वॉशिंगटन: रूस-यूक्रेन युद्ध, वैश्विक तेल व्यापार, और अंतरराष्ट्रीय रणनीति से जुड़ी नई घटनाओं के बीच अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम के हालिया बयान ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है. अमेरिकी सीनेट की बजट समिति के अध्यक्ष और रिपब्लिकन पार्टी के प्रभावशाली नेता ग्राहम ने दावा किया है कि भारत पर लगाए गए भारी टैरिफ ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप से मिलने के लिए मजबूर किया.
सीनेटर ग्राहम का कहना है कि अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ, जो मुख्यतः रूस से आयातित तेल और गैस पर केंद्रित था, ने रूस की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर डाला. यह दबाव इतना बढ़ गया कि पुतिन को डोनाल्ड ट्रंप के साथ सीधी बातचीत का रास्ता अपनाना पड़ा.
पुतिन-ट्रंप की मुलाकात: टैरिफ का नतीजा?
15 अगस्त को अमेरिका के अलास्का में आयोजित एक उच्च स्तरीय सम्मेलन में व्लादिमीर पुतिन और डोनाल्ड ट्रंप के बीच बंद कमरे में बातचीत हुई. यह मुलाकात कई मायनों में ऐतिहासिक मानी जा रही है, और सीनेटर लिंडसे ग्राहम का कहना है कि इस मुलाकात का आधार भारत पर लागू किया गया नया टैरिफ है.
ग्राहम के अनुसार, ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ ने अप्रत्यक्ष रूप से रूस पर दबाव बनाया क्योंकि भारत, रूस से ऊर्जा आयात करने वाले सबसे बड़े देशों में से एक है. जब भारत पर इतनी भारी आर्थिक शर्तें लागू हुईं, तो इसका प्रभाव रूसी निर्यात और राजस्व पर पड़ा, जिससे पुतिन को कूटनीतिक समाधान की ओर कदम बढ़ाना पड़ा.
ग्राहम की चेतावनी: रूस की जेब पर हमला जरूरी
सीनेटर ग्राहम, जो अमेरिका में रूस के खिलाफ सख्त नीति के समर्थक माने जाते हैं, का मानना है कि अगर अमेरिका और उसके सहयोगी देश रूस की आर्थिक नींव को कमजोर करने में कामयाब होते हैं, तो यूक्रेन में जारी युद्ध को समाप्त करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम साबित होगा.
उन्होंने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा कि ट्रंप और सीनेटर मार्को रुबियो जैसे नेताओं को पुतिन के सामने यह स्पष्ट करना होगा कि अगर रूस ने युद्ध नहीं रोका, तो अमेरिका उसके आर्थिक ढांचे को पूरी तरह तहस-नहस कर देगा.
चीन की बारी: जिनपिंग पर भी दवाब की रणनीति
सीनेटर ग्राहम ने अपने बयान में चीन को लेकर भी बड़ा दावा किया. उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका अपनी रणनीति को आगे बढ़ाते हुए चीन पर भी इसी तरह का दबाव बनाए, तो रूस के लिए यूक्रेन युद्ध जारी रखना लगभग असंभव हो जाएगा.
ग्राहम का मानना है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस पूरे संघर्ष को रोकने की असली ताकत रखते हैं. अगर जिनपिंग यह संदेश दें कि वह अब रूस को समर्थन नहीं देंगे और इस युद्ध से दूरी बनाएंगे, तो पुतिन के पास पीछे हटने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा.
उन्होंने कहा, "यदि जिनपिंग पुतिन से कहें कि अब युद्ध रोकने का समय आ गया है क्योंकि यह चीन के हितों को नुकसान पहुंचा रहा है, तो यह एक निर्णायक मोड़ हो सकता है."
भारत पर सख्ती: ग्राहम की रणनीति का हिस्सा
भारत को लेकर ग्राहम का रुख सख्त होता जा रहा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाना ही रूस को कमजोर करने की कुंजी है. उन्होंने सुझाव दिया कि अमेरिका को रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक का टैरिफ लगाना चाहिए, ताकि उन्हें इस व्यापार से पीछे हटने के लिए मजबूर किया जा सके.
भारत और चीन दोनों रूस के सबसे बड़े तेल ग्राहक हैं. ग्राहम का मानना है कि यदि इन दोनों देशों पर भारी आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाएं, तो रूस की राजस्व आपूर्ति रुक जाएगी, जिससे उसके लिए युद्ध जारी रखना संभव नहीं रहेगा.
ये भी पढ़ें- पाकिस्तान का इस्तेमाल कर रहा अमेरिका? मुनीर को चुकानी पड़ेगी कीमत, ट्रंप के प्लान पर हुआ बड़ा खुलासा