रूस का पोजाइडन या फिर और कुछ... आखिर 33 सालों के बाद परमाणु परीक्षण करने को क्यों मजबूर हुआ अमेरिका?

Trump Quit Nuclear Treaty: यूक्रेन और रूस के बीच तनाव नए उच्च स्तर पर पहुंच गया है. बीती रात रूस ने यूक्रेन के कई प्रमुख शहरों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए, जिनमें बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें शामिल थीं.

Russia Poseidon or something else Why was America forced to conduct nuclear tests after 33 years
Image Source: Social Media/X

Trump Quit Nuclear Treaty: यूक्रेन और रूस के बीच तनाव नए उच्च स्तर पर पहुंच गया है. बीती रात रूस ने यूक्रेन के कई प्रमुख शहरों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए, जिनमें बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें शामिल थीं. राजधानी कीव में बिजली बंद हो गई और नागरिक जीवन प्रभावित हुआ. इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा और अप्रत्याशित कदम उठाते हुए अपने देश के रक्षा विभाग को परमाणु हथियारों का परीक्षण फिर से शुरू करने का आदेश दे दिया है.

अमेरिका ने आखिरी बार 1992 में परमाणु परीक्षण किया था, जब तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश ने भूमिगत परीक्षणों पर रोक लगाने की घोषणा की थी. अब, रूस और चीन की परमाणु शक्ति बढ़ाने की गतिविधियों के जवाब में ट्रंप ने अमेरिकी सुरक्षा और हथियारों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए परीक्षण फिर से शुरू करने का आदेश दिया है.

हाल ही में रूस ने पोजाइडन नामक न्यूक्लियर-पावर्ड सुपर टॉरपीडो का सफल परीक्षण किया है और चीन अपनी परमाणु शस्त्रागार क्षमता तेजी से बढ़ा रहा है. पेंटागॉन की रिपोर्ट के अनुसार चीन के पास 2030 तक 1,000 से अधिक परमाणु हथियार हो सकते हैं. इसी खतरे को देखते हुए, ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करके चेतावनी दी कि अमेरिका को प्रतिस्पर्धी देशों के बराबरी पर बने रहने के लिए अब परमाणु परीक्षण की आवश्यकता है.

ट्रंप का आदेश: नए दौर की तैयारी

पेंटागॉन अब अमेरिका में मौजूद परमाणु परीक्षण साइटों पर तैयारी शुरू कर देगा. इसमें एटम बम का वास्तविक परीक्षण या बिना विस्फोटक के परीक्षण शामिल हो सकता है. विशेषज्ञों का अनुमान है कि परीक्षण पूरी तरह से करने में 24 से 36 महीने लग सकते हैं.

डिफेंस एक्सपर्ट मानते हैं कि रूस के हालिया हथियार परीक्षण और यूक्रेन युद्ध के बीच यह कदम अमेरिकी सुरक्षा के लिए रणनीतिक रूप से जरूरी था. हालांकि रूस ने इस आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया कि उसने अभी तक फुल न्यूक्लियर वेपन का परीक्षण नहीं किया है.

वैश्विक सुरक्षा पर सवाल

1996 में हुई कॉम्प्रीहेंसिव न्यूक्लियर टेस्ट बैन ट्रीटी (CTBT) के तहत भूमिगत परमाणु परीक्षणों पर रोक लगी हुई है. अमेरिका और चीन दोनों ने इस संधि पर हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन औपचारिक रूप से मंजूरी नहीं दी गई है. ट्रंप के इस निर्णय से साफ हो गया है कि वैश्विक परमाणु संतुलन और सुरक्षा पर नए संकट के बादल मंडरा रहे हैं.

यह भी पढ़ें- 2020 Delhi एक ही शॉट में बनी भारत की पहली फिल्म, जिसने रचा नया रिकॉर्ड; जानें कब होगी रिलीज?