Balochistan Freedom: पाकिस्तान इस समय कई बड़ी चुनौतियों से जूझ रहा है. एक तरफ पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में लोग महंगाई और अपने अधिकारों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. वहीं दूसरी ओर बलूचिस्तान में अलगाववाद एक बार फिर तेज हो गया है. हाल के दिनों में बलूचिस्तान की आजादी की मांग ने पाकिस्तान की चिंता और बढ़ा दी है.
पाकिस्तान के लिए क्यों बढ़ी मुश्किल?
PoK में पिछले कई महीनों से लोग सड़कों पर उतर रहे हैं. महंगाई, बिजली के बढ़ते बिल, आटे-गेहूं की कमी और राजनीतिक अधिकारों की मांग को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. कई जगह प्रदर्शन हिंसक भी हुए हैं.
इसी बीच बलूचिस्तान में भी हालात गंभीर बने हुए हैं. हाल ही में मस्तुंग इलाके के पास बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के काफिले पर हमला किया. इस हमले में कई सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई, जबकि आम नागरिक भी इसकी चपेट में आए. लगातार हो रहे ऐसे हमलों ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
बलूचिस्तान पाकिस्तान के लिए इतना अहम क्यों?
बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है. इसकी सीमा ईरान और अफगानिस्तान से लगती है और इसका लंबा समुद्री तट अरब सागर तक जाता है. इसी वजह से यह इलाका रणनीतिक और आर्थिक दोनों नजरिए से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.
ग्वादर, ओरमारा और पासनी जैसे बंदरगाह पाकिस्तान के समुद्री व्यापार के लिए बेहद जरूरी हैं. इसके अलावा यहां तांबा, सोना और कई दूसरे कीमती खनिज भी बड़ी मात्रा में पाए जाते हैं. यही कारण है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा जरूरतों में इस क्षेत्र की बड़ी भूमिका है.
चीन के लिए भी बढ़ सकती है परेशानी
बलूचिस्तान में ही चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) का सबसे अहम हिस्सा मौजूद है. ग्वादर पोर्ट इसी परियोजना का प्रमुख केंद्र है, जिसके जरिए चीन अरब सागर तक सीधी पहुंच बनाना चाहता है.
अगर बलूचिस्तान में हिंसा और अस्थिरता बढ़ती है या अलगाववाद मजबूत होता है, तो इसका असर CPEC पर भी पड़ सकता है. इससे चीन के निवेश, निर्माण कार्य और वहां काम कर रहे कर्मचारियों की सुरक्षा पर भी खतरा बढ़ सकता है.
पाकिस्तान के सामने बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बलूचिस्तान में हालात और बिगड़ते हैं, तो इसका असर सिर्फ पाकिस्तान की सुरक्षा पर ही नहीं, बल्कि उसकी अर्थव्यवस्था, व्यापार, ऊर्जा परियोजनाओं और चीन के साथ उसके रणनीतिक संबंधों पर भी पड़ सकता है. ऐसे में पाकिस्तान के लिए इस संकट से बाहर निकलना आसान नहीं होगा.
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