Political popcorn: कांग्रेस में 'बाहरी बनाम पुराने' की जंग! 21 नेताओं ने खोला आलाकमान के खिलाफ मोर्चा

Political popcorn: यूपी कांग्रेस में बाहरी नेताओं की एंट्री और टिकट के आश्वासनों से बढ़ी नाराजगी, 21 वरिष्ठ नेताओं की चिट्ठी ने आलाकमान के सामने खड़ी कर दी बड़ी चुनौती.

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Political Popcorn

1.'आयातित' चेहरों पर मची रार, अपनों को सता रहा टिकट का बुखार!

यूपी कांग्रेस में बगावत की चिंगारी..21 दिग्गजों की चिट्ठी ने बढ़ाई दिल्ली दरबार की धड़कनें !

उत्तर प्रदेश के सियासी अखाड़े में कांग्रेस के भीतर उस वक्त हड़कंप मच गया जब दूसरे दलों से आ रहे 'पैराशूट' नेताओं की आवभगत के खिलाफ 21 कद्दावर नेताओं ने मोर्चा खोल दिया. राजेंद्र पाल गौतम की मनमर्जी और बाहरी चेहरों को सीधे टिकट के आश्वासनों से जमीन पर वर्षों से झंडा उठाने वाले कैडर का पारा सातवें आसमान पर है. राहुल गांधी के 'मूल काडर को तवज्जो' वाले बहुचर्चित फॉर्मूले को दरकिनार होते देख अब वरिष्ठों ने सीधे आलाकमान को चिट्ठी भेजकर न्याय की गुहार लगाई है. राजनीतिक प्रेक्षक इसे पुराने वफादारों और नए मुसाफिरों के बीच वर्चस्व की जंग मान रहे हैं. अलबत्ता जब चुनाव सिर पर हों तो ऐसे में अपनों को मनाना नेतृत्व के लिए आसान नहीं दिखता. प्रश्न यही है कि क्या बाहरी चमक के फेर में पार्टी अपने वफादार जमीन की अनदेखी कर पाएगी? सचमुच लखनऊ से दिल्ली तक इस चिट्ठी ने अंदरूनी संतुलन को बुरी तरह हिला दिया है !

2.दिल्ली में इम्तिहान, इंदौर में सम्मान… दांव पर राहुल का पैगाम!

डूसू के दंगल से 'छात्रों की गूंज'.. 19 तारीख का फैसला तय करेगा युवा नैरेटिव का वजन !

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के चुनावी संग्राम को कांग्रेस ने अपनी सीधी प्रतिष्ठा की लड़ाई बना लिया है, जहां विपक्षी दलों से भी समर्थन की जुगत भिड़ाई जा रही है. 19 तारीख को आने वाले नतीजों पर सबकी नजरें इसलिए टिकी हैं क्योंकि ठीक उसी दिन इंदौर में राहुल गांधी 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के जरिए देश के युवाओं से मुखातिब होंगे. राजनीतिक प्रेक्षक मानते हैं कि डूसू की जमीन से निकला जनादेश राष्ट्रीय स्तर पर राहुल की युवा अपील की धार तय करेगा. अलबत्ता छात्र राजनीति की इस चौसर पर जरा सी भी चूक इंडी गठबंधन के भीतर नेतृत्व के समीकरणों पर सवाल खड़े कर सकती है. अब प्रश्न यही बन गया है कि क्या कैंपस की यह नब्ज राष्ट्रीय नैरेटिव को नया पंख दे पाएगी? सचमुच चुनावी नतीजों के साथ युवाओं के बीच साख की परीक्षा का यह रोमांचक मुकाबला अब क्लाइमेक्स की ओर है !

3.थाली पर छिड़ा सियासी संग्राम, बाबा के बयान पर बंगाल में कोहराम!

मछली-मांस के बयान पर बिफरी कांग्रेस..धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ जमीनी लामबंदी की तैयारी !

