प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार दीपावली का पर्व देश की रक्षा में जुटे नौसेना के जांबाज़ों के साथ मनाया. उन्होंने भारतीय नौसेना के सबसे आधुनिक एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत पर जवानों के बीच पहुंचकर त्योहार की खुशियां साझा कीं.
अपने भावुक संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि समंदर की लहरों पर जब सूरज की किरणें पड़ती हैं, तो ऐसा प्रतीत होता है मानो जवानों द्वारा जलाए गए दीपक चमक रहे हों. उन्होंने इस अनुभव को ‘अलौकिक’ बताया और कहा कि “यह दिवाली मेरे लिए कई मायनों में खास बन गई है.”
जवानों की भावना को बताया अवर्णनीय
प्रधानमंत्री ने कहा कि, “विक्रांत पर मनाई गई दिवाली को शब्दों में बयां करना आसान नहीं है. यहां की अनुभूतियों को कोई कवि भी शायद ठीक से व्यक्त नहीं कर पाए, जैसा कि हमारे जवान खुद कर रहे हैं.” उन्होंने जवानों की निष्ठा और भावना को महसूस करने की बात कही.
"मैं आपकी धड़कन और सांसों को महसूस कर पाया"
पीएम मोदी ने आगे कहा, “आपकी तपस्या और समर्पण की ऊंचाई को मैं जी नहीं पाया, लेकिन उसे महसूस कर सका. आपकी धड़कन और सांसों में जो देशभक्ति है, वह मेरी आत्मा को छू गई.”
आईएनएस विक्रांत: दुश्मनों के हौसले तोड़ने वाला नाम
प्रधानमंत्री ने आईएनएस विक्रांत की ताकत और रणनीतिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, “जिसका नाम ही दुश्मन की हिम्मत को चकनाचूर कर दे, वह है विक्रांत.” उन्होंने भारतीय सेनाओं के साहस और समन्वय की प्रशंसा की और 1971 के युद्ध का संदर्भ देते हुए कहा कि तीनों सेनाओं की एकता ने पाकिस्तान को जल्दी घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था.
सेना को मज़बूत करने के लिए आत्मनिर्भरता ज़रूरी
अपने संबोधन के अंत में पीएम मोदी ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ पर बल देते हुए कहा कि भारतीय सेना को और भी मज़बूत और सक्षम बनाने के लिए रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना बेहद ज़रूरी है.
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