Political Popcorn: आकाश आनंद पर अखिलेश की नजर, गडकरी की फटकार और कांग्रेस में कुर्सी का खेल!

Political Popcorn: आकाश आनंद को लेकर अखिलेश यादव के रुख से यूपी की सियासत में नई चर्चा तेज है. वहीं नितिन गडकरी की सख्त चेतावनी ने मुंबई-गोवा हाईवे के काम को लेकर हलचल बढ़ा दी है. हरियाणा कांग्रेस में तीन कुर्सियों वाले नए प्रोटोकॉल से पार्टी के भीतर समीकरणों पर सवाल उठ रहे हैं. दूसरी ओर मध्य प्रदेश कांग्रेस में जीतू पटवारी और दिग्विजय सिंह के बीच सियासी खींचतान चर्चा में है. मुंबई कांग्रेस में नेताओं पर कार्रवाई ने भी पार्टी के अंदरूनी विवाद को हवा दी है. जानिए इन सभी सियासी घटनाक्रमों से जुड़ी पूरी कहानी.

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Political Popcorn

1. 'बुआ' की बेरुखी, 'अखिलेश भैया' की बाहें!

यूपी में पीडीए की नई बिसात?

बसपा सुप्रीमो मायावती द्वारा भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह बाहर का रास्ता दिखाए जाने के चंद घंटों के भीतर ही लखनऊ के गलियारों में सियासी पारा चढ़ गया है. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुटकी लेते हुए सीधा ऑफर दे डाला कि अगर आकाश आना चाहें तो समाजवादी पार्टी उनके स्वागत के लिए तैयार है. अलबत्ता राजनीति के जानकारों का मानना है कि अखिलेश का यह बयान सिर्फ बयानबाजी नहीं, बल्कि यूपी के जाटव-दलित कोर वोट बैंक में सीधी सेंध लगाने का सोचा-समझा दांव है. सचमुच 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के नारे को अमलीजामा पहनाने के लिए सपा को एक ऐसे युवा दलित चेहरे की दरकार है, जो कांशीराम के कैडर को भी छू सके. राजनीतिक प्रेक्षक इसे एक बड़ा टर्निंग पॉइंट मान रहे हैं अगर आकाश साइकिल की सवारी का फैसला लेते हैं तो यूपी में चंद्रशेखर आजाद और सपा के बीच दलित युवाओं को साधने की होड़ और भी दिलचस्प हो जाएगी. यक्ष प्रश्न अब यही है कि क्या आकाश आनंद अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाने के लिए पारिवारिक निष्ठाओं से परे जाकर 'समाजवादी' चोला ओढ़ेंगे या फिर अपनी अलग राजनीतिक जमीन तलाशेंगे?

2. गडकरी का 'हथौड़ा' और ठेकेदारों की धड़कनें!

मुंबई-गोवा हाईवे पर सुस्ती देख बिफरे 'हाईवे मैन'!

मुंबई-गोवा राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण में जारी सुस्ती और लेटलतीफी को लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का पारा एक बार फिर सातवें आसमान पर पहुंच गया है. लापरवाह ठेकेदारों और दफ्तरों में फाइलें दबाए बैठे सुस्त अफसरों को सीधी चेतावनी देते हुए उन्होंने साफ कर दिया कि विकास के पहिए में रोड़ा अटकाने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा. अलबत्ता सियासत में नेताओं द्वारा मंच से फटकार लगाना कोई नई बात नहीं है, लेकिन गडकरी का अंदाज इसलिए अलग है क्योंकि वे काम अधूरा होने पर खुद ही फीता काटने से साफ मना कर देते हैं. सचमुच, जब केंद्रीय मंत्री यह ऐलान कर दें कि 'अगर काम में कोताही हुई तो लापरवाहों को ब्लैकलिस्ट करने का नया रिकॉर्ड बना दूंगा', तो सिस्टम के पसीने छूटना तय है. राजनीतिक प्रेक्षक इसे मोदी सरकार के 'परफॉर्म या पेरिश' वाले सख्त प्रशासनिक तेवर का सटीक नमूना मान रहे हैं, जहां अक्टूबर में मंत्री खुद जमीन पर उतरकर हर खामी की पोल खोलने वाले हैं. अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या मंत्री जी के इस कड़े तेवर के बाद दशकों पुरानी लचर कार्यशैली वाकई सुधरेगी, या फिर तारीख-पर-तारीख का यह खेल बदस्तूर जारी रहेगा?

3. वर्षा का फरमान और 'घर वापसी' पर पहरा!

