, जबकि इसका निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) ने किया है.

भारतीय नौसेना के अनुसार, इस युद्धपोत में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है. इसके निर्माण में बड़ी रक्षा कंपनियों के साथ-साथ सैकड़ों सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSME) ने भी योगदान दिया है.

11 जुलाई को नौसेना में होगा शामिल

11 जुलाई को विशाखापत्तनम में आयोजित एक विशेष समारोह में INS महेंद्रगिरी को भारतीय नौसेना में शामिल किया जाएगा.

यह केवल एक नए युद्धपोत की कमीशनिंग नहीं है, बल्कि भारत की बढ़ती रक्षा तकनीक, आत्मनिर्भरता और समुद्री शक्ति का भी बड़ा प्रतीक माना जा रहा है.

कैसे पड़ा 'महेंद्रगिरी' नाम?

इस युद्धपोत का नाम पूर्वी घाट की प्रसिद्ध महेंद्रगिरी पर्वतमाला के नाम पर रखा गया है, जिसे शक्ति, धैर्य और अडिग संकल्प का प्रतीक माना जाता है.

भारतीय नौसेना के इतिहास में पहली बार किसी युद्धपोत का नाम 'महेंद्रगिरी' रखा गया है.

लंबी दूरी तक मिशन चलाने में सक्षम

INS महेंद्रगिरी में आधुनिक कंबाइंड डीजल ऑर गैस (CODOG) प्रणोदन प्रणाली लगाई गई है. इस तकनीक की मदद से यह सामान्य गश्त के दौरान ईंधन की बचत करता है और जरूरत पड़ने पर गैस टर्बाइन की सहायता से तेज गति भी हासिल कर सकता है. इसी वजह से यह लंबे समय तक समुद्र में तैनात रहकर अभियान चला सकता है.

एक साथ कई खतरों से निपटने की क्षमता

इस युद्धपोत की सबसे बड़ी ताकत इसकी मल्टी-रोल क्षमता है. यह दुश्मन के लड़ाकू विमानों, मिसाइलों और पनडुब्बियों से एक साथ मुकाबला कर सकता है. आधुनिक हथियारों और सेंसर से लैस होने के कारण यह समुद्र में एक पूर्ण युद्धक प्लेटफॉर्म के रूप में काम करता है.

राहत कार्यों में भी निभाएगा अहम भूमिका

INS महेंद्रगिरी सिर्फ युद्ध के लिए ही नहीं बनाया गया है. भारतीय नौसेना के अनुसार, इसका इस्तेमाल मानवीय सहायता, आपदा राहत, खोज एवं बचाव अभियान, समुद्री सुरक्षा गश्त और अंतरराष्ट्रीय सहयोग मिशनों में भी किया जाएगा.

समुद्र में राहत पहुंचाने से लेकर हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की मौजूदगी मजबूत करने तक, यह युद्धपोत कई अहम जिम्मेदारियां निभाने में सक्षम होगा.

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