Social Media AI Scam: डिजिटल दुनिया ने लोगों की जिंदगी को पहले से कहीं ज्यादा आसान बना दिया है. आज परिवार की खुशियां, बच्चों की उपलब्धियां और रोजमर्रा की यादें सोशल मीडिया पर साझा करना आम बात हो गई है. लेकिन यही आदत कई बार बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा भी बन सकती है. साइबर अपराधियों के बदलते तरीके और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बढ़ता दुरुपयोग अब मासूम बच्चों की तस्वीरों को भी निशाना बना रहा है. इसी खतरे को देखते हुए विशेषज्ञ एजेंसियों ने अभिभावकों को सतर्क रहने की सलाह दी है और सोशल मीडिया पर बच्चों की तस्वीरें साझा करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने को कहा है.
पैरेंट्स के लिए जारी की गई नई एडवाइजरी
ब्रिटेन की नेशनल क्राइम एजेंसी (NCA) और इंटरनेट वॉच फाउंडेशन (IWF) ने माता-पिता के लिए नई गाइडलाइन जारी की है. एजेंसियों का कहना है कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा केवल मजबूत पासवर्ड या सुरक्षित डिवाइस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात पर भी निर्भर करती है कि अभिभावक इंटरनेट पर उनके बारे में क्या साझा कर रहे हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार, सोशल मीडिया पर कोई भी पोस्ट डालने से पहले यह जरूर जांच लेना चाहिए कि उसमें बच्चे का चेहरा, स्कूल, यूनिफॉर्म, पता, लोकेशन या कोई अन्य निजी जानकारी दिखाई तो नहीं दे रही है. यदि संभव हो तो बच्चों की तस्वीरें सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर साझा करने से बचना ही सबसे सुरक्षित विकल्प माना गया है.
पोस्ट करने से पहले प्राइवेसी सेटिंग जरूर देखें
अगर किसी कारणवश बच्चों की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा करना जरूरी हो, तो सबसे पहले अकाउंट की प्राइवेसी सेटिंग की जांच करनी चाहिए. विशेषज्ञों का कहना है कि पोस्ट केवल भरोसेमंद लोगों तक सीमित रहे, इसके लिए प्राइवेट अकाउंट या 'क्लोज फ्रेंड्स' जैसे विकल्पों का इस्तेमाल करना बेहतर रहेगा. इससे तस्वीरों तक अनजान लोगों की पहुंच काफी हद तक सीमित की जा सकती है. हालांकि एजेंसियां यह भी स्पष्ट करती हैं कि कोई भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता, इसलिए जितना कम व्यक्तिगत कंटेंट साझा किया जाए, उतना बेहतर है.
AI की मदद से हो रहा तस्वीरों का गलत इस्तेमाल
इंटरनेट वॉच फाउंडेशन (IWF) और नेशनल क्राइम एजेंसी (NCA) के अनुसार, साइबर अपराधी अब AI तकनीक का इस्तेमाल करके बच्चों की सामान्य तस्वीरों को एडिट कर फर्जी और आपत्तिजनक फोटो एवं वीडियो तैयार कर रहे हैं. यह समस्या तेजी से बढ़ रही है और दुनियाभर की सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बन चुकी है.
एजेंसियों के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 के दौरान AI की सहायता से तैयार किए गए 8 हजार से अधिक ऐसे फोटो और वीडियो सामने आए, जिनमें बच्चों से जुड़े यौन शोषण संबंधी फर्जी कंटेंट शामिल था. यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 14 प्रतिशत अधिक दर्ज की गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि AI का दुरुपयोग लगातार बढ़ रहा है.
पुरानी पोस्ट की भी करें समीक्षा
विशेषज्ञ केवल नई तस्वीरें साझा करने को लेकर ही नहीं, बल्कि पहले से सोशल मीडिया पर मौजूद पुरानी पोस्ट की भी समीक्षा करने की सलाह देते हैं. कई बार वर्षों पहले अपलोड की गई तस्वीरों में बच्चों का स्कूल, पहचान, घर का पता या अन्य संवेदनशील जानकारी दिखाई देती है, जिसका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है. यदि ऐसी कोई पोस्ट दिखाई दे, तो उसे हटा देना या उसकी प्राइवेसी सेटिंग बदल देना बेहतर रहेगा. इससे भविष्य में संभावित साइबर जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
रिश्तेदार और स्कूल भी बरतें जिम्मेदारी
एजेंसियों ने केवल माता-पिता ही नहीं, बल्कि रिश्तेदारों, दोस्तों, स्कूलों, खेल क्लबों और अन्य संस्थानों से भी जिम्मेदारी निभाने की अपील की है. किसी भी बच्चे की तस्वीर सोशल मीडिया या अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर साझा करने से पहले उसके अभिभावकों की अनुमति लेना आवश्यक माना गया है. विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों की डिजिटल पहचान की सुरक्षा एक साझा जिम्मेदारी है और इसमें परिवार के साथ-साथ समाज के अन्य लोगों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है.
डिजिटल सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव
तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, साइबर अपराधियों के तरीके भी उतनी ही तेजी से बदल रहे हैं. ऐसे में बच्चों की सुरक्षा के लिए केवल तकनीकी उपाय पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि जागरूकता और सतर्कता भी उतनी ही जरूरी है. सोशल मीडिया पर कोई भी तस्वीर साझा करने से पहले एक बार यह जरूर सोचें कि कहीं वह भविष्य में बच्चे की निजता और सुरक्षा के लिए खतरा तो नहीं बन सकती.
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