फिर से पैर पसार रहा कोरोना वायरस, 23 देशों में फैला नया वैरिएंट Cicada, भारत पर कितना होगा असर?

क्या कोरोना महामारी पूरी तरह खत्म हो चुकी है? विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा अभी कहना जल्दबाजी होगी. समय-समय पर वायरस नए रूप में सामने आ रहा है और इस बार चर्चा में है कोविड-19 का नया वैरिएंट ‘सिकाडा’.

New variant of Corona virus Cicada spreads again in 23 countries
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

नई दिल्ली: क्या कोरोना महामारी पूरी तरह खत्म हो चुकी है? विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा अभी कहना जल्दबाजी होगी. समय-समय पर वायरस नए रूप में सामने आ रहा है और इस बार चर्चा में है कोविड-19 का नया वैरिएंट ‘सिकाडा’. वैज्ञानिक इसे BA.3.2 नाम से पहचानते हैं, जो तेजी से कई देशों में फैल रहा है और चिंता का कारण बनता जा रहा है.

‘सिकाडा’ दरअसल COVID-19 के BA.3.2 नामक नए रूप का अनौपचारिक नाम है. यह Omicron परिवार का ही एक विकसित रूप (वंशज) है, जिसने 2021 में पूरी दुनिया को प्रभावित किया था.

इस नए वैरिएंट की सबसे बड़ी खासियत इसके स्पाइक प्रोटीन में हुए 70 से 75 आनुवंशिक बदलाव हैं. यही स्पाइक प्रोटीन वायरस को मानव शरीर की कोशिकाओं में प्रवेश करने में मदद करता है. जब इसमें बड़े स्तर पर बदलाव होते हैं, तो पहले से बनी वैक्सीन और इम्यूनिटी को इसे पहचानने में अधिक समय लग सकता है.

कहां से शुरू हुआ फैलाव?

शोधकर्ताओं के अनुसार, BA.3.2 को पहली बार नवंबर 2024 में अफ्रीका में पहचाना गया था. इसके बाद 2025 के दौरान यह धीरे-धीरे कई देशों में फैलने लगा. फरवरी 2026 तक यह 23 देशों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुका है.

अमेरिका में तेजी से फैल रहा संक्रमण

संयुक्त राज्य अमेरिका में इस वैरिएंट का पहला मामला जून 2025 में सामने आया था. अब स्थिति यह है कि देश के 29 राज्यों में ‘वेस्टवॉटर मॉनिटरिंग’ यानी सीवेज के पानी की जांच में इसके संकेत मिल रहे हैं.

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह वैरिएंट बिना ज्यादा शोर किए फैल रहा है, यानी कई मामलों में यह आसानी से नजर नहीं आता लेकिन संक्रमण धीरे-धीरे बढ़ता रहता है.

क्यों अलग है यह वैरिएंट?

इस नए वैरिएंट को समझने के लिए विशेषज्ञ एक उदाहरण देते हैं- जैसे आप किसी पुराने परिचित को लंबे समय बाद देखें, तो पहचानने में थोड़ा समय लगता है. ठीक वैसे ही, BA.3.2 में इतने बदलाव हो चुके हैं कि हमारा इम्यून सिस्टम इसे पहचानने में देरी करता है.

क्या यह ज्यादा खतरनाक है?

अब तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं है कि BA.3.2 पुराने वैरिएंट्स से अधिक घातक है. लेकिन इसकी तेजी से फैलने की क्षमता चिंता का विषय है, क्योंकि इससे ज्यादा लोग संक्रमित हो सकते हैं.

यह खासतौर पर उन लोगों के लिए जोखिम भरा हो सकता है जो पहले से फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे हैं या जिन्हें ‘लॉन्ग कोविड’ की समस्या रही है. आंकड़े बताते हैं कि हर 100 में से लगभग 3 लोगों में लंबे समय तक लक्षण बने रह सकते हैं.

भारत में क्या स्थिति है?

भारत में फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है. INSACOG के अनुसार, देश में XFG वैरिएंट के 163 मामले सामने आए हैं, जो ओमिक्रॉन का ही एक रूप है.

हालांकि BA.3.2 के सीधे मामलों की पुष्टि कम है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय यात्रा के जरिए इसके भारत में आने की संभावना बनी हुई है.

क्या मौजूदा वैक्सीन असरदार है?

विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान वैक्सीन मुख्य रूप से पुराने वैरिएंट्स जैसे JN.1 को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं. BA.3.2 के नए रूप को देखते हुए यह वैक्सीन संक्रमण को पूरी तरह रोकने में कम प्रभावी हो सकती हैं, लेकिन गंभीर बीमारी और अस्पताल में भर्ती होने से अब भी बचाव करती हैं.

‘सिकाडा’ नाम क्यों पड़ा?

इस वैरिएंट को ‘सिकाडा’ नाम इसलिए दिया गया क्योंकि यह उसी नाम के कीड़े की तरह व्यवहार करता है, जो सालों तक छिपा रहता है और अचानक सामने आता है. इसी तरह BA.3.2 भी लंबे समय तक नजरों से दूर रहकर धीरे-धीरे फैलता रहा.

वैज्ञानिकों ने इस वैरिएंट की पहचान के लिए ‘वेस्टवॉटर मॉनिटरिंग’ तकनीक का उपयोग किया. इसमें सीवेज के पानी की जांच कर वायरस के संकेत पहले ही पकड़ लिए जाते हैं, जिससे संक्रमण फैलने से पहले चेतावनी मिल जाती है.

बचाव के उपाय क्या हैं?

विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ सरल उपाय अब भी कारगर हैं:

  • नियमित रूप से हाथ धोना
  • बीमार होने पर घर में रहना
  • भीड़भाड़ से बचना
  • ताजी हवा और साफ वातावरण में रहना
  • गंभीर बीमारी होने पर डॉक्टर से संपर्क बनाए रखना

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