RG Kar Case: आरजी कर केस में फिर खुलेगी जांच की फाइल, विधायक मां की मांग पर CM शुभेंदु ने लिया बड़ा फैसला

RG Kar Rape Murder Case: आरजी कर केस में फिर खुलेगी जांच की फाइल, सीएम सुवेंदु अधिकारी ने किया बड़ा ऐलान

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RG Kar Rape Murder Case: आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की उस भयावह घटना को दो साल पूरे हो चुके हैं, जिसने पूरे देश को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया था. अब पश्चिम बंगाल की सरकार ने इस मामले की जांच को फिर से आगे बढ़ाने का फैसला किया है. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने रविवार को मामले में नए सिरे से जांच की घोषणा करते हुए पुलिस की भूमिका और पीड़िता के अंतिम संस्कार से जुड़े कथित सवालों की भी जांच के आदेश दिए हैं.

पीड़िता की मां के अनुरोध पर लिया फैसला

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बताया कि यह फैसला पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ के अनुरोध पर लिया गया है. रत्ना देबनाथ अब भारतीय जनता पार्टी की विधायक हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मामले की नए सिरे से जांच की मांग की थी. अधिकारी ने कहा कि मुख्य सचिव और विशेषज्ञों की टीम के साथ विस्तृत चर्चा के बाद विशेष आयोग अधिनियम, 1952 के तहत नए सिरे से जांच शुरू करने का फैसला लिया गया है. सरकार का कहना है कि इस प्रक्रिया का मकसद मामले से जुड़े उन पहलुओं को दोबारा देखना है, जिन पर पहले सवाल उठते रहे हैं.

पुलिस की भूमिका पर भी उठे सवाल

मुख्यमंत्री ने शुरुआती जांच के दौरान पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रही थी. इसके साथ ही पीड़िता के अंतिम संस्कार से जुड़े कथित घटनाक्रम की अलग से जांच कराने का भी फैसला किया गया है. अधिकारी ने बैरकपुर के पुलिस आयुक्त को इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया है. सरकार अब यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ था या नहीं और क्या इस दौरान किसी तरह की अनियमितता हुई थी.

अंतिम संस्कार को लेकर भी जांच के आदेश

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि नतागढ़ कदमतला श्मशान घाट पर पीड़िता का शव शुरुआत में अंतिम संस्कार की कतार में तीसरे स्थान पर था, लेकिन बाद में उसे अचानक पहले स्थान पर कर दिया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि अंतिम संस्कार जल्दबाजी में कराया गया. उन्होंने यह भी दावा किया कि परिवार की ओर से निर्धारित अंतिम संस्कार शुल्क का भुगतान नहीं किया गया था और आवश्यक पारिवारिक हस्ताक्षर भी नहीं लिए गए थे. अधिकारी ने इस पूरे घटनाक्रम में निर्मल घोष, सोमनाथ दे और संजीब मुखर्जी की भूमिका की जांच की बात कही है. पानीहाटी में पीड़िता की याद में आयोजित शोक सभा में मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतिम संस्कार से जुड़े आरोपों की राज्य पुलिस अलग से जांच करेगी. उनका कहना है कि यह पहल केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की मौजूदा जांच के दायरे से अलग है.

9 अगस्त 2024 को सामने आया था मामला

आरजी कर मेडिकल कॉलेज में 9 अगस्त 2024 को एक 31 वर्षीय महिला स्नातकोत्तर प्रशिक्षु डॉक्टर का शव सेमिनार हॉल में मिला था. पोस्टमार्टम में दुष्कर्म और हत्या की पुष्टि हुई थी. घटना सामने आने के बाद पूरे देश में जबरदस्त आक्रोश फैल गया था और डॉक्टरों ने लंबे समय तक विरोध प्रदर्शन किया था. शुरुआत में कोलकाता पुलिस ने मामले की जांच की थी, लेकिन बाद में कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश पर जांच सीबीआई को सौंप दी गई. नागरिक स्वयंसेवक संजय रॉय को गिरफ्तार किया गया और बाद में विशेष अदालत ने उसे दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई.

संजय रॉय को मिली थी उम्रकैद

मामले में संजय रॉय को मुख्य आरोपी के तौर पर दोषी ठहराया गया. वहीं आरजी कर मेडिकल कॉलेज के तत्कालीन प्रिंसिपल डॉ. संदीप घोष पर भी मामले से जुड़े गंभीर आरोप लगे थे और सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार किया था. हालांकि, पीड़िता के परिवार की ओर से शुरू से ही जांच को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं. परिवार को आशंका रही है कि वारदात में एक से ज्यादा लोग शामिल हो सकते हैं और मामले के सभी पहलुओं की पूरी तरह जांच नहीं हुई.

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