1.युवा ब्रिगेड की एंट्री और बुजुर्गों का संशय !
नई सोच का दम भरती पीढ़ी, लेकिन तजुर्बे की चाबी अभी भी बड़ों के पास!
प्रमुख राजनीतिक दलों में संगठन के पुनर्गठन को लेकर नई पीढ़ी के चेहरों को आगे लाने की कवायद तेज है. सोशल मीडिया फ्रेंडली युवा चेहरे पार्टी की अग्रिम पंक्ति में जगह बना रहे हैं, जिससे पुराने दिग्गजों के माथे पर हल्की सी शिकन देखी जा सकती है. अलबत्ता पार्टी आलाकमान संगठन के तजुर्बे और नई ऊर्जा के बीच संतुलन साधने की हरसंभव कोशिश में लगा है. राजनीतिक प्रेक्षक मानते हैं कि यह पीढ़ीगत बदलाव हर दशक की अनिवार्य जरूरत है. सचमुच वरिष्ठ नेताओं की पकड़ अभी भी जमीनी नेटवर्क पर बेहद मजबूत है. ऐसे में प्रश्न यह है कि क्या नई ब्रिगेड सिर्फ भाषणों तक सीमित रहेगी या चुनावी रणनीति की वास्तविक कमान भी संभालेगी?
2.दिल्ली के फाइव स्टार में 'माननीय' का सुरूर और आधी रात का ड्रामा!
जाम छलका तो मर्यादा फिसली... लुटियंस का सुइट छूटा और रिश्तेदार की शरण में कटी रात!
दिल्ली के लुटियंस जोन के फाइव स्टार गलियारों से लेकर पटना के सियासी अखाड़े तक एक ‘माननीय’ का ताजा दिल्ली दौरा जबर्दस्त चर्चा में है. हुआ यूं कि राजधानी के एक नामी होटल के चौथे माले पर स्थित लग्जरी सुइट में देर रात नेताजी की महफिल सजी थी. सचमुच सुरूर जब सिर चढ़कर बोला तो माननीय अपने पद की गरिमा ही भूल बैठे और वहां की महिला मैनेजर से बदसलूकी कर बैठे. अलबत्ता सामने वाली ने भी नेताजी का सियासी रौब दरकिनार कर ऐसा 'सख्त सबक' सिखाया कि माननीय के होश ठिकाने आ गए. हालात ऐसे बिगड़े कि नेताजी को आधी रात को ही उल्टे पांव होटल छोड़कर अपने एक रिश्तेदार के घर शरण लेनी पड़ी.राजनीतिक प्रेक्षक चटखारे लेकर बता रहे हैं कि सुबह होते-होते इस 'सुइट कांड' को रफा-दफा करने और CCTV फुटेज को परदे के पीछे ‘गायब’ करवाने में कथित तौर पर करीब 23 लाख रुपयों का ‘डैमेज कंट्रोल पैकेज’ चला. 'चिराग' की रोशनी में मंत्री पद तक पहुंचे इन नेताजी की इस दिल्ली डायरी से अब पटना दरबार से लेकर पार्टी आलाकमान तक भारी असहजता है !
3.साइबर मंच पर समय का देसी स्वैग और सीएम के ठहाके!
कल तक नोटिस का डर, आज सरकारी मंच पर आदर !
