RG Kar रेप मर्डर केस में 2 साल बाद बड़ा एक्शन, पूर्व TMC विधायक निर्मल घोष गिरफ्तार

RG Kar Rape Murder Case: आरजी कर केस में दो साल बाद फिर बड़ा एक्शन, पूर्व TMC विधायक निर्मल घोष को पीड़िता के अंतिम संस्कार से जुड़े कथित सबूत मिटाने के मामले में पुलिस ने गिरफ्तार किया.

rg-kar-case-former-tmc-mla-nirmal-ghosh-arrested
Image Source: Internet

RG Kar Rape Murder Case: पश्चिम बंगाल के चर्चित आरजी कर अस्पताल रेप-मर्डर केस में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. 2024 में सामने आए इस मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया था और घटना के बाद अस्पताल प्रशासन से लेकर पुलिस की कार्रवाई तक कई सवाल उठे थे. अब केस से जुड़े एक अलग घटनाक्रम में पुलिस ने तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक निर्मल घोष को गिरफ्तार किया है.

पुलिस के मुताबिक, निर्मल घोष पर पीड़िता के शव के अंतिम संस्कार से जुड़े मामले में कथित तौर पर सबूत मिटाने और जांच को प्रभावित करने का आरोप है. यह कार्रवाई उस नए केस के तहत की गई है, जो आरजी कर मामले की मूल जांच से अलग बताया जा रहा है. निर्मल घोष के अलावा पानीहाटी नगरपालिका के काउंसलर सोमनाथ डे और पीड़िता के परिवार के पड़ोसी संजीव मुखर्जी को भी मामले में नामजद किया गया है.

दो साल बाद फिर चर्चा में आया अंतिम संस्कार का मामला

आरजी कर कांड की दूसरी बरसी के मौके पर 9 अगस्त को अंतिम संस्कार से जुड़े घटनाक्रम की दोबारा जांच की मांग उठी थी. भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने पुलिस से इस पहलू पर नया केस दर्ज कर जांच करने को कहा था.

आरोपों के मुताबिक, पीड़िता का अंतिम संस्कार पानीहाटी में जल्दबाजी में किया गया था और उस दौरान निर्मल घोष भी मौजूद थे. अब पुलिस इसी प्रक्रिया से जुड़े कथित अनियमितताओं और सबूतों को प्रभावित किए जाने के आरोपों की जांच कर रही है.

इस मामले ने इसलिए भी ध्यान खींचा है क्योंकि आरजी कर अस्पताल में 9 अगस्त 2024 की रात एक प्रशिक्षु डॉक्टर के साथ रेप के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी. घटना सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि पूरे देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे.

सबूत मिटाने के आरोपों ने फिर खड़े किए सवाल

आरजी कर मामले की शुरुआत से ही जांच और सबूतों को लेकर सवाल उठते रहे हैं. आरोप लगाए गए थे कि घटना के बाद मामले को दबाने और सबूतों को प्रभावित करने की कोशिश की गई. हालांकि, अब पुलिस की नई जांच सीधे अंतिम संस्कार से जुड़े घटनाक्रम पर केंद्रित है.

पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पीड़िता के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ था या नहीं और इस दौरान किसी तरह के सबूत को जानबूझकर हटाने या नष्ट करने की कोशिश की गई थी या नहीं.

निर्मल घोष की गिरफ्तारी इसी व्यापक जांच का हिस्सा बताई जा रही है. उनके अलावा दो अन्य लोगों को भी मामले में नामजद किया गया है, जिससे जांच का दायरा और बढ़ गया है.

CBI की जांच से अलग है नया मामला

आरजी कर रेप-मर्डर के मूल मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई कर रही है. कोलकाता पुलिस से यह जांच सीबीआई ने अपने हाथ में ली थी. हालांकि, अंतिम संस्कार से जुड़े इस नए मामले की जांच पश्चिम बंगाल पुलिस के स्तर पर की जा रही है.

यानी दोनों मामलों की जांच अलग-अलग पहलुओं पर केंद्रित है. सीबीआई मूल रेप और मर्डर मामले की जांच कर रही है, जबकि पुलिस का नया केस कथित तौर पर अंतिम संस्कार के दौरान हुई गतिविधियों और सबूतों से जुड़े आरोपों की पड़ताल कर रहा है.

फीस माफी और दस्तावेजों पर भी उठे सवाल

अंतिम संस्कार से जुड़े मामले में कुछ ऐसी बातें भी सामने आई हैं, जिन पर सवाल उठाए गए हैं. शुभेंदु अधिकारी ने अंतिम संस्कार की फीस माफ किए जाने और संबंधित दस्तावेजों पर परिवार के सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं होने को लेकर सवाल खड़े किए थे.

उन्होंने इन परिस्थितियों की विस्तृत जांच की जरूरत बताई थी. इसके बाद बैरकपुर पुलिस कमिश्नर को इस मामले में कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे. पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया किस तरह हुई और इसमें नामजद लोगों की क्या भूमिका थी.

निर्मल घोष की गिरफ्तारी से बढ़ी राजनीतिक हलचल

निर्मल घोष का नाम सामने आने के बाद इस मामले में राजनीतिक हलचल भी बढ़ना तय माना जा रहा है. वह तृणमूल कांग्रेस से जुड़े रहे हैं और पूर्व विधायक हैं. ऐसे में उनकी गिरफ्तारी ने आरजी कर मामले को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है.

हालांकि, पुलिस की जांच अभी जारी है और आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी. गिरफ्तारी अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है. जांच एजेंसियां अब यह निर्धारित करेंगी कि अंतिम संस्कार से जुड़े घटनाक्रम में वास्तव में किसी तरह की अनियमितता या सबूत मिटाने की कोशिश हुई थी या नहीं.

आरजी कर कांड की जांच में नया मोड़

करीब दो साल पुराने आरजी कर मामले से जुड़े इस नए केस ने उस रात के बाद हुई घटनाओं पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं. मूल घटना के बाद अस्पताल और पुलिस की कार्रवाई को लेकर पहले ही कई तरह के सवाल सामने आए थे. अब अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को लेकर शुरू हुई अलग जांच उन घटनाओं की नई कड़ी खोल सकती है.

निर्मल घोष की गिरफ्तारी के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती आरोपों की कड़ियों को तथ्यों और सबूतों के आधार पर जोड़ना होगी. साथ ही यह भी साफ करना होगा कि अंतिम संस्कार के दौरान वास्तव में क्या हुआ था और नामजद लोगों की उसमें क्या भूमिका थी. आने वाले दिनों में जांच से सामने आने वाली जानकारी इस नए मामले की दिशा तय करेगी.
ये भी पढ़ें- RG Kar Case: आरजी कर केस में फिर खुलेगी जांच की फाइल, विधायक मां की मांग पर CM शुभेंदु ने लिया बड़ा फैसला