जंग के बीच एस जयशंकर और अब्बास अराघची की चौथी बार बातचीत, जाने किन मुद्दों पर हुई चर्चा

S Jaishankar And Abbas Araghchi Talks: भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के बीच एक और महत्वपूर्ण बातचीत हुई है.

S Jaishankar And Iran Foreign Minister Abbas Araghchi Talks middile east crisis
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S Jaishankar And Abbas Araghchi Talks: भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के बीच एक और महत्वपूर्ण बातचीत हुई है. इस वार्ता में दोनों नेताओं ने न केवल द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की, बल्कि ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय मंचों से जुड़े मुद्दों पर भी अपने विचार साझा किए. जयशंकर ने सोशल मीडिया पर इस वार्ता के बारे में जानकारी दी. जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, "कल रात ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के साथ एक और बातचीत हुई. द्विपक्षीय मामलों के साथ-साथ ब्रिक्स (BRICS) से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई."

पश्चिम एशिया में तनाव के बीच वार्ता

यह वार्ता ऐसे समय पर हुई है जब पश्चिम एशिया में तनाव काफी बढ़ चुका है. अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों के कारण ईरान पर दबाव बढ़ रहा है, और इसके परिणामस्वरूप क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति में और भी अधिक नाजुकता आई है. फरवरी 2026 के अंत से चल रहा संघर्ष अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर खतरे की घंटी बना हुआ है. यह मार्ग, जो वैश्विक तेल व्यापार का 20 प्रतिशत हिस्सा संभालता है, भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. ऐसे में, भारत और ईरान के बीच यह वार्ता और भी अहम हो जाती है.

कई बार हो चुका है संवाद

डॉ. एस जयशंकर और अब्बास अराघची के बीच यह चौथी बार बातचीत हुई है. इससे पहले, फरवरी 28, मार्च 5 और मार्च 10 को भी दोनों नेताओं ने टेलीफोनिक वार्ता की थी. इन वार्ताओं में मुख्य रूप से क्षेत्रीय संघर्ष, शिपिंग सुरक्षा और भारतीय जहाजों के सुरक्षित मार्ग पर चर्चा की गई. ईरान ने इन वार्ताओं में अमेरिका और इजरायल की कार्रवाइयों को आक्रामक करार देते हुए, ईरान के आत्मरक्षा के अधिकार पर जोर दिया. इसके साथ ही, उन्होंने बहुपक्षीय मंचों जैसे ब्रिक्स से क्षेत्रीय स्थिरता के लिए समर्थन की भी अपील की.

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

पश्चिम एशिया में जारी संकट का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल रहा है. तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, और शिपिंग मार्गों में रुकावट आने के कारण व्यापार में भी अस्थिरता आ रही है. इस संकट के बीच, भारत ने ईरान के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने के साथ-साथ इजरायल के साथ भी अपने रिश्तों को मजबूत किया है. यह वार्ता इस बात का प्रमाण है कि भारत-ईरान संबंध विशेष रूप से चाबहार पोर्ट, ऊर्जा व्यापार और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी जैसे मुद्दों पर आधारित हैं. दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय संवाद संकट के समय में स्थिरता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है. 

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