80th Independence Day: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण के मुद्दे को एक बार फिर राजनीतिक विमर्श के केंद्र में ला दिया. पीएम मोदी ने कहा कि हमने नारी शक्ति वंदन बिल पास किया था, लेकिन ये सपना राजनीतिक अखाड़े का शिकार हो गया.
"महिलाओं के सम्मान में आगे आइए"
पीएम मोदी ने कहा, ''मैं सभी राजनीतिक दलों से अपील करता हूं, आग्रह करता हूं. महिलाओं के सामर्थ्य के पुजारी बनिए. महिलाओं के सम्मान में आगे आइए. जल्द से जल्द महिलाओं माताओं बहनों को 33 प्रतिशत विधानसभा और लोकसभा में प्रतिनिधित्व मिले, समय की मांग है. सभी राजनीतिक दलों से आग्रह करते हैं कि महिला आरक्षण लागू करके उसमें हिस्सा लीजिए, क्रेडिट लीजिए, उसका यश लीजिए.''
पीएम मोदी ने कहा कि सैन्यबलों का सामर्थ्य को बढ़ना है.. लेकिन साथ में नागरिकों को भी तैयार करना है, Civil Defence का बड़ा नेटवर्क तैयार कर रहे हैं. बहुत बड़ी संख्याओं में महिलाएं भागीदार बन रही हैं.
#WATCH | Delhi: From the ramparts of the Red Fort, Prime Minister Narendra Modi says, "Standing here today beneath the Tricolour on the ramparts of the Red Fort, I appeal to and urge all the political parties of the country: come, become champions of women's empowerment. Step… pic.twitter.com/9OjmX540kP
— ANI (@ANI) August 15, 2026
परिसीमन पर टकराव से बढ़ी राजनीतिक दूरी
परिसीमन को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद लगातार गहराते रहे हैं. संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 भी विपक्षी एकजुटता के बीच आगे नहीं बढ़ सका. सरकार ने हालिया मानसून सत्र में इस दिशा में कदम बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन विपक्षी हंगामे के कारण सदन का कामकाज प्रभावित हुआ और विधायी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी. ऐसे में महिला आरक्षण का मुद्दा अब केवल महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जनगणना, परिसीमन और चुनावी व्यवस्था से जुड़ी व्यापक बहस का हिस्सा बन चुका है.
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