घर में घुसकर महिला के कपड़े उठाना रेप का प्रयास नहीं... झारखंड हाईकोर्ट ने आरोपी को दी राहत, जानें मामला

झारखंड हाईकोर्ट ने 26 साल पुराने एक मामले में अहम फैसला सुनाया है. अदालत ने कहा कि रात में किसी महिला के घर में घुसना और उसके कपड़े उठाने की कोशिश करना गंभीर अपराध हो सकता है, लेकिन हर ऐसी घटना को रेप की कोशिश नहीं माना जा सकता.

picking up a womans clothes does not attempted rape Jharkhand High Court
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रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने 26 साल पुराने एक मामले में अहम फैसला सुनाया है. अदालत ने कहा कि रात में किसी महिला के घर में घुसना और उसके कपड़े उठाने की कोशिश करना गंभीर अपराध हो सकता है, लेकिन हर ऐसी घटना को रेप की कोशिश नहीं माना जा सकता. अदालत ने कहा कि महिला की गरिमा भंग करने के इरादे से आपराधिक बल का इस्तेमाल और रेप के प्रयास में कानूनी अंतर है.

जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने 31 अगस्त को एक आपराधिक अपील पर फैसला सुनाते हुए यह टिप्पणी की. अदालत ने आरोपी को रेप के प्रयास के आरोप से राहत दे दी, लेकिन महिला की गरिमा भंग करने के इरादे से आपराधिक बल के इस्तेमाल के मामले में उसकी सजा को बरकरार रखा.

चार साल की सजा को किया कम

द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला पूर्वी सिंहभूम जिले का है. निचली अदालत ने आरोपी को रेप की कोशिश का दोषी मानते हुए चार साल की कठोर कैद की सजा सुनाई थी. इसके बाद आरोपी ने इस फैसले को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी.

हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद निचली अदालत के फैसले में बदलाव किया. अदालत ने आरोपी को रेप के प्रयास के आरोप से अलग करते हुए कम गंभीर अपराध का दोषी माना.

करीब आठ महीने जेल में रह चुका था आरोपी

हाईकोर्ट ने आरोपी की पहले से जेल में बिताई गई करीब आठ महीने की अवधि को पर्याप्त माना. अदालत ने कहा कि न्याय के उद्देश्य को पूरा करने के लिए इतनी सजा काफी है. इसके बाद आरोपी की अपील को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया गया.

1999 में हुई थी घटना

यह पूरा मामला 26 दिसंबर 1999 की रात का है. आरोप था कि आरोपी रात में महिला के घर में घुसा और उसके कपड़े उठाने की कोशिश की. घटना के अगले दिन यानी 27 दिसंबर को उसे गिरफ्तार कर लिया गया था. इसके बाद पुलिस ने उसके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया.

मामले की सुनवाई के दौरान निचली अदालत ने आरोपी की हरकत को रेप के प्रयास का मामला माना था. इसी आधार पर उसे चार साल की सजा सुनाई गई थी.

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट ने कहा कि किसी घटना को रेप का प्रयास मानने के लिए आरोपी की हरकत उस अपराध को पूरा करने के बहुत करीब होनी चाहिए. इस मामले में जो सबूत सामने आए, उनसे यह साबित होता है कि आरोपी ने महिला की गरिमा भंग करने के इरादे से आपराधिक बल का इस्तेमाल किया था.

हालांकि, अदालत के मुताबिक उपलब्ध सबूत रेप के प्रयास की कानूनी सीमा तक नहीं पहुंचते. इसी वजह से हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले में बदलाव किया और आरोपी को पहले ही जेल में बिताई गई अवधि के बाद राहत दे दी.