Shaurya NG Missile: आज दुनिया के ज्यादातर देश पश्चिम एशिया के संकट में उलझे हुए हैं, खासकर इजरायल और अमेरिका के बीच ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध की वजह से. इस युद्ध में ईरान के मिसाइल हमलों ने अमेरिकी ताकत को बहुत चुनौती दी है. उनका सबसे मजबूत डिफेंस सिस्टम, थाड और पैट्रियट, ईरान के हमलों को रोकने में नाकाम साबित हुए.
वहीं, इजरायल और अमेरिकी बमबारी के कारण ईरान को भी भारी नुकसान हुआ. लेकिन, भारत ने एक नई मिसाइल विकसित की है, जो थाड, पैट्रियट और यहां तक कि एस-400 जैसे एडवांस डिफेंस सिस्टम को भी चकमा देकर लक्ष्य को भेदने में सक्षम है.
भारत का शौर्य एनजी मिसाइल: एक गेम चेंजर
भारत ने शौर्य एनजी नामक हाइपरसोनिक मिसाइल विकसित की है, जो दुनिया के सबसे उन्नत डिफेंस सिस्टम को चुनौती देने में सक्षम है. यह मिसाइल DRDO (रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन) द्वारा बनाई गई है और इसे खास तौर पर चीन और पाकिस्तान से आने वाले खतरों से निपटने के लिए तैयार किया गया है.
शौर्य एनजी की खासियतें
शौर्य मिसाइल का पहला परीक्षण 2008 में किया गया था. इसकी रेंज 700 से लेकर 1900 किलोमीटर तक है और यह मैक 7.5 (माइक्रोवेव गति) या उससे ज्यादा तेज गति से लक्ष्य को भेद सकती है. अब, शौर्य एनजी का नया वर्शन और भी ज्यादा एडवांस है. इसमें रेंज, सटीकता और बचने की क्षमता को बढ़ाया गया है. DRDO अब 2026 में इसका अगला परीक्षण करने की तैयारी कर रहा है.
इसकी सबसे बड़ी ताकत उसकी गति और मैन्युवरेबिलिटी (नकली रास्ते बदलने की क्षमता) है. यह मिसाइल 2.5 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से चलती है और 50 किलोमीटर की ऊंचाई पर हवा की ऊपरी परत में सीधी उड़ान भरती है. मिसाइल के रास्ते में अचानक बदलाव भी किए जा सकते हैं, जिससे दुश्मन की डिफेंस मिसाइल उसे पकड़ नहीं पाती.
शौर्य एनजी का रडार से बचने का तरीका
जब यह मिसाइल इतनी तेज गति से उड़ती है, तो उसके चारों ओर एक प्लाज्मा की परत बन जाती है. यह परत रडार सिग्नल को सोख लेती है और दुश्मन के रडार सिस्टम को भ्रमित कर देती है. लेकिन DRDO ने इस समस्या का हल भी निकाला है. नए वर्शन में एक स्वदेशी मल्टी-मोड सेंसर लगाया गया है, जिसमें एक्टिव रडार और इमेजिंग इन्फ्रारेड दोनों तकनीकें शामिल हैं. इससे मिसाइल को प्लाज्मा के बावजूद अपने लक्ष्य को ट्रैक करने में मदद मिलती है.
शौर्य एनजी की लॉन्चिंग और सुरक्षा
इस मिसाइल की लॉन्चिंग बहुत सुरक्षित और तेज़ है. इसे कोल्ड लॉन्च तकनीक के जरिए लॉन्च किया जाता है, जिसमें गैस की मदद से मिसाइल को कैनिस्टर से बाहर निकाला जाता है और फिर मुख्य इंजन हवा में जलता है. यह तकनीक मिसाइल के वाहन को सुरक्षित रखती है. नया कंपोजिट कैनिस्टर बिना रखरखाव के 10-15 साल तक मिसाइल को तैयार रख सकता है. पूरे सिस्टम को एक मोबाइल ट्रांसपोर्टर पर रखा जा सकता है, और इसे केवल 5 मिनट में हमले के लिए तैयार किया जा सकता है.
THAAD, पैट्रियट और S-400 को चुनौती
दुनिया के ज्यादातर एयर डिफेंस सिस्टम पुरानी बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए डिजाइन किए गए हैं, जो स्थिर रास्ते पर जाती हैं. लेकिन शौर्य एनजी इन सभी सिस्टम को नाकाम कर देगी.
THAAD: यह ऊंची उड़ान वाली मिसाइलों को रोकने के लिए है, लेकिन शौर्य एनजी कम ऊंचाई पर रहकर और अचानक मुड़कर THAAD की पहुंच से बाहर निकल सकती है.
पैट्रियट (PAC-3): यह कम ऊंचाई के खतरों को रोकने के लिए डिज़ाइन किया गया है, लेकिन शौर्य एनजी की गति और अचानक बदलाव के कारण इसके रिएक्शन टाइम में देरी हो जाती है.
S-400: यह सिस्टम दुनिया के सबसे बेहतरीन में से एक माना जाता है और यह मैक 14 तक की मिसाइलों को रोक सकता है. हालांकि, शौर्य एनजी का अनोखा रास्ता और 50 किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ने के कारण यह S-400 को भी चुनौती देगा.
चीनी DF-17 से तुलना
शौर्य एनजी को अक्सर चीन की DF-17 हाइपरसोनिक मिसाइल से तुलना की जाती है. DF-17 1800-2500 किलोमीटर तक मार सकती है, लेकिन शौर्य एनजी में कुछ महत्वपूर्ण अंतर हैं. शौर्य एनजी क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल है, जो हवा में क्रूज मिसाइल की तरह व्यवहार करती है. वहीं DF-17 हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल है. शौर्य एनजी की मैन्युवरेबिलिटी बहुत ज्यादा है और यह जमीन और समुद्र दोनों से लॉन्च की जा सकती है. यह पाकिस्तान और चीन की सीमा पर उच्च सैन्य ठिकानों को नष्ट करने के लिए आदर्श है.
भारत की आत्मनिर्भरता
शौर्य एनजी पूरी तरह से स्वदेशी है और इसमें रिंग लेजर जायरोस्कोप जैसी उन्नत इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम है, जो इसे 20-30 मीटर की सटीकता देती है. यह मिसाइल परमाणु और पारंपरिक दोनों प्रकार के वारहेड ले जा सकती है. DRDO का यह कदम भारत के आत्मनिर्भरता मिशन को भी मजबूती देता है. जब 2026 में इसका परीक्षण होगा, तो यह दुनिया को दिखाएगा कि भारत अब हाइपरसोनिक युद्ध में भी पीछे नहीं है. शौर्य एनजी न केवल तेज है, बल्कि इतनी चालाक भी है कि वह दुश्मन के सबसे मजबूत बचाव को भी भेद सकती है.
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