नेपाल में तबाही के बीच भारत बना सहारा, भेजी राहत सामग्री की दूसरी खेप, काठमांडू पहुंचा C-17 ग्लोबमास्टर

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि बुधवार को 10 टन राहत सामग्री भेजने के बाद गुरुवार को भारत ने 37.5 टन की दूसरी खेप भी नेपाल भेजी है. इसके लिए भारतीय वायुसेना के C-17 ग्लोबमास्टर विमान का इस्तेमाल किया गया.

India steps in to help for Nepal second consignment of relief supplies sent
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Nepal Flood: नेपाल में बुधवार को अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई. संकट की जानकारी मिलते ही भारत ने मदद शुरू कर दी. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि बुधवार को 10 टन राहत सामग्री भेजने के बाद गुरुवार को भारत ने 37.5 टन की दूसरी खेप भी नेपाल भेजी है. इसके लिए भारतीय वायुसेना के C-17 ग्लोबमास्टर विमान का इस्तेमाल किया गया.

जयशंकर ने शेयर किया वीडियो

एस जयशंकर ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि नेपाल के लिए राहत सामग्री भेजने का अभियान जारी है. गुरुवार सुबह दूसरी उड़ान नेपाल के लिए रवाना हुई, जिसमें 37.5 टन मानवीय सहायता, आपदा राहत सामग्री, दवाइयां और खाने के पैकेट भेजे गए हैं. उन्होंने कहा कि भारत नेपाल के अधिकारियों के लगातार संपर्क में है और राहत-बचाव में हर संभव मदद जारी रखेगा.

C-17 ग्लोबमास्टर से पहुंची राहत सामग्री

C-17 ग्लोबमास्टर राहत सामग्री लेकर नेपाल पहुंच चुका है. हिंडन एयरपोर्ट से उड़ान भरने से पहले विमान के कमांडर कैप्टन एल नायक ने बताया कि विमान में करीब 30 से 40 टन राहत सामग्री, मेडिकल सामान और एनडीआरएफ का सामान है. उड़ान में करीब 1 घंटा 15 मिनट लगने की उम्मीद है.

पहले 10 टन, अब 37.5 टन मदद

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि नेपाल के लिए 37.5 टन राहत सामग्री, दवाइयां और खाने के पैकेट लेकर दूसरी उड़ान रवाना हुई है. इससे पहले बुधवार को भारत ने 10 टन मानवीय सहायता भेजी थी. भारत ने कहा है कि वह इस मुश्किल समय में नेपाल के साथ खड़ा है.

नेपाल में बढ़ता जा रहा मौतों का आंकड़ा

गुरुवार सुबह तक भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ में 162 लोगों के शव बरामद किए जा चुके थे. पुलिस के मुताबिक, ये शव भोटेकोशी और त्रिशूल नदी के निचले इलाकों के कई जिलों में नदी किनारे से मिले हैं. इनमें रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, चितवन, गोरखा, तनहुं, नवलपरासी पूर्व और नवलपरासी पश्चिम शामिल हैं.

अचानक आई बाढ़ से मची तबाही

रिपोर्ट के मुताबिक, भोटेकोशी नदी की सहायक नदी ल्हेन्डे का रास्ता हिमस्खलन के कारण रुक गया था. इसके बाद नेपाल-चीन सीमा के पास रसुवागढ़ी इलाके का तिमुरे गांव सबसे पहले प्रभावित हुआ. बताया गया कि उस समय इलाके में बारिश भी नहीं हो रही थी, इसलिए लोगों को अचानक आने वाली इस बाढ़ का अंदाजा नहीं था.

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