PM Modi Five Nation Tour: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज से अपने बहुप्रतीक्षित पांच देशों के दौरे की शुरुआत कर रहे हैं. अगले छह दिनों में पीएम मोदी सबसे पहले UAE जाएंगे और उसके बाद नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और अंत में इटली का दौरा करेंगे. इस यात्रा में ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक साझेदारियों को मजबूत करना सबसे अहम एजेंडा होगा.
UAE यात्रा का खास महत्व
अबू धाबी की यात्रा इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीएम मोदी और UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच LPG आपूर्ति और स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम भंडार पर महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है. यह कदम खास तौर पर अमेरिका-ईरान युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी से पैदा हुई वैश्विक ऊर्जा संकट की पृष्ठभूमि में अहम माना जा रहा है.
ऊर्जा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी
UAE और भारत के बीच ऊर्जा सहयोग लंबे समय से मजबूत रहा है. पिछले साल UAE भारत का चौथा सबसे बड़ा कच्चे तेल का स्रोत था, जिसने देश की जरूरत का लगभग 11% हिस्सा पूरा किया. वहीं, LPG की आपूर्ति के मामले में UAE भारत का सबसे बड़ा स्रोत है, जो देश की जरूरत का करीब 40% पूरा करता है. इस यात्रा के दौरान इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) के बीच स्ट्रैटेजिक LPG समझौते पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है. इसके अलावा इंडियन स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड (ISPRL) और ADNOC के बीच रणनीतिक तेल भंडार पर भी समझौते की संभावना है.
रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार में UAE की भूमिका
UAE भारत का पहला ऐसा साझीदार है जिसने स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम भंडार के मामले में सहयोग किया. 2018 में ISPRL और ADNOC के बीच समझौता हुआ, जिसके तहत अबू धाबी भारत के मंगलुरु स्थित पेट्रोलियम भंडार में 50 लाख बैरल से अधिक कच्चे तेल जमा करेगा. ISPRL की तीन भूमिगत सुविधाओं में कुल 53.3 लाख मीट्रिक टन कच्चा तेल रखा गया है, जो किसी भी आपात स्थिति में भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करता है.
दौरे का व्यापक एजेंडा
MEA की जानकारी के अनुसार, पीएम मोदी की इस यात्रा का उद्देश्य केवल ऊर्जा सहयोग तक सीमित नहीं है. यह दौरा भारत और इन देशों के बीच सांस्कृतिक, आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने का अवसर भी है. खासकर मौजूदा वैश्विक उथल-पुथल के समय में यह यात्रा भारत की अंतरराष्ट्रीय स्थिति और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती देने के लिए निर्णायक साबित हो सकती है.
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