धीरेंद्र शास्त्री द्वारा मछली-मांस खाने को लेकर दिए गए बयान ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया बवंडर खड़ा कर दिया है, जिसे कांग्रेस ने सीधे बंगाली अस्मिता से जोड़ दिया है. पार्टी के प्रदेश प्रभारी ने राहुल गांधी से हरी झंडी लेकर ब्लॉक और जिला स्तर पर घर-घर जाकर आंदोलन छेड़ने का फरमान जारी कर दिया है. तर्क दिया जा रहा है कि मां दुर्गा को षष्ठी के बाद मछली-मांस के भोग की सदियों पुरानी परंपरा पर कोई बाहरी टिप्पणी बर्दाश्त नहीं होगी. राजनीतिक प्रेक्षक इसे तृणमूल के सांस्कृतिक किले में सेंध लगाने और क्षेत्रीय भावनाओं को साधने की नपी-तुली चाल मान रहे हैं. अलबत्ता खान-पान की आस्था को जब राजनीति की आंच मिलती है तो ध्रुवीकरण की लकीरें खिंचना तय है. अब प्रश्न यही है कि क्या थाली का यह दंगल कांग्रेस को बंगाल की सड़कों पर खोई जमीन वापस दिला पाएगा? सचमुच धार्मिक बयानबाजी को जन-आंदोलन में तब्दील करने का यह पैंतरा काफी दिलचस्प मोड़ ले चुका है !

4.सत्र की आहट से उड़ी नींद, 'वन नेशन-वन इलेक्शन' पर जयराम की चौसर!

सत्रावसान न होने से खलबली..संभावित स्पेशल सेशन के चक्रव्यूह से परेशान विपक्ष !

संसद का औपचारिक सत्रावसान न होने से कांग्रेस के रणनीतिकारों के माथे पर पसीना आ गया है और जयराम रमेश को सरकार की हर चाल पर नजर रखने की कमान थमा दी गई है. ब्रिक्स सम्मेलन के तुरंत बाद केंद्र द्वारा अचानक संसद बुलाए जाने, परिसीमन और 'वन नेशन, वन इलेक्शन' जैसे भारी-भरकम बिल लाने की आशंका ने पूरे विपक्ष को अलर्ट मोड में डाल दिया है. अलबत्ता मौजूदा परिस्थितियों में डीएमके जैसे सहयोगी दलों के रुख को लेकर भी कांग्रेस के भीतर गहरी असहजता तैर रही है. राजनीतिक प्रेक्षक मान रहे हैं कि सरकार के इस अनकहे सस्पेंस ने विपक्ष को बैकफुट पर धकेलने का मनोवैज्ञानिक दबाव बना दिया है. ऐसे में प्रश्न यही है कि क्या विपक्ष पटल पर सरकार के संभावित विधायी तूफ़ान की काट पहले से तैयार कर पाएगा? सचमुच कानूनी और राजनीतिक विकल्पों का विस्तृत नोट बनाने में जयराम रमेश की रातें इन दिनों खूब लंबी हो रही हैं !

5.पाकिस्तान की ग्लोबल लॉबिंग की निकली हवा !

डॉलर के दबदबे को लोकल करेंसी के पैंतरे से सीधी चुनौती !

बंद कमरों से निकली कूटनीतिक तपिश ने साबित कर दिया कि दिल्ली अब केवल दर्शक नहीं, बल्कि दुनिया की बिसात का मंझा हुआ खिलाड़ी है. पहलगाम आतंकी हमले पर सीमा पार आतंकवाद और टेरर फंडिंग के खिलाफ चीन के दस्तखत कराकर पाकिस्तान की ग्लोबल लॉबिंग की हवा निकाल दी गई. इतना ही नहीं, युद्ध की कगार पर खड़े ईरान और यूएई को तड़के चार बजे तक चली मैराथन वार्ताओं के बाद साझी मेज पर बिठाकर भारत ने 11 देशों के इस कुनबे को बिखरने से बचा लिया. डॉलर के दबदबे को लोकल करेंसी के पैंतरे से सीधी चुनौती देने और यूएनएससी की स्थायी दावेदारी ठोकने को राजनीतिक प्रेक्षक सत्ता पक्ष का सबसे बड़ा कूटनीतिक मास्टरस्ट्रोक मान रहे हैं. अलबत्ता विपक्ष दबी जुबान में चुटकी ले रहा है कि दुनिया के पचड़े सुलझाना और ड्रैगन को मनाना तो ठीक है, लेकिन घरेलू मोर्चे पर सीमा और सियासत के तनाव पर भी ऐसा ही कोई जादुई फार्मूला निकल आता तो राहत मिलती. ऐसे में यक्ष प्रश्न यही है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिली यह प्रचंड जय-जयकार क्या भविष्य में घरेलू अर्थव्यवस्था और जटिल कूटनीति के कठिन इम्तिहानों में भारत के लिए अचूक ढाल बन पाएगी? सचमुच अमेरिका से लेकर रूस और इजरायल से लेकर खाड़ी देशों तक संतुलन साधने का यह नज़ारा वैश्विक राजनीति की किताबों में लंबे समय तक पढ़ा जाएगा !

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