हमने गुलामी की मानसिकता को बदलने का अभियान शुरू किया है... पीएम मोदी ने क्यों कही ये बात?

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को नए प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) का उद्घाटन किया. इस नई इमारत का नाम ‘सेवा तीर्थ' रखा गया है. इसमें प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय हैं, जो पहले अलग-अलग स्थानों पर थे.

PM narendra Modi inaugurates Seva Teerth full speech
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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को नए प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) का उद्घाटन किया. इस नई इमारत का नाम ‘सेवा तीर्थ' रखा गया है. इसमें प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय हैं, जो पहले अलग-अलग स्थानों पर थे. उद्घाटन समारोह के मौके पर पीएम मोदी ने कार्यक्रम को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि, आज हम नया इतिहास बनता देख रहे हैं. पुरानी इमारतें गुलामी की प्रतीक थीं. आज भारत की नई यात्रा शुरू हुई है. सेवा तीर्थ का दफ्तर जमीन से जुड़ा है. नई तकनीक पुरानी इमारतों में फिट नहीं थी. नई इमारतों से सरकार का खर्च कम होगा. 

"मानसिकता को बदलने का अभियान शुरू किया"

पीएम मोदी ने कहा कि हमने गुलामी की मानसिकता को बदलने का अभियान शुरू किया. हमने वीरों के नाम पर नेशनल वॉर मेमोरियल बनाया. हमने पुलिस स्मारक बनाया. रेसकोर्स का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग रखा गया.यह केवल नाम बदलने का फैसला नहीं था, यह सत्ता के मिजाज को सेवा की भावना में बदलने का पवित्र प्रयास था.

"विजयी होने का दैवीय आशीर्वाद हमारे साथ"

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 13 फरवरी का यह दिन देश की विकास यात्रा में एक नए आरंभ का साक्षी बन रहा है. शास्त्रों में विजया एकादशी का बहुत महत्व रहा है. इस दिन जिस संकल्प के साथ आगे बढ़ते हैं, उसमें विजय जरूर मिलती है. आज हम सभी विकसित भारत का संकल्प लेकर सेवा तीर्थ में, कर्तव्य भवन में प्रवेश कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि अपने लक्ष्य में विजयी होने का दैवीय आशीर्वाद हमारे साथ है. आजादी के बाद देश के भविष्य को बनाने वाले कई जरूरी फैसले लिए गए. साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक जैसी इमारतों में बड़े फैसले लिए गए लेकिन ये याद रखना होगा कि ये इमारतें ब्रिटिश साम्राज्य की निशानी के तौर पर बनाई गई थीं. इन्हें बनाने का मकसद ब्रिटिश राज को मजबूत करना और देश को पीढ़ियों तक गुलाम बनाए रखना था.

"सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन भारत की जनता को समर्पित"

पीएम मोदी ने कहा कि साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक जैसी इमारतें ब्रिटिश सोच की हुकूमत को लागू करने के लिए बनी थीं. आज सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन जैसी इमारतें देश की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बनी हैं. यहां से होने वाले फैसले किसी महाराजा की सोच को नहीं बल्कि 140 करोड़ देशवासियों की अपेक्षाओं को आगे बढ़ाने का आधार बनेंगे. इसी अमृत भावना के साथ मैं ये सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन भारत की जनता को समर्पित कर रहा हूं.

प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि जहां से देश चलता है वो जगह प्रभावी होनी चाहिए और प्रेरणादायी भी. इस समय 21वीं सदी का पहला क्वार्टर पूरा हो चुका है. ये जरूरी है कि विकसित भारत की कल्पना केवल नीतियों और योजनाओं में ही नहीं बल्कि हमारे कार्यस्थलों और इमारतों में भी दिखाई दे. साउथ और नॉर्थ ब्लॉक जैसी पुरानी इमारतों में जगह की कमी थी. सुविधाओं की अपनी सीमाएं थीं.करीब 100 साल पुरानी ये इमारतें भीतर से जर्जर होती जा रही थीं. और भी कई चुनौतियां थीं, इन चुनौतियों के बारे में बताया जाना जरूरी है.

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