Red Fort Blast Case: देश की राजधानी दिल्ली को झकझोर देने वाले रेड फोर्ट कार ब्लास्ट मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 7500 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल की है. यह चार्जशीट दिल्ली की पटियाला हाउस स्थित NIA स्पेशल कोर्ट में पेश की गई, जिसमें 10 आरोपियों को नामजद किया गया है. जांच एजेंसी का दावा है कि यह कोई सामान्य आपराधिक घटना नहीं थी, बल्कि देश में बड़े स्तर पर आतंकी नेटवर्क खड़ा करने की साजिश का हिस्सा थी.
10 नवंबर 2025 की शाम लाल किले के पास हुए इस भीषण धमाके में 11 लोगों की जान चली गई थी, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे. धमाके की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि आसपास की गाड़ियों के शीशे टूट गए और कई दुकानों व इमारतों को नुकसान पहुंचा था. घटना के तुरंत बाद दिल्ली-NCR में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया था और कई सुरक्षा एजेंसियां जांच में जुट गई थीं.
#WATCH | Several accused arrested in the Delhi blast case are being produced before the NIA Special Court amid heavy security arrangements pic.twitter.com/T7tiOJUo1z
— ANI (@ANI) May 14, 2026
10 आरोपियों पर आतंकी संगठन से जुड़े होने का आरोप
NIA की चार्जशीट के मुताबिक सभी आरोपी आतंकी संगठन “अंसार गजवत-उल-हिंद” और “अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS)” से जुड़े हुए थे. जांच एजेंसी ने दावा किया है कि गिरफ्तार किए गए 8 आतंकियों में 5 पेशे से डॉक्टर हैं, जो कथित तौर पर आतंकी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे.
चार्जशीट में पुलवामा निवासी डॉ. उमर उन नबी का नाम मुख्य आरोपियों में शामिल किया गया है. हालांकि उसकी मौत हो चुकी है. जांच एजेंसी के अनुसार वह हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में काम कर चुका था और संगठन के नेटवर्क को मजबूत करने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका थी.
मेडिकल प्रोफेशनल्स पर कट्टरपंथ से प्रभावित होने का आरोप
जांच में सामने आया है कि कुछ आरोपी मेडिकल प्रोफेशनल होने के बावजूद कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित थे. NIA के अनुसार वर्ष 2022 में श्रीनगर में हुई एक गुप्त बैठक के दौरान “AGuH Interim” नाम से संगठन को फिर से सक्रिय किया गया था. इसी बैठक में कथित तौर पर “Operation Heavenly Hind” की योजना बनाई गई थी.
एजेंसी का कहना है कि इसके बाद आरोपियों ने नए सदस्यों की भर्ती शुरू की और बड़े स्तर पर विस्फोटक तैयार करने की योजना बनाई. जांच में यह भी सामने आया कि ब्लास्ट में इस्तेमाल किया गया TATP विस्फोटक आरोपियों ने खुद तैयार किया था. इसके लिए जरूरी केमिकल और अन्य उपकरण ऑनलाइन तथा ऑफलाइन माध्यम से जुटाए गए थे.
ड्रोन और रॉकेट आधारित IED पर भी हो रहा था प्रयोग
चार्जशीट में यह भी दावा किया गया है कि आरोपी केवल विस्फोटक तैयार करने तक सीमित नहीं थे, बल्कि वे आधुनिक हथियारों और तकनीक का इस्तेमाल करने की दिशा में भी काम कर रहे थे. जांच एजेंसी के मुताबिक आतंकी मॉड्यूल AK-47, Krinkov राइफल और अन्य हथियार जुटाने की कोशिश कर रहा था.
इसके अलावा ड्रोन और रॉकेट ऑपरेटेड IED तैयार करने को लेकर भी प्रयोग किए जा रहे थे. एजेंसी ने अब तक इस मामले में 11 लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि कुछ आरोपी अभी भी फरार बताए जा रहे हैं. उनकी तलाश में कई राज्यों में छापेमारी जारी है.
10 नवंबर 2025 की शाम दहल उठी थी दिल्ली
दिल्ली के ऐतिहासिक रेड फोर्ट इलाके में 10 नवंबर 2025 की शाम अचानक हुए जोरदार धमाके ने पूरे देश को हिला दिया था. शुरुआती जांच में ही सुरक्षा एजेंसियों को संदेह हो गया था कि यह हाई-इंटेंसिटी VBIED यानी Vehicle-Borne Improvised Explosive Device हमला हो सकता है.
धमाके के बाद इलाके को घेर लिया गया था और फॉरेंसिक टीमों को मौके पर बुलाया गया था. कई केंद्रीय एजेंसियों ने मिलकर जांच शुरू की थी. बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच NIA को सौंप दी गई थी.
घोस्ट सिम कार्ड और डुअल फोन प्रोटोकॉल का इस्तेमाल
जांच के दौरान एक बड़ा खुलासा यह भी हुआ कि आतंकी मॉड्यूल सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए अत्याधुनिक तरीकों का इस्तेमाल कर रहा था. PTI की रिपोर्ट के मुताबिक आरोपियों ने “घोस्ट सिम कार्ड” और “डुअल फोन प्रोटोकॉल” का उपयोग किया.
अधिकारियों के अनुसार हर आरोपी के पास दो से तीन मोबाइल फोन होते थे. एक फोन सामान्य उपयोग और पहचान के लिए रखा जाता था, जबकि दूसरा फोन कथित तौर पर आतंकी गतिविधियों और पाकिस्तानी हैंडलर्स से संपर्क के लिए इस्तेमाल होता था.
जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपी व्हाट्सऐप और टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म के जरिए पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स से संपर्क में रहते थे. बिना फिजिकल सिम वाले डिवाइस में मैसेजिंग ऐप्स चलाकर वे ट्रैकिंग से बचने की कोशिश करते थे.
यूट्यूब के जरिए IED बनाने की ट्रेनिंग
चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि आतंकी मॉड्यूल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहा था. जांच में सामने आया कि आरोपियों को यूट्यूब वीडियो और डिजिटल माध्यमों के जरिए IED बनाने के तरीके सिखाए जा रहे थे. कथित हैंडलर्स हमले की रणनीति और तकनीकी निर्देश भी ऑनलाइन साझा करते थे.
महिला आतंकी विंग को लेकर भी खुलासा
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अक्टूबर 2025 में जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर ने महिला आतंकियों की एक अलग विंग बनाई थी. इस विंग का नाम “जमात-उल-मुमिनात” बताया गया है. कहा गया कि इस नेटवर्क का मकसद आतंकी गतिविधियों को सपोर्ट करना था.
हालांकि रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि यह विंग अभी संयुक्त राष्ट्र की आतंकी सूची में शामिल नहीं है. अलग-अलग देशों के आकलन में भी संगठन की सक्रियता को लेकर मतभेद सामने आए हैं. कुछ देशों ने JeM को अब भी सक्रिय आतंकी संगठन माना है, जबकि कुछ ने इसकी गतिविधियों को सीमित बताया है.
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