PM Modi On Gaza Ceasefire: गाज़ा में दो वर्षों से जारी संघर्ष और हिंसा के बाद आखिरकार एक अहम मोड़ आया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता में एक युद्धविराम समझौता संपन्न हुआ, जिसे इज़राइल और फिलिस्तीनी संगठन हमास दोनों ने स्वीकार किया. इस समझौते के तहत दोनों पक्षों ने कैदियों और बंधकों की रिहाई की, जिससे क्षेत्र में राहत और शांति की नई उम्मीदें जगी हैं.
डोनाल्ड ट्रंप इज़राइल की संसद नेसेट पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया. इस मौके पर इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाज़ा. नेतन्याहू ने इस अवसर पर ट्रंप के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि "यह मिडिल ईस्ट के इतिहास में एक नया अध्याय है, जो शांति और स्थायित्व की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा."
We welcome the release of all hostages after over two years of captivity. Their freedom stands as a tribute to the courage of their families, the unwavering peace efforts of President Trump and the strong resolve of Prime Minister Netanyahu. We support President Trump’s sincere…
— Narendra Modi (@narendramodi) October 13, 2025
"यह एक नई शुरुआत है"
यरुशलम में ट्रंप ने कहा कि गाज़ा से सभी बचे हुए 20 इज़रायली बंधकों की सुरक्षित रिहाई इस लंबे संघर्ष के एक महत्वपूर्ण मोड़ को दर्शाती है. ट्रंप के शब्दों मे, “बंधक वापस आ गए हैं. यह कहने में बहुत सुकून मिल रहा है. आने वाली पीढ़ियाँ इसे उस क्षण के रूप में याद रखेंगी, जब सब कुछ बदलना शुरू हुआ, और वो भी बेहतर की ओर.” उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस समझौते का लक्ष्य केवल बंधकों की रिहाई नहीं, बल्कि स्थायी शांति, पुनर्निर्माण और आपसी विश्वास को बहाल करना है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन
इस ऐतिहासिक घटनाक्रम पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप और नेतन्याहू की सराहना की. उन्होंने कहा, “हम दो साल से अधिक समय तक बंधक बनाए गए सभी लोगों की रिहाई का स्वागत करते हैं. यह रिहाई उनके परिवारों के साहस, राष्ट्रपति ट्रंप के अटूट प्रयासों और प्रधानमंत्री नेतन्याहू के संकल्प का प्रतीक है. हम मिडिल ईस्ट में शांति बहाल करने की राष्ट्रपति ट्रंप की ईमानदार कोशिशों का समर्थन करते हैं.” भारत की इस प्रतिक्रिया को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक संतुलित और शांति समर्थक दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है.
समझौते की प्रमुख शर्तें और परिणाम
वॉशिंगटन की सक्रिय मध्यस्थता में तैयार किए गए इस समझौते के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
लोगों की भावनाएं और प्रतीकात्मक महत्व
बंधकों की वापसी को लेकर इज़राइल में उत्साह और राहत का वातावरण है. होस्टेज स्क्वायर, जो लंबे समय से बंधकों के परिजनों के प्रदर्शन और मांगों का केंद्र बना हुआ था, अब जश्न और उम्मीद का प्रतीक बन गया है. लोगों ने मोमबत्तियां जलाकर, बैनर लहराकर और गीत गाकर इस क्षण का स्वागत किया.
संघर्ष विराम की पृष्ठभूमि
गाज़ा में हमास और इज़राइल के बीच दो वर्षों से लगातार सैन्य टकराव, हवाई हमले और जमीनी अभियानों की वजह से बड़ी संख्या में नागरिक मारे गए हैं, लाखों लोग विस्थापित हुए हैं, और गाज़ा की बुनियादी ढांचा प्रणाली लगभग ध्वस्त हो चुकी है. इस दौरान मानवीय संकट अपने चरम पर पहुंच गया था.
अब ट्रंप की पहल पर हुआ यह समझौता क्षेत्र में नई शुरुआत की उम्मीद जगाता है.
क्या यह स्थायी शांति की दिशा में कदम है?
हालांकि यह समझौता एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि गाज़ा और इज़राइल के बीच स्थायी शांति के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति, पारदर्शिता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है. ट्रंप ने अपने संबोधन में संकेत दिए कि उनका उद्देश्य केवल युद्धविराम कराना नहीं, बल्कि मिडिल ईस्ट में एक दीर्घकालिक स्थायी समाधान की नींव रखना है.
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