केंद्र सरकार की बड़ी सौगात! 25 लाख टन गेहूं निर्यात को दी मंजूरी; किसानों को मिलेगा फायदा

भारत में गेहूं और चीनी की बढ़ती आपूर्ति और नरम होती कीमतों के मद्देनजर केंद्र सरकार ने घरेलू बाजार में उत्पादों की उपलब्धता बनाए रखने और किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने के लिए गेहूं और चीनी के अतिरिक्त निर्यात की मंजूरी दी है.

central government has approved the export of 2.5 million tonnes of wheat
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नई दिल्ली: भारत में गेहूं और चीनी की बढ़ती आपूर्ति और नरम होती कीमतों के मद्देनजर केंद्र सरकार ने घरेलू बाजार में उत्पादों की उपलब्धता बनाए रखने और किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने के लिए गेहूं और चीनी के अतिरिक्त निर्यात की मंजूरी दी है. इस फैसले से न केवल किसानों को सीधे लाभ होगा, बल्कि इससे घरेलू खाद्य सुरक्षा पर भी कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा. आइए जानते हैं कि यह कदम किस प्रकार किसानों और आम जनता के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है.

25 लाख टन गेहूं का निर्यात मंजूर

केंद्र सरकार ने 25 लाख टन गेहूं के निर्यात को मंजूरी दे दी है, जो कि कोरोना के बाद सरकार का पहला कदम है. इस निर्णय को घरेलू बाजार में गेहूं की पर्याप्त आपूर्ति और नरम होती कीमतों के मद्देनजर लिया गया है. सरकार का मानना है कि यह कदम किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने, खाद्यान्न की उपलब्धता बनाए रखने और बफर स्टॉक के कुशल प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा.

देश में गेहूं की आपूर्ति स्थिति

सरकार का यह निर्णय खाद्य सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला नहीं है. खाद्य मंत्रालय के अनुसार, अगले दो सालों में गेहूं की आपूर्ति के मामले में कोई संकट नहीं आएगा. 2025-26 में अनुमान है कि निजी कारोबारी लगभग 75 लाख टन गेहूं का स्टॉक रखेंगे, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 32 लाख टन अधिक है. साथ ही, भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के पास 182 लाख टन गेहूं का बफर स्टॉक होने का अनुमान है. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि रबी मौसम में गेहूं का रकबा 334.17 लाख हेक्टेयर तक पहुंचने का अनुमान है, जो किसानों के लिए सकारात्मक संकेत है.

किसानों को होगा सीधे फायदा

सरकार का मानना है कि इस निर्यात निर्णय से घरेलू कीमतों को संतुलित रखा जा सकेगा, और इसके कारण बाजार में मांग और आपूर्ति का संतुलन बेहतर होगा. बफर स्टॉक में वृद्धि, संभावित उच्च उत्पादन और स्थानीय कीमतों में नरमी से किसानों को अच्छे मूल्य मिलेंगे. इस फैसले से किसानों की आय को सुदृढ़ करने की उम्मीद जताई जा रही है. इसके अलावा, यह निर्णय स्टॉक रोटेशन में भी मदद करेगा, जिससे देशभर में गेहूं की आपूर्ति समान रूप से वितरित हो सकेगी.

चीनी के निर्यात को भी मिली मंजूरी

सरकार ने सिर्फ गेहूं ही नहीं, बल्कि चीनी के निर्यात को भी बढ़ावा दिया है. 2025-26 के चीनी सत्र में 5 लाख टन चीनी के अतिरिक्त निर्यात की मंजूरी दी गई है. इसके साथ ही पहले 14 नवंबर 2025 के आदेश के तहत 15 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी गई थी, लेकिन 31 जनवरी 2026 तक केवल 1.97 लाख टन चीनी का निर्यात किया जा सका था. अब अतिरिक्त 5 लाख टन चीनी का निर्यात चीनी मिलों को प्रोराटा आधार पर आवंटित किया जाएगा, और 70 प्रतिशत निर्यात 30 जून 2026 तक करना अनिवार्य होगा.

मिलों को सहमति देने का निर्देश

नए आदेश के तहत चीनी मिलों को 15 दिनों के भीतर अपनी सहमति देनी होगी. आवंटित कोटा को किसी अन्य मिल के साथ हस्तांतरित या अदला-बदली नहीं किया जा सकेगा. यह व्यवस्था मिलों को अतिरिक्त चीनी के प्रबंधन में मदद करेगी, और इससे किसानों को लाभकारी मूल्य मिल सकेगा. साथ ही, इससे देश की खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता हित भी सुरक्षित रहेंगे.

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