वॉशिंगटन: ईरान और अमेरिका के बीच तनावपूर्ण संबंधों के बीच, दुनिया की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है. अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने हाल ही में दावा किया है कि ईरान में अब सत्ता का परिवर्तन हो चुका है. यह बयान उस समय आया है, जब इजराइल और अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के बीच, मध्य पूर्व के हालात एक नए मोड़ पर पहुंच चुके हैं. अमेरिका ने स्पष्ट रूप से संकेत दिया है कि अब परिस्थितियां पहले जैसी नहीं रही हैं, और अगर ईरान ने समझौते की शर्तें नहीं मानी तो अमेरिका की कार्रवाई और भी सख्त हो सकती है.
ईरान में नया शासन?
हेगसेथ ने अपनी प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि अब ईरान में नया शासन है, और उसे पहले से कहीं ज्यादा समझदारी दिखाने की जरूरत है. उनका कहना था कि पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को सत्ता सौंप दी गई है. हालांकि, मोजतबा खामेनेई अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या वास्तव में नया शासन स्थापित हो चुका है, या स्थिति अभी भी अस्थिर है.
क्या अमेरिका ईरान से बातचीत कर रहा है?
अमेरिका ने दावा किया है कि वह ईरान के नेताओं के साथ बातचीत कर रहा है, लेकिन यह अस्पष्ट है कि इन वार्ताओं में ईरान का पक्ष कौन है. इस वजह से कूटनीतिक स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है. जबकि एक तरफ अमेरिका बातचीत की बात कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ सैन्य दबाव भी बढ़ा रहा है. इस विरोधाभास ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, और इसका असर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी देखा जा रहा है.
क्या अमेरिका सैन्य कार्रवाई तेज करेगा?
हेगसेथ ने साफ किया कि अगर ईरान समझौते पर सहमति नहीं जताता, तो अमेरिका की सेना और अधिक आक्रामक कार्रवाई करेगी. उन्होंने बताया कि पिछले 24 घंटों में ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमलों में कमी आई है, जबकि अमेरिका ने 200 से अधिक डायनामिक स्ट्राइक किए हैं. इन हमलों में रियल टाइम जानकारी के आधार पर नए लक्ष्यों को निशाना बनाया गया. इससे यह साफ संकेत मिलता है कि अमेरिका का दबाव अब ज्यादा बढ़ चुका है, और वह ईरान को किसी भी हाल में झुकाना चाहता है.
नाटो के रुख पर पीट हेगसेथ की प्रतिक्रिया
अमेरिका के रक्षा मंत्री ने नाटो के भविष्य पर भी अपनी राय दी. उन्होंने कहा कि नाटो के भविष्य का फैसला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप करेंगे, और यह निर्णय ईरान में चल रहे अभियान के खत्म होने के बाद लिया जाएगा. हेगसेथ ने यह भी कहा कि इस घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिका के सहयोगी देशों की मदद कितनी महत्त्वपूर्ण है. उन्होंने तंज करते हुए कहा कि कई देशों ने अतिरिक्त मदद देने में हिचकिचाहट दिखाई. उनके अनुसार, अगर जरूरी समय पर सहयोग नहीं मिलता, तो ऐसे गठबंधनों का कोई मतलब नहीं रह जाता.
जमीनी हालात और अमेरिकी हमलों का असर
हेगसेथ ने कहा कि अमेरिकी हमलों के बाद ईरानी सेना का मनोबल गिरता जा रहा है. कई कमांड बंकर तबाह हो चुके हैं, और कई ईरानी नेता छिपने को मजबूर हो गए हैं. इसके अलावा, बिजली, पानी और कम्युनिकेशन जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रभावित हो गई हैं. इससे ईरानी सेना में भगदड़ और निराशा बढ़ रही है, जो अमेरिका के लिए एक बड़ी रणनीतिक जीत साबित हो सकती है.
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