Iran-America War: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, ईरान ने अमेरिका को लेकर एक गंभीर और स्पष्ट चेतावनी दी है. ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा है कि अगर ईरान के नेताओं पर हमले जारी रहते हैं, तो वह पश्चिम एशिया में अमेरिकी कंपनियों को निशाना बना सकता है. इस बयान के बाद क्षेत्रीय तनाव और वैश्विक चिंता दोनों में बढ़ोतरी हुई है.
ईरान ने दी हमले की चेतावनी
ईरान ने अपनी सैन्य ताकत का खुला इशारा करते हुए कहा है कि 1 अप्रैल 2026 से तेहरान समय अनुसार रात 8 बजे के बाद अमेरिकी कंपनियों के ठिकानों पर हमले शुरू किए जा सकते हैं. भारत के समय के अनुसार यह रात 10:30 बजे होगा. ईरान ने स्पष्ट किया है कि हर हमले के बाद इन कंपनियों की यूनिट्स को तबाह किया जाएगा, और कर्मचारियों को अपने कार्यस्थलों से तुरंत हटने की चेतावनी भी दी गई है.
अमेरिकी कंपनियां क्या सीधे निशाने पर हैं?
ईरान ने 15 बड़ी अमेरिकी कंपनियों की सूची जारी की है, जिनमें माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, एपल, इंटेल, आईबीएम, टेस्ला, बोइंग और डेल जैसी कंपनियां शामिल हैं. इसके अलावा, एचपी, सिस्को, ओरेकल और जेपी मॉर्गन जैसी कंपनियों के नाम भी सामने आए हैं. इससे यह साफ है कि ईरान सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि अब व्यापारिक और प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कंपनियां भी इसके निशाने पर हैं.
IRGC के निशाने पर ये कंपनियां
माइक्रोसॉफ्ट
गूगल
एपल
इंटेल
आईबीएम (इंटरनेशनल बिजनेस मशीन)
टेस्ला
बोइंग
डेल टेक्नोलॉजीज
हेवलेट पैकार्ड (एचपी)
सिस्को
ओरेकल
मेटा प्लेटफॉर्म्स (फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम)
जेपी मॉर्गन चेस
जनरल इलेक्ट्रिक
हेवलेट पैकार्ड एंटरप्राइज
चेतावनी या गंभीर खतरा?
ईरान की ओर से इस तरह की चेतावनियां पहले भी जारी की जा चुकी हैं, लेकिन इस बार समय सीमा तय करने से खतरा और अधिक गंभीर माना जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह धमकी वास्तविकता में बदलती है, तो पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ सकती है. ईरान का कहना है कि सूचना प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनियां अमेरिका की मदद करती हैं, जिससे उन्हें भी निशाना बनाया जा सकता है.
कर्मचारियों की सुरक्षा पर सवाल
ईरान ने कंपनियों के कर्मचारियों को भी चेतावनी दी है कि वे तुरंत अपने कार्यस्थलों से हट जाएं. इससे यह स्पष्ट होता है कि खतरा सिर्फ कंपनियों के ठिकानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वहां काम करने वाले लोगों की सुरक्षा भी दांव पर हो सकती है.
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर?
अगर ईरान की धमकी सच में लागू होती है और इन कंपनियों पर हमला होता है, तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक नहीं रहेगा. ये कंपनियां वैश्विक स्तर पर व्यापार करती हैं, और इन पर हमले से वैश्विक आईटी, टेक्नोलॉजी और व्यापार क्षेत्र पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है. इससे बाजारों में अस्थिरता और निवेशकों की चिंता में इजाफा हो सकता है. इस मामले पर अमेरिका और उसके सहयोगियों की प्रतिक्रिया भी अहम होगी. यदि जवाबी कार्रवाई होती है, तो हालात और बिगड़ सकते हैं.
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