मुंबई के सियासी और ब्यूरोक्रेसी के गलियारों में महाराष्ट्र साइबर सेल के हालिया अवेयरनेस इवेंट की दिलचस्प गपशप छाई हुई है. सितारों से सजे मंच पर स्टैंडअप कॉमेडियन समय रैना ने जैसे ही माइक थामा, अपने उसी बेबाक देसी अंदाज से माहौल को हंसी के फव्वारों में बदल दिया. सचमुच पुराने विवादों की पृष्ठभूमि के बाद पहली बार साइबर सेल से सम्मान मिलने पर समय ने खुद पर ही ऐसा तंज कसा कि दर्शक दीर्घा में मौजूद पंकज त्रिपाठी और शरद केलकर भी लोटपोट हो गए,अलबत्ता कॉमेडियन का यह कहना कि "1930 हेल्पलाइन नंबर तो मेरे फोन में पहले से ही सेव है और आज पहली बार हुआ कि अफसर घर से उठाकर सम्मान देने लाए हैं", सबसे बड़ा पंच साबित हुआ. राजनीतिक प्रेक्षक और मंच पर मौजूद आला अफसरान तब अपनी हंसी नहीं रोक पाए जब उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में जोड़ा कि "चाहे अमेरिका में रहो या इंडिया में, साइबर सेल ढूंढ ही लेगी"
4.अमेरिका में ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ का दोगलापन और X का सस्पेंशन अस्त्र!
दुनिया को अभिव्यक्ति का ज्ञान बांटने वाला अमेरिका, खुद के आंगन में संवाद से डर गया!
दुनिया भर को लोकतंत्र, मानवाधिकार और 'फ्रीडम ऑफ स्पीच' का पाठ पढ़ाने वाले अमेरिका में एक बार फिर दोहरे रवैये की बानगी देखने को मिली है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के 29 अगस्त को न्यूयॉर्क स्थित मैडिसन स्क्वायर गार्डन में प्रस्तावित ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ से ठीक पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X ने आयोजक संस्था 'AHEAD फोरम' का अकाउंट बिना कोई कारण बताए सस्पेंड कर दिया. सचमुच यह विडंबना ही है कि जो मंच सार्वभौमिक एकता और संवाद के नाम पर आयोजित हो रहा है, उसी के आयोजकों की डिजिटल जुबान पर ताला जड़ दिया गया. राजनीतिक प्रेक्षक इस कदम को अमेरिकी जमीन पर चल रही उस लॉबिंग से जोड़कर देख रहे हैं जो संघ प्रमुख के दौरे के विरोध और प्रतिबंध की मांग में जुटी थी. क्या अमेरिका की अभिव्यक्ति की आजादी सिर्फ चुनिंदा नैरेटिव के लिए ही आरक्षित है, या फिर भारतीय विचार के वैश्विक मंच पर पहुंचते ही पश्चिमी 'लिबरल चश्मा' धुंधला हो जाता है?
5.2029 की रेस में भी ‘ब्रांड मोदी’ का जलवा, ताजा सर्वे ने लगाई जनता के मूड पर मुहर!
विपक्ष बनाता रहा गठबंधनों की खिचड़ी, उधर जनता ने फिर कह दिया-'आएंगे तो मोदी ही'!
देश के सियासी गलियारों में कल सामने आए एक बड़े राष्ट्रव्यापी सर्वे के ताजा आंकड़ों ने विपक्ष के खेमे में खलबली मचा दी है. सर्वे के नतीजे साफ बयां कर रहे हैं कि देश के अगले प्रधानमंत्री के तौर पर आज भी जनता-जनार्दन की पहली और सबसे मजबूत पसंद सिर्फ और सिर्फ नरेंद्र मोदी ही बने हुए हैं. पूरे 49 प्रतिशत लोगों ने एक सुर में मोदी के नेतृत्व और विकास के ट्रैक रिकॉर्ड पर अटूट भरोसा जताते हुए उन्हें फिर से प्रधानमंत्री की कुर्सी पर देखने की इच्छा जताई है. वहीं, दूसरी तरफ खुद को मुख्य विकल्प बताने वाले राहुल गांधी महज 27 फीसदी पर सिमट कर पीछे छूट गए हैं, राजनीतिक प्रेक्षक मान रहे हैं कि यह आंकड़ा केवल एक सर्वे नहीं बल्कि देश की 140 करोड़ जनता के दिलों में 'मोदी मैजिक' और मजबूत वैश्विक साख का आईना है. जमीन पर जनता का अटूट विश्वास आज भी सत्ता के शिखर पर नरेंद्र मोदी के साथ ही खड़ा नजर आ रहा है.
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