दुनियाभर में तेजी से घट रही इस धर्म की आबादी, हिंदुओं का क्या हाल? नई रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा

Pew-Templeton Global Religious Futures Project द्वारा हाल ही में जारी की गई रिपोर्ट ने यह खुलासा किया है कि ईसाई धर्म की वैश्विक हिस्सेदारी में गिरावट देखी जा रही है. हालांकि ईसाई धर्म दुनिया का सबसे बड़ा धर्म बना हुआ है.

Religious Diversity Index Pew-Templeton Global Religious Futures Project
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Religious Diversity Index: धर्म और इसके वर्चस्व की लड़ाई एक अनंत संघर्ष है. यह लड़ाई केवल आस्थाओं और विश्वासों के बीच नहीं, बल्कि सभ्यताओं और संस्कृतियों के संघर्ष का प्रतीक भी है. जब धर्म सत्ता के रूप में स्थापित होता है, तो वह न केवल आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करता है, बल्कि समाज के ढांचे को भी आकार देता है. धर्मीय आबादी में हो रहे बदलावों पर एक नई रिपोर्ट ने दुनिया के धार्मिक परिदृश्य को नया मोड़ दिया है. 

Pew-Templeton Global Religious Futures Project द्वारा हाल ही में जारी की गई रिपोर्ट ने यह खुलासा किया है कि ईसाई धर्म की वैश्विक हिस्सेदारी में गिरावट देखी जा रही है. हालांकि ईसाई धर्म दुनिया का सबसे बड़ा धर्म बना हुआ है, लेकिन इसकी जनसंख्या का अनुपात बाकी धर्मों और कुल वैश्विक आबादी के मुकाबले कम हो रहा है. रिपोर्ट में वैश्विक धार्मिक परिदृश्य में हो रहे बदलावों की गहरी तस्वीर सामने आई है.

ईसाई धर्म की हिस्सेदारी में कमी

रिपोर्ट के अनुसार, 2020 तक दुनिया में 2.3 अरब लोग, यानी लगभग 28.8 प्रतिशत लोग, ईसाई धर्म को मानते थे. हालांकि, यह संख्या 2010 से 2020 के बीच 2.1 अरब से बढ़कर 2.3 अरब हुई, यानी 6 प्रतिशत की वृद्धि हुई, लेकिन इस वृद्धि के बावजूद वैश्विक आबादी में ईसाइयों की हिस्सेदारी कम हो गई. यह गिरावट 31 प्रतिशत से घटकर 28.8 प्रतिशत तक पहुंच गई है. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उसी दौरान गैर-ईसाई धर्मों और कुल वैश्विक आबादी में 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई.

गिरती जन्मदर और धर्म परिवर्तन के कारण

ईसाई धर्म की वैश्विक हिस्सेदारी घटने के प्रमुख कारणों में दो महत्वपूर्ण कारक सामने आए हैं. पहला, जन्म दर में गिरावट, जो कई देशों और क्षेत्रों में देखी जा रही है. दूसरा, वयस्क होने पर धर्म परिवर्तन या धार्मिक असंबद्धता का बढ़ता रुझान. आंकड़ों के मुताबिक, हाल के वर्षों में ईसाई धर्म को छोड़ने वाले लोगों की संख्या नए ईसाई बनाने वाले लोगों से तीन गुना अधिक रही है. इसमें से अधिकांश ने किसी अन्य धर्म को नहीं अपनाया, बल्कि खुद को धर्म से अलग कर लिया.

अफ्रीका बना धर्म का नया केंद्र 

जहां एक तरफ ईसाई धर्म की संख्या यूरोप और अमेरिका में घट रही है, वहीं दूसरी ओर अफ्रीका में इसका प्रसार तेजी से हो रहा है. यूरोप में ईसाइयों की संख्या लगभग 50 करोड़ तक घट गई है, जो 9 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है. उत्तर अमेरिका में भी यह संख्या घटकर 23 करोड़ रह गई है. इसके विपरीत, उप-सहारा अफ्रीका में ईसाई आबादी 31 प्रतिशत बढ़कर 69 करोड़ तक पहुंच गई है. 2020 के आंकड़ों के मुताबिक, अफ्रीका में दुनिया के 31 प्रतिशत ईसाई रहते हैं, जबकि यूरोप में यह संख्या घटकर 22 प्रतिशत हो गई है. इस बदलाव ने धार्मिक नक्शे को फिर से आकार देना शुरू कर दिया है.

वैश्विक धार्मिक परिदृश्य का नया रूप

रिपोर्ट से यह भी सामने आया है कि दुनिया की कुल धार्मिक आबादी का लगभग 75.8 प्रतिशत किसी न किसी धर्म से जुड़ा हुआ है. जबकि 24.2 प्रतिशत लोग खुद को किसी धर्म से असंबद्ध मानते हैं, जिन्हें नास्तिक कहा जाता है. 2020 की रिपोर्ट में अन्य धर्मों की वैश्विक हिस्सेदारी इस प्रकार है:

  • ईसाई धर्म – 28.8 प्रतिशत
  • इस्लाम – 25.6 प्रतिशत
  • हिंदू धर्म – 14.9 प्रतिशत
  • बौद्ध धर्म – 4.1 प्रतिशत
  • नास्तिक या धर्म से असंबद्ध – 24.2 प्रतिशत 

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