'भारत स्वाभिमानी है...' जयंशकर के फैन हुए रूसी विदेश मंत्री, तेल खरीद पर बोले- यह हमारा अपना मामला...

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 80वें सत्र के दौरान एक बार फिर दुनिया ने भारत की स्वतंत्र और स्वाभिमानी विदेश नीति की गूंज सुनी और इस बार, तारीफ आई है सीधे रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की ओर से.

Russian Foreign Minister became a fan of Jaishankar
Image Source: Social Media

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 80वें सत्र के दौरान एक बार फिर दुनिया ने भारत की स्वतंत्र और स्वाभिमानी विदेश नीति की गूंज सुनी और इस बार, तारीफ आई है सीधे रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की ओर से.

लावरोव ने स्पष्ट शब्दों में भारत की राष्ट्रीय संप्रभुता, आत्मनिर्भर फैसलों और अमेरिका के दबाव में न झुकने की नीति की सराहना की. उन्होंने न केवल भारत को एक स्वाभिमानी राष्ट्र कहा, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि रूस भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का पूरी तरह समर्थन करता है. इसके साथ ही उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए रूस की मज़बूत प्रतिबद्धता भी दोहराई.

रूस की भारत को लेकर खुली प्रशंसा

भारत को बताया 'स्वाभिमानी' देश

सर्गेई लावरोव ने भारत की नीति की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत उन चुनिंदा देशों में से है जो किसी के दबाव में आकर फैसले नहीं लेता. उन्होंने कहा कि भारत अपनी विदेश नीति खुद बनाता है और अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखता है.

"हम भारत के आत्मसम्मान का सम्मान करते हैं. भारत उन देशों में से है जो खुद निर्णय लेने में सक्षम हैं और किसी तीसरे देश के हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करते,"- सर्गेई लावरोव

तेल खरीद पर अमेरिका को सधी चेतावनी

भारत और रूस के बीच व्यापार विशेष रूप से रूसी कच्चे तेल की खरीद को लेकर अमेरिका की नाराजगी जगजाहिर है. लेकिन लावरोव ने स्पष्ट कर दिया कि भारत को इस पर किसी को सफाई देने की ज़रूरत नहीं है.

"मैं अपने भारतीय सहयोगियों से यह नहीं पूछता कि हमारे तेल का क्या होगा. वे खुद तय करने में सक्षम हैं,"- लावरोव

उन्होंने इशारों में अमेरिका को भी साफ कर दिया कि भारत रूस से तेल खरीदता है तो यह भारत और रूस का आपसी विषय है, इसमें किसी तीसरे देश की राय मायने नहीं रखती.

एस. जयशंकर की विदेश नीति की तारीफ

लावरोव ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की हालिया बयानबाज़ी का जिक्र करते हुए उन्हें स्पष्ट सोच वाला और प्रभावशाली राजनयिक बताया. उन्होंने जयशंकर के उस जवाब की प्रशंसा की जिसमें उन्होंने अमेरिका को दो टूक जवाब देते हुए कहा था, "अगर अमेरिका हमें तेल बेचना चाहता है, तो शर्तों पर चर्चा हो सकती है. लेकिन रूस से हम क्या खरीदते हैं, यह हमारा विषय है."

लावरोव ने इसे “बहुत ही संतुलित और गरिमामय उत्तर” बताया और कहा कि भारत की तरह ही तुर्की भी स्वाभिमान से काम करता है. उन्होंने भारत की तुलना तुर्की जैसे स्वतंत्र रणनीतिक दृष्टिकोण वाले देश से की.

UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन

रूस ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के स्थायी सदस्य बनने के पक्ष में है. लावरोव ने कहा कि मौजूदा वैश्विक शक्ति-संतुलन आज के दौर से मेल नहीं खाता, क्योंकि यह 80 साल पुरानी संरचना पर टिका हुआ है.

"आज का विश्व 1945 का नहीं है. आज एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देश वैश्विक मंच पर बराबरी का प्रतिनिधित्व चाहते हैं और यह न्यायोचित मांग है." लावरोव

उन्होंने परिषद में भारत और ब्राजील जैसे देशों को स्थायी सदस्यता देने की बात दोहराई और इसे सुरक्षा परिषद के लोकतंत्रीकरण की दिशा में जरूरी कदम बताया.

भारत-रूस संबंधों में भविष्य की योजना

लावरोव ने बताया कि भारत और रूस के बीच नियमित संवाद होते रहते हैं और दोनों देश आगामी महीनों में उच्च स्तरीय वार्ताओं और बैठकों के लिए तैयार हैं. उन्होंने खुलासा किया:

  • डॉ. एस. जयशंकर इस वर्ष रूस का दौरा करने वाले हैं.
  • सर्गेई लावरोव खुद भी भारत यात्रा की योजना बना रहे हैं.

साथ ही रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दिसंबर में भारत की यात्रा पर आने वाले हैं, जिसके कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया जा रहा है.

यह दर्शाता है कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों की गहराई बढ़ती जा रही है, चाहे वह ऊर्जा, रक्षा, व्यापार या भू-राजनीतिक स्तर पर हो.

ये भी पढ़ें- UN में सुधार की जरूरत, भारत बड़ी जिम्मेदारियों के लिए तैयार... एस जयशंकर के भाषण की 10 खास बातें