Political Popcorn: महाराष्ट्र में वोटर लिस्ट पर घमासान, पंजाब में ED की 200 पन्नों की रिपोर्ट पर संग्राम

महाराष्ट्र की वोटर लिस्ट में चले ताजा शुद्धिकरण अभियान SIR ने राज्य की सियासत में जोरदार खलबली मचा दी है. विपक्ष आरोप लगा रहा है कि लाखों नाम काट दिए गए, जबकि प्रशासनिक गलियारे इसे फर्जी मतदाताओं की सफाई बता रहे हैं.

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Political Popcorn

1. वोटर लिस्ट में नाम गुम, दिल की धड़कनें तेज!

​महाराष्ट्र में ‘स्पेशल समरी रिविजन’ पर सियासी संग्राम!

​महाराष्ट्र की वोटर लिस्ट में चले ताजा शुद्धिकरण अभियान SIR ने राज्य की सियासत में जोरदार खलबली मचा दी है. विपक्ष आरोप लगा रहा है कि लाखों नाम काट दिए गए, जबकि प्रशासनिक गलियारे इसे फर्जी मतदाताओं की सफाई बता रहे हैं. अलबत्ता यह प्रश्न अपनी जगह कायम है कि जब-जब चुनाव पास आते हैं, वोटर लिस्ट तकनीकी सुधार से ज्यादा राजनीतिक बारूद क्यों बन जाती है? राजनीतिक प्रेक्षक मान रहे हैं कि डिजिटल वेरिफिकेशन के इस युग में प्रशासन का काम दुरुस्त तो हो रहा है, लेकिन दोनों खेमों के बयानों ने चाय की थड़ियों का तापमान सचमुच आसमान पर पहुंचा दिया है!

2. अयोध्या में जब प्रशासनिक कमान ने ली एंट्री!

अध्यात्म के आंगन में प्रोफेशनलिज्म की दस्तक!

​श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पूर्व एयर मार्शल को अपना पहला सीईओ नियुक्त कर प्रबंधन को पूरी तरह हाईटेक और पेशेवर बनाने का संकेत दे दिया है. विपक्ष जहां इसे लेकर थोड़ी नपी-तुली बयानबाजी कर रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इसे विश्वस्तरीय व्यवस्था का हिस्सा बता रहा है. अलबत्ता संतों की चौपालों से लेकर राजनीतिक ड्राइंग रूम्स तक यह चर्चा गर्म है कि अब फाइलों और प्रोटोकॉल का अनुशासन धर्मनगरी की व्यवस्थाओं को कितना सुगम बनाएगा. राजनीतिक प्रेक्षक मानते हैं कि लाखों की भीड़ को संभालने के लिए यह कदम सचमुच वक्त की जरूरत था, हालांकि पारंपरिक व्यवस्था और आधुनिक एडमिनिस्ट्रेशन का तालमेल कैसा बैठेगा, यह अभी यक्ष प्रश्न है?

3. यूक्रेन-पोलैंड की उड़ान और कूटनीति का संतुलन साधते ‘जयशंकर’!

लुटियंस से लेकर यूरोप तक भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की चर्चा!

​विदेश मंत्री एस. जयशंकर का ताजा कूटनीतिक दौरा वैश्विक मंचों के साथ-साथ घरेलू राजनीति में भी छाया हुआ है. सरकार इसे भारत के बढ़ते वैश्विक कद और शांति दूत की भूमिका के तौर पर पेश कर रही है, वहीं विपक्ष संसद में विदेश नीति पर और अधिक स्पष्टता की मांग दोहरा रहा है. अलबत्ता विदेश मंत्री की दो-टूक और हाजिरजवाबी की तारीफ दोनों ही खेमे दबी जुबान में करते हैं. राजनीतिक प्रेक्षक मान रहे हैं कि जटिल वैश्विक समीकरणों के बीच भारत सचमुच एक मजबूत धुरी बनकर उभरा है, पर भू-राजनीतिक दबावों के बीच यह संतुलन कब तक टिकेगा, यह विदेश नीति का यक्ष प्रश्न है!

4. कुर्सी, ‘कागज़’ और 200 पन्नों का सियासी रायता!

ट्रांसफर-पोस्टिंग की ‘दुकानदारी’ पर मचा घमासान!

​चंडीगढ़ के सत्ता के गलियारों में उस वक्त जोरदार हलचल मच गई, जब प्रवर्तन निदेशालय ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के सामने पूरे 200 पन्नों का भारी-भरकम पुलिंदा खोलकर रख दिया. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मुख्यमंत्री कार्यालय के रसूखदार दायरों से ट्रांसफर, मनचाही पोस्टिंग, भारी-भरकम ठेकों और शराब-खनन के लाइसेंस बांटने का एक समानांतर ‘बाजार’ चलाया जा रहा था. सोने पर सुहागा यह कि जांच एजेंसी ने पंजाब पुलिस पर जांच में बिल्कुल हाथ न बंटाने और फाइलें दबाने का तीखा ठप्पा भी लगा दिया. ​अलबत्ता सत्ताधारी खेमे का साफ कहना है कि जब-जब दिल्ली से लेकर पंजाब तक जनहितकारी योजनाओं का डंका बजता है, तब-तब जांच एजेंसियों की इस तरह की 'स्क्रिप्ट' बाहर आ जाना कोई नई बात नहीं है. वहीं विरोधी दल इसे ‘कट्टर ईमानदारी’ के मुखौटे पर बड़ा दाग बताकर मुख्यमंत्री की कुर्सी तक उंगली उठा रहे हैं. ​राजनीतिक प्रेक्षक मानते हैं कि 200 पन्नों के इस कानूनी चक्रव्यूह ने राज्य की प्रशासनिक साख को सचमुच कठघरे में ला खड़ा किया है!

5. मैदान में हवा में छलांग, नाम में पूरा ‘हिंदुस्तान’!

जोंटी रोड्स का दिल छूने वाला अंदाज!

​क्रिकेट के मैदान पर नामुमकिन कैचों को मुमकिन बनाने वाले दक्षिण अफ्रीका के दिग्गज फील्डर जोंटी रोड्स ने एक बार फिर भारतीय फैंस का दिल जीत लिया है. भारत की संस्कृति और मिट्टी से जोंटी का प्रेम किसी से छिपा नहीं है, लेकिन इस बार चर्चा उनकी लाडली बेटी के नाम की अनोखी कहानी को लेकर छिड़ गई है. जोंटी ने खुद खुलासा किया है कि 2015 में मुंबई में जन्मी उनकी बेटी का नाम ‘इंडिया’ महज एक संयोग नहीं, बल्कि 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए ‘मेक इन इंडिया’ विज़न का एक भावुक और सीधा असर था. बात यहीं नहीं रुकी, 2017 में बेटे नाथन के आगमन पर तो जोंटी ने ठहाका लगाते हुए कह दिया था कि उनका परिवार सचमुच ‘मेकिंग एन इंडिया’ के मिशन पर लगा है.

​अलबत्ता सोशल मीडिया और राजनीतिक चौपालों में यह किस्सा आते ही दोनों खेमों में अपनी-अपनी व्याख्याएं शुरू हो गईं; समर्थकों ने इसे वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव का प्रतीक माना, तो आलोचकों ने इसे एक विदेशी क्रिकेटर का महज़ मीठा कूटनीतिक शिष्टाचार करार दिया. ​राजनीतिक प्रेक्षक इस भावनात्मक जुड़ाव को सचमुच भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ का एक नायाब नमूना मान रहे हैं!

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