मुंबई कांग्रेस में 77 नेताओं के निलंबन पर बगावत, मामला अदालत की चौखट तक पहुंचा!

​मुंबई कांग्रेस की सियासत में इन दिनों भीतरखाने जबर्दस्त घमासान मचा हुआ है. मुंबई अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ की हरी झंडी पर पार्टी ने एक झटके में 77 नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया. अलबत्ता दिलचस्प मोड़ यह है कि जिन चेहरों पर निलंबन की यह गाज गिरी है, उनमें से कई तो साल भर पहले ही किनारा कर चुके थे. अब सवाल उठ रहे हैं कि जब पुराने नेताओं की 'घर वापसी' की चर्चाएं जोरों पर थीं, तब इस निष्कासन का क्या औचित्य था? स्थानीय स्तर पर विरोध के सुर इतने तीखे हुए कि पार्टी की ही एक नेत्री ने इस फरमान के खिलाफ अदालत में केस ठोक दिया. चर्चा है कि गायकवाड़ दिल्ली दरबार में अपनी मजबूत पकड़ के भरोसे अडिग हैं. सचमुच, जब अपनों के ही खिलाफ मोर्चे खुलने लगें तो संगठन को एकजुट रखना लोहे के चने चबाने जैसा होता है,ऐसे में क्या दिल्ली हाईकमान मुंबई के इस अंदरूनी टकराव को वक्त रहते थाम पाएगा?

4. मंच पर 'थ्री-सीटर' सोफा और दिग्गजों का पारा!

हरियाणा कांग्रेस का नया नियम और सैलजा-सुरजेवाला समर्थकों में सुगबुगाहट!

​हरियाणा कांग्रेस के जलसों में अब भारी-भरकम मंच की पुरानी परंपरा पर ताला लग चुका है. नवनियुक्त प्रभारी संजय दत्त ने फरमान जारी किया है कि मंच पर केवल तीन कुर्सियां लगेंगी प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष और सीएलपी लीडर भूपेंद्र सिंह हुड्डा. अलबत्ता बाकी सभी सांसदों और विधायकों को नीचे कार्यकर्ताओं की कतार में बैठना होगा. इस नए प्रोटोकॉल से रणदीप सुरजेवाला और कुमारी सैलजा जैसे राष्ट्रीय कद के दिग्गजों को असहज करने की चर्चाएं सियासी गलियारों में तैरने लगी हैं. सचमुच कुछ नेताओं ने चुटकी लेते हुए यहां तक कह दिया कि यह कोई बॉलीवुड फिल्म नहीं है और न ही वो असली 'मुन्नाभाई' वाले संजय दत्त हैं जो जादू की झप्पी से सब साध लेंगे. राजनीतिक प्रेक्षक इसे हुड्डा खेमे के दबदबे और विरोधी गुटों की घेराबंदी के तौर पर देख रहे हैं. अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या तीन कुर्सियों का यह संक्षिप्त फॉर्मूला हरियाणा की चिर-परिचित गुटबाजी पर लगाम लगा पाएगा?

5. एमपी में दो धुरंधर, दो रास्ते!

दिग्विजय की अयोध्या पदयात्रा से संगठन ने खींचे हाथ, कार्यकर्ताओं में असमंजस !

​मध्य प्रदेश कांग्रेस के कार्यकर्ता इन दिनों समझ नहीं पा रहे हैं कि वे किस धुन पर कदमताल करें. एक तरफ प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी की अगुवाई में संगठन 'छात्रों की गूंज' अभियान के तहत धुआंधार रजिस्ट्रेशन चला रहा है तो दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने दशहरे पर उज्जैन से अयोध्या तक 'चंदा चोरी' के खिलाफ पदयात्रा का अलग गूगल फॉर्म जारी कर दिया है. अलबत्ता प्रदेश कांग्रेस और प्रभारी हरीश चौधरी ने इस यात्रा से पूरी तरह पल्ला झाड़ते हुए इसे दिग्विजय का निजी कार्यक्रम करार दे दिया है. सचमुच जब शीर्ष नेताओं के कार्यक्रमों के बीच ही तालमेल की कमी दिखने लगे तो मैदानी कार्यकर्ता का भ्रमित होना स्वाभाविक है. राजनीतिक प्रेक्षक मान रहे हैं कि पटवारी और दिग्विजय के बीच शक्ति-संतुलन की खींचतान अब खुलकर सड़कों पर आ रही है. ऐसे में प्रश्न यही है कि क्या मध्य प्रदेश में संगठन और राजा साहब की सियासी राहें अब हमेशा के लिए जुदा हो चुकी हैं